अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَفِيضُوا: प्रवाहित होना, यहाँ अर्थ है 'रवाना होना' या 'चल पड़ना'।
- مِنْ حَيْثُ أَفَاضَ النَّاسُ: उस स्थान से जहाँ से लोग (अर्थात इब्राहीम अलैहिस्सलाम के अनुयायी) रवाना हुए थे।
- وَاسْتَغْفِرُوا: क्षमा माँगो।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला हज के इस आयत में मुसलमानों को निर्देश देता है कि जब तुम अरफ़ात से लौटो, तो उसी स्थान से लौटो जहाँ से लोग (अर्थात इब्राहीम अलैहिस्सलाम और उनके अनुयायी) लौटते थे। यह निर्देश उन क़ुरैश के लोगों के विरोध में था, जो घमंड के कारण अरफ़ात नहीं जाते थे और मुज़्दलिफ़ा से लौटते थे, क्योंकि वे खुद को दूसरों से श्रेष्ठ मानते थे। अल्लाह ने सिखाया कि हज में विनम्रता और अल्लाह के आदेशों का पालन करना चाहिए, न कि अपनी परंपराओं या घमंड का।
इसके बाद अल्लाह कहता है: "और अल्लाह से क्षमा माँगो" — यानी अपनी कमियों, गलतियों और पापों के लिए अल्लाह से माफ़ी माँगो। यह सिखाता है कि इबादत के बाद भी इंसान को अपनी कमजोरी का एहसास रखना चाहिए और अल्लाह की रहमत का सहारा लेना चाहिए। अल्लाह ने अपनी सिफात (विशेषताएँ) बताईं: "बेशक अल्लाह बड़ा क्षमाशील, अत्यंत दयावान है" — यानी वह अपने बंदों के तौबा करने पर उनके पापों को माफ कर देता है और उन पर रहम करता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में घमंड और अहंकार की कोई जगह नहीं है। हज का असली मकसद अल्लाह के सामने सर झुकाना, अपनी कमजोरी का इज़हार करना और उसकी रहमत के दरवाजे पर दस्तक देना है। अल्लाह अपने बंदों से इतना प्यार करता है कि वह उन्हें बार-बार माफी माँगने का मौका देता है। जब हम हज जैसी महान इबादत के बाद भी इस्तिग़फ़ार (क्षमा माँगने) के पाबंद हैं, तो यह हमारे लिए एक सबक है कि पूरी ज़िंदगी में हमें अल्लाह से माफी माँगते रहना चाहिए। अल्लाह की क्षमा और दया असीम है — वह हर उस बंदे को माफ कर देता है जो सच्चे दिल से तौबा करता है। यही इस्लाम की खूबसूरती है कि वह इंसान को उम्मीद देता है, निराशा नहीं। तो आओ, हम भी अल्लाह से माफी माँगें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रहमत के साये में बिताएँ।
📜 आयत 197-201 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 199
सूरा अल-बकरा आयत 199 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जहाँ से लोग चल खड़े हों वहीं से तुम…सूरा आयत 199/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 197–201. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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