अल-बकरा · 172/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا كُلُوا مِن طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ وَاشْكُرُوا لِلَّهِ إِن كُنتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ ۝١٧٢
Yaaa ayyuhal lazeena aamanoo kuloo min taiyibaati maa razaqnaakum washkuroo lillaahi in kuntum iyyaahu ta`budoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों जो कुछ हम ने तुम्हें दिया है उस में से सुथरी चीज़ें (शौक़ से) खाओं और अगर ख़ुदा ही की इबादत करते हो तो उसी का शुक्र करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • طَيِّبَات (तैय्यिबात): पाक, साफ और हलाल चीज़ें।
  • رَزَقْنَاكُمْ (रज़क़नाकुम): جو कुछ हमने तुम्हें दिया है।
  • وَاشْكُرُوا (वश्कुरू): शुक्र अदा करो।
  • تَعْبُدُونَ (तअ्बुदून): बंदगी करते हो, इबादत करते हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ ईमान वालो! अल्लाह तआला तुम्हें नसीहत करता है कि उस पाक और हलाल रिज़्क़ में से खाओ जो उसने तुम्हें दिया है। अल्लाह ने जो चीज़ें हलाल और पाक बनाई हैं, उन्हें खाओ और हराम चीज़ों से बचो। यह आदेश उन काफ़िरों के विपरीत है जो पाक चीज़ों को अपने ऊपर हराम कर लेते हैं और गंदी चीज़ों को हलाल ठहरा लेते हैं। अल्लाह तआला ने अपने बंदों के लिए जो नेमतें दीं, उनका शुक्र अदा करो — दिल से, ज़ुबान से और अपने अंगों से। यानी अल्लाह की नेमतों को पहचानो, उसकी तारीफ़ करो और उसकी इबादत में उनका इस्तेमाल करो। अल्लाह का शुक्र यह है कि उसकी आज्ञा का पालन करो और उसकी नाफ़रमानी से बचो।

यह शुक्र तभी सच्चा होगा जब तुम सच्चे दिल से अल्लाह ही की इबादत करते हो, उसका कोई शरीक नहीं बनाते। अगर तुम सच में अल्लाह के बंदे हो, उसके आगे झुकने वाले और उसकी सुनने वाले हो, तो उसके हलाल रिज़्क़ पर शुक्र करो और उसकी नेमतों का सही इस्तेमाल करो। याद रखो, अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करने से नेमतें और बढ़ती हैं, और नाशुक्री से अज़ाब आता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि एक मुसलमान की ज़िंदगी का हर पहलू — खान-पान, रहन-सहन और इबादत — सब अल्लाह की रज़ा के मुताबिक होना चाहिए। जब हम हलाल और पाक चीज़ें खाते हैं और अल्लाह का शुक्र अदा करते हैं, तो हमारा दिल साफ़ होता है, हमारी इबादत में लज़्ज़त आती है और हमारी दुआएं क़ुबूल होती हैं। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है — उसने हमारे लिए जो कुछ भी हलाल किया है, वह हमारे लिए बेहतरीन है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह की दी हुई नेमतों का शुक्रिया अदा करें और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें।



📜 आयत 170-174 — सूरा अल-बकरा

170وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اتَّبِعُوا مَا أَنزَلَ اللَّهُ قَالُوا بَلْ نَتَّبِعُ مَا أَلْفَيْنَا عَلَيْهِ آبَاءَنَا ۗ أَوَلَوْ كَانَ آبَاؤُهُمْ لَا يَعْقِلُونَ شَيْئًا وَلَا يَهْتَدُونَ
और जब उन से कहा जाता है कि जो हुक्म ख़ुदा की तरफ से नाज़िल हुआ है उस को मानो तो कहते हैं कि नहीं बल्कि हम तो उसी तरीक़े पर चलेंगे जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे उन के बाप दादा कुछ भी न समझते हों और न राहे रास्त ही पर चलते रहे हों
171وَمَثَلُ الَّذِينَ كَفَرُوا كَمَثَلِ الَّذِي يَنْعِقُ بِمَا لَا يَسْمَعُ إِلَّا دُعَاءً وَنِدَاءً ۚ صُمٌّ بُكْمٌ عُمْيٌ فَهُمْ لَا يَعْقِلُونَ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया उन की मिसाल तो उस शख्स की मिसाल है जो ऐसे जानवर को पुकार के अपना हलक़ फाड़े जो आवाज़ और पुकार के सिवा सुनता (समझता ख़ाक) न हो ये लोग बहरे गूँगे अन्धें हैं कि ख़ाक नहीं समझते
172يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا كُلُوا مِن طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ وَاشْكُرُوا لِلَّهِ إِن كُنتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ
ऐ ईमानदारों जो कुछ हम ने तुम्हें दिया है उस में से सुथरी चीज़ें (शौक़ से) खाओं और अगर ख़ुदा ही की इबादत करते हो तो उसी का शुक्र करो
173إِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيْكُمُ الْمَيْتَةَ وَالدَّمَ وَلَحْمَ الْخِنزِيرِ وَمَا أُهِلَّ بِهِ لِغَيْرِ اللَّهِ ۖ فَمَنِ اضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍ وَلَا عَادٍ فَلَا إِثْمَ عَلَيْهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
उसने तो तुम पर बस मुर्दा जानवर और खून और सूअर का गोश्त और वह जानवर जिस पर ज़बह के वक्त ख़ुदा के सिवा और किसी का नाम लिया गया हो हराम किया है पस जो शख्स मजबूर हो और सरकशी करने वाला और ज्यादती करने वाला न हो (और उनमे से कोई चीज़ खा ले) तो उसपर गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
174إِنَّ الَّذِينَ يَكْتُمُونَ مَا أَنزَلَ اللَّهُ مِنَ الْكِتَابِ وَيَشْتَرُونَ بِهِ ثَمَنًا قَلِيلًا ۙ أُولَٰئِكَ مَا يَأْكُلُونَ فِي بُطُونِهِمْ إِلَّا النَّارَ وَلَا يُكَلِّمُهُمُ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ وَلَا يُزَكِّيهِمْ وَلَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
बेशक जो लोग इन बातों को जो ख़ुदा ने किताब में नाज़िल की है छिपाते हैं और उसके बदले थोड़ी सी क़ीमत (दुनयावी नफ़ा) ले लेतें है ये लोग बस अंगारों से अपने पेट भरते हैं और क़यामत के दिन ख़ुदा उन से बात तक तो करेगा नहीं और न उन्हें (गुनाहों से) पाक करेगा और उन्हीं के लिए दर्दनाक अज़ाब है
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
172आयत

अनुवाद — अल-बकरा 172

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Wednesday, September 30, 2026

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