अल-बकरा · 200/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
فَإِذَا قَضَيْتُم مَّنَاسِكَكُمْ فَاذْكُرُوا اللَّهَ كَذِكْرِكُمْ آبَاءَكُمْ أَوْ أَشَدَّ ذِكْرًا ۗ فَمِنَ النَّاسِ مَن يَقُولُ رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا وَمَا لَهُ فِي الْآخِرَةِ مِنْ خَلَاقٍ ۝٢٠٠
Fa-izan qadaitum manaa sikakum fazkurul laaha kazikrikum aabaaa`akum aw ashadda zikraa; faminannaasi mai yaqoolu Rabbanaaa aatinaa fiddunyaa wa maa lahoo fil Aakhirati min khalaaq
📖 हिंदी अर्थ
फिर जब तुम अरक़ाने हज बजा ला चुको तो तुम इस तरह ज़िक्रे ख़ुदा करो जिस तरह तुम अपने बाप दादाओं का ज़िक्र करते हो बल्कि उससे बढ़ कर के फिर बाज़ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि ऐ मेरे परवरदिगार हमको जो (देना है) दुनिया ही में दे दे हालाकि (फिर) आख़िरत में उनका कुछ हिस्सा नहीं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَنَاسِكَكُمْ: हज के सभी कार्य और अनुष्ठान (जैसे तवाफ, सई, रमी आदि)।
  • كَذِكْرِكُمْ آبَاءَكُمْ: जिस तरह तुम अपने बाप-दादाओं की बड़ाई और प्रशंसा किया करते थे।
  • خَلَاقٍ: हिस्सा, भाग, या नेकी का अंश।

तफसीर (व्याख्या):

जब तुम हज के सभी कार्य पूरे कर लो और अपनी इबादतों से फारिग हो जाओ, तो अल्लाह को उसी तरह याद करो और उसकी प्रशंसा करो, जिस तरह तुम अपने बाप-दादाओं की बड़ाई और फख्र किया करते थे—बल्कि उससे भी बढ़कर और अधिक याद करो। क्योंकि अरब के लोग हज से फारिग होकर अपने पूर्वजों की शान में बातें किया करते थे और उनके गुण गाते थे। अल्लाह ने उन्हें सिखाया कि असली याद और प्रशंसा तो अल्लाह की होनी चाहिए, क्योंकि हर नेमत और भलाई उसी की तरफ से है।

इसके बाद अल्लाह ने लोगों के अलग-अलग हालात की ओर इशारा किया। कुछ लोग ऐसे हैं जिनकी सारी कोशिश और दुआ सिर्फ दुनिया के लिए होती है। वे कहते हैं: "ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में ही सब कुछ दे दे—स्वास्थ्य, धन, संतान और दुनिया की खुशहाली।" ऐसे लोगों का दिल दुनिया से लगा होता है और वे आखिरत से मुंह मोड़ लेते हैं। उनके लिए आखिरत में कोई हिस्सा या भलाई नहीं है, क्योंकि उन्होंने आखिरत को भुलाकर सिर्फ दुनिया को ही अपना लक्ष्य बना लिया।

फायदे (सबक):

  1. हज के बाद अल्लाह की याद और उसका शुक्र अदा करना बहुत बड़ी इबादत है। जिस तरह इंसान अपने माता-पिता और बड़ों की बड़ाई करता है, उससे कहीं ज्यादा अल्लाह की बड़ाई और याद करनी चाहिए।
  2. मुसलमान की दुआ में दुनिया और आखिरत दोनों की भलाई होनी चाहिए। सिर्फ दुनिया की चाहत रखना और आखिरत को भूल जाना बड़ी नादानी है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी नीयत और हमारा लक्ष्य सिर्फ दुनिया का माल-ओ-मताअ नहीं होना चाहिए, बल्कि हमें आखिरत की सफलता के लिए भी दुआ करनी चाहिए और उसके लिए काम करना चाहिए।
  4. अल्लाह की याद दिल को सुकून देती है और इंसान को दुनिया की मोहब्बत से निकालकर आखिरत की तरफ ले जाती है। इसलिए हर हालत में अल्लाह का जिक्र करते रहना चाहिए।


📜 आयत 198-202 — सूरा अल-बकरा

198لَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ أَن تَبْتَغُوا فَضْلًا مِّن رَّبِّكُمْ ۚ فَإِذَا أَفَضْتُم مِّنْ عَرَفَاتٍ فَاذْكُرُوا اللَّهَ عِندَ الْمَشْعَرِ الْحَرَامِ ۖ وَاذْكُرُوهُ كَمَا هَدَاكُمْ وَإِن كُنتُم مِّن قَبْلِهِ لَمِنَ الضَّالِّينَ
इस में कोई इल्ज़ाम नहीं है कि (हज के साथ) तुम अपने परवरदिगार के फज़ल (नफ़ा तिजारत) की ख्वाहिश करो और फिर जब तुम अरफात से चल खड़े हो तो मशअरुल हराम के पास ख़ुदा का जिक्र करो और उस की याद भी करो तो जिस तरह तुम्हे बताया है अगरचे तुम इसके पहले तो गुमराहो से थे
199ثُمَّ أَفِيضُوا مِنْ حَيْثُ أَفَاضَ النَّاسُ وَاسْتَغْفِرُوا اللَّهَ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
फिर जहाँ से लोग चल खड़े हों वहीं से तुम भी चल खड़े हो और उससे मग़फिरत की दुआ माँगों बेशक ख़ुदा बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
200فَإِذَا قَضَيْتُم مَّنَاسِكَكُمْ فَاذْكُرُوا اللَّهَ كَذِكْرِكُمْ آبَاءَكُمْ أَوْ أَشَدَّ ذِكْرًا ۗ فَمِنَ النَّاسِ مَن يَقُولُ رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا وَمَا لَهُ فِي الْآخِرَةِ مِنْ خَلَاقٍ
फिर जब तुम अरक़ाने हज बजा ला चुको तो तुम इस तरह ज़िक्रे ख़ुदा करो जिस तरह तुम अपने बाप दादाओं का ज़िक्र करते हो बल्कि उससे बढ़ कर के फिर बाज़ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि ऐ मेरे परवरदिगार हमको जो (देना है) दुनिया ही में दे दे हालाकि (फिर) आख़िरत में उनका कुछ हिस्सा नहीं
201وَمِنْهُم مَّن يَقُولُ رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
और बाज़ बन्दे ऐसे हैं कि जो दुआ करते हैं कि ऐ मेरे पालने वाले मुझे दुनिया में नेअमत दे और आख़िरत में सवाब दे और दोज़ख़ की बाग से बचा
202أُولَٰئِكَ لَهُمْ نَصِيبٌ مِّمَّا كَسَبُوا ۚ وَاللَّهُ سَرِيعُ الْحِسَابِ
यही वह लोग हैं जिनके लिए अपनी कमाई का हिस्सा चैन है
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
200आयत

अनुवाद — अल-बकरा 200

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Monday, September 28, 2026

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