अल-बकरा · 171/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
وَمَثَلُ الَّذِينَ كَفَرُوا كَمَثَلِ الَّذِي يَنْعِقُ بِمَا لَا يَسْمَعُ إِلَّا دُعَاءً وَنِدَاءً ۚ صُمٌّ بُكْمٌ عُمْيٌ فَهُمْ لَا يَعْقِلُونَ ۝١٧١
Wa masalul lazeena kafaroo kamasalil lazee yan`iqu bimaa laa yasma`u illaa du`aaa`anw wa nidaaa`aa; summum bukmun `umyun fahum laa ya`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया उन की मिसाल तो उस शख्स की मिसाल है जो ऐसे जानवर को पुकार के अपना हलक़ फाड़े जो आवाज़ और पुकार के सिवा सुनता (समझता ख़ाक) न हो ये लोग बहरे गूँगे अन्धें हैं कि ख़ाक नहीं समझते

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَنْعِقُ: चरवाहे का जानवरों को आवाज़ देकर हाँकना।
  • دُعَاءً وَنِدَاءً: पुकारना और ऊँची आवाज़ से बुलाना।
  • صُمٌّ: बहरे, जो सच्चाई की आवाज़ सुनकर भी उससे लाभ न उठाएँ।
  • بُكْمٌ: गूँगे, जो सत्य बोलने से असमर्थ हों।
  • عُمْيٌ: अंधे, जो हिदायत की रोशनी न देख सकें।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में काफ़िरों की मिसाल बयान कर रहे हैं। जिस तरह एक चरवाहा जानवरों को पुकारता है और चिल्लाकर हाँकता है, लेकिन वे जानवर केवल आवाज़ की आवाज़ सुनते हैं, उसका मतलब और मक़सद नहीं समझते — ठीक उसी तरह जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) काफ़िरों को ईमान और हिदायत की ओर बुलाते हैं, तो वे उनकी आवाज़ तो सुनते हैं, लेकिन उसका अर्थ और पैग़ाम नहीं समझते। वे अपने बुज़ुर्गों की अंधी पैरवी में लगे रहते हैं और सत्य की पुकार से लाभ नहीं उठाते।

ये काफ़िर हक़ीक़त में बहरे हैं, क्योंकि उन्होंने अपने कान सत्य की आवाज़ से बंद कर लिए हैं; गूँगे हैं, क्योंकि उनकी ज़ुबान सत्य बोलने से अटकी हुई है; और अंधे हैं, क्योंकि उनकी आँखें अल्लाह की निशानियों और तौहीद के सबूतों को देखने से इनकार करती हैं। यही कारण है कि वे अक़्ल से काम नहीं लेते और न ही उस मौलिक सत्य को समझ पाते हैं जो उन्हें नुक़्सान से बचाकर फ़लाह की राह दिखाता है।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का पैग़ाम सुनना और समझना एक बड़ी नेमत है; जो इसे नहीं समझते, वे जानवरों से भी बदतर हालत में हैं।
  2. अक़्ल का सही इस्तेमाल करना हर मुसलमान का फ़र्ज़ है — अल्लाह की आयतों पर ग़ौर करना और उनसे सीख लेना ही इंसान को सच्ची हिदायत देता है।
  3. यह आयत हमें तालीम और दावत के अंदाज़ की अहमियत सिखाती है — जो लोग सुनकर नहीं मानते, उनके लिए दुआ करनी चाहिए और अल्लाह से उनकी हिदायत माँगनी चाहिए।
  4. मुसलमान को चाहिए कि वह अपने कान, आँख और दिल को सत्य के लिए खुला रखे, ताकि वह क़ुरआन और सुन्नत की रोशनी में जीवन गुज़ार सके और अल्लाह की रहमत का हक़दार बने।


📜 आयत 169-173 — सूरा अल-बकरा

169إِنَّمَا يَأْمُرُكُم بِالسُّوءِ وَالْفَحْشَاءِ وَأَن تَقُولُوا عَلَى اللَّهِ مَا لَا تَعْلَمُونَ
वह तो तुम्हें बुराई और बदकारी ही का हुक्म करेगा और ये चाहेगा कि तुम बे जाने बूझे ख़ुदा पर बोहतान बाँधों
170وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اتَّبِعُوا مَا أَنزَلَ اللَّهُ قَالُوا بَلْ نَتَّبِعُ مَا أَلْفَيْنَا عَلَيْهِ آبَاءَنَا ۗ أَوَلَوْ كَانَ آبَاؤُهُمْ لَا يَعْقِلُونَ شَيْئًا وَلَا يَهْتَدُونَ
और जब उन से कहा जाता है कि जो हुक्म ख़ुदा की तरफ से नाज़िल हुआ है उस को मानो तो कहते हैं कि नहीं बल्कि हम तो उसी तरीक़े पर चलेंगे जिस पर हमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे उन के बाप दादा कुछ भी न समझते हों और न राहे रास्त ही पर चलते रहे हों
171وَمَثَلُ الَّذِينَ كَفَرُوا كَمَثَلِ الَّذِي يَنْعِقُ بِمَا لَا يَسْمَعُ إِلَّا دُعَاءً وَنِدَاءً ۚ صُمٌّ بُكْمٌ عُمْيٌ فَهُمْ لَا يَعْقِلُونَ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया उन की मिसाल तो उस शख्स की मिसाल है जो ऐसे जानवर को पुकार के अपना हलक़ फाड़े जो आवाज़ और पुकार के सिवा सुनता (समझता ख़ाक) न हो ये लोग बहरे गूँगे अन्धें हैं कि ख़ाक नहीं समझते
172يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا كُلُوا مِن طَيِّبَاتِ مَا رَزَقْنَاكُمْ وَاشْكُرُوا لِلَّهِ إِن كُنتُمْ إِيَّاهُ تَعْبُدُونَ
ऐ ईमानदारों जो कुछ हम ने तुम्हें दिया है उस में से सुथरी चीज़ें (शौक़ से) खाओं और अगर ख़ुदा ही की इबादत करते हो तो उसी का शुक्र करो
173إِنَّمَا حَرَّمَ عَلَيْكُمُ الْمَيْتَةَ وَالدَّمَ وَلَحْمَ الْخِنزِيرِ وَمَا أُهِلَّ بِهِ لِغَيْرِ اللَّهِ ۖ فَمَنِ اضْطُرَّ غَيْرَ بَاغٍ وَلَا عَادٍ فَلَا إِثْمَ عَلَيْهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
उसने तो तुम पर बस मुर्दा जानवर और खून और सूअर का गोश्त और वह जानवर जिस पर ज़बह के वक्त ख़ुदा के सिवा और किसी का नाम लिया गया हो हराम किया है पस जो शख्स मजबूर हो और सरकशी करने वाला और ज्यादती करने वाला न हो (और उनमे से कोई चीज़ खा ले) तो उसपर गुनाह नहीं है बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
171आयत

अनुवाद — अल-बकरा 171

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Monday, September 28, 2026

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