अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- خَالِدِينَ فِيهَا: उसमें (लानत या आग में) हमेशा रहने वाले।
- لَا يُخَفَّفُ: हल्का नहीं किया जाएगा।
- الْعَذَابُ: यातना।
- وَلَا هُمْ يُنظَرُونَ: और न ही उन्हें मोहलत दी जाएगी (न ही उन्हें देखा जाएगा यानी उन्हें कोई राहत या अवसर नहीं दिया जाएगा)।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो कुफ्र (इनकार) की हालत में मरते हैं और अल्लाह की लानत और उसकी यातना के पात्र बनते हैं। ऐसे लोग इस लानत और आग में हमेशा के लिए रहेंगे। उनकी यातना में कभी कोई कमी नहीं की जाएगी, न ही एक दिन के लिए भी उसे हल्का किया जाएगा। उन्हें कोई मोहलत नहीं दी जाएगी, न ही उन्हें कोई अवसर मिलेगा कि वे कोई बहाना पेश कर सकें या अपने लिए राहत का कोई रास्ता तलाश कर सकें। वे हमेशा इसी अज़ाब में डूबे रहेंगे, और उनके लिए कोई राहत या छुटकारा नहीं होगा। यह उनके कुफ्र और अल्लाह की आयतों को झुठलाने का नतीजा है, जो उन्होंने दुनिया में किया।
फ़ायदे (सबक):
- यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की यातना बहुत सख्त है और उससे बचने का एकमात्र तरीका ईमान और नेक अमल है। जो लोग दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी करते हैं और उसके दीन को झुठलाते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा है।
- हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह की रहमत और माफ़ी का दरवाज़ा दुनिया में खुला है, लेकिन मौत के बाद कोई मौका नहीं मिलेगा। इसलिए हमें ज़िंदगी में ही तौबा (पश्चाताप) कर लेना चाहिए और अल्लाह की ओर लौट जाना चाहिए।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत मज़बूत है, और उसके अज़ाब से कोई नहीं बच सकता। इसलिए हमें उसके हुक्मों का पालन करना चाहिए और उसकी नाराज़गी से बचना चाहिए।
- यह आयत हमें आख़िरत (परलोक) के विश्वास की याद दिलाती है, जो हमें दुनिया में नेक काम करने और बुराई से बचने की ताक़त देती है।
📜 आयत 160-164 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 162
सूरा अल-बकरा आयत 162 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : न तो उनके अज़ाब ही में तख्फ़ीफ़ (कमी) की जाएगीसूरा आयत 162/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 160–164. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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