अल-बकरा · 21/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
يَا أَيُّهَا النَّاسُ اعْبُدُوا رَبَّكُمُ الَّذِي خَلَقَكُمْ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ ۝٢١
Yaaa aiyuhan naasu`budoo Rabbakumul lazee khalaqakum wallazeena min qablikum la`allakum tattaqoon
📖 हिंदी अर्थ
ऐ लोगों अपने परवरदिगार की इबादत करो जिसने तुमको और उन लोगों को जो तुम से पहले थे पैदा किया है अजब नहीं तुम परहेज़गार बन जाओ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

يَا أَيُّهَا النَّاسُ اعْبُدُوا رَبَّكُمُ الَّذِي خَلَقَكُمْ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ

शब्दों के अर्थ:

  • اعْبُدُوا: अल्लाह की इबादत करो, उसे अकेला मानो और उसके आदेशों का पालन करो।
  • خَلَقَكُمْ: तुम्हें पैदा किया, अस्तित्व में लाया।
  • لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ: ताकि तुम परहेज़गार बनो, यानी अल्लाह के अज़ाब से बचने के लिए उसके हुक्मों पर अमल करो और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचो।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला सभी इंसानों को संबोधित करते हुए कहता है: "ऐ लोगो! अपने रब की इबादत करो", यानी उसे अकेला मानो, उसके सिवा किसी और की पूजा मत करो। यह आदेश इसलिए है कि वही तुम्हारा रब है जिसने तुम्हें पैदा किया और तुमसे पहले की उम्मतों को भी पैदा किया। उसने तुम्हें अस्तित्व दिया, तुम्हारी देखभाल की और तुम पर अपनी नेमतें बरसाईं। इसलिए उसकी इबादत करना तुम्हारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।

यह आदेश सिर्फ़ किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि सभी इंसानों के लिए है — चाहे वे मक्का के हों या मदीना के, चाहे वे अरब हों या ग़ैर-अरब। हालाँकि जो लोग अभी बालिग़ नहीं हुए या पागल हैं, वे इस ख़िताब के दायरे में नहीं आते, लेकिन असल मक़सद हर समझदार इंसान को इबादत की तरफ़ बुलाना है।

"लَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ" का मतलब यह है कि इबादत करने से तुम परहेज़गार बनोगे — यानी तुम अल्लाह के अज़ाब से बचने का ज़रिया अपनाओगे। जब इंसान अल्लाह की इबादत करता है, उसके आदेशों का पालन करता है और उसकी मना की हुई चीज़ों से दूर रहता है, तो वह धीरे-धीरे तक़वा (परहेज़गारी) हासिल कर लेता है। यही तक़वा उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है।

फ़ायदे:

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की इबादत ही हमारे जीवन का असली मक़सद है, और यही हमें उसकी रहमत के क़रीब लाती है।
  2. अल्लाह ने हमें और हमसे पहले की उम्मतों को पैदा करके अपनी क़ुदरत और रहमत का सबूत दिया है — यह सोचने से दिल में अल्लाह की अज़मत का एहसास पैदा होता है और इबादत की तरफ़ रग़बत बढ़ती है।
  3. इबादत सिर्फ़ नमाज़ और रोज़ा नहीं, बल्कि हर अच्छा काम और हर बुराई से बचना भी इबादत है। यह आयत हमें पूरी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत के रंग में रंगने की तरग़ीब देती है।
  4. तक़वा (परहेज़गारी) हासिल करना हर मुसलमान का निशाना होना चाहिए, क्योंकि यही वह चीज़ है जो हमें अल्लाह के अज़ाब से बचाती है और उसकी मुहब्बत का ज़रिया बनती है।


📜 आयत 19-23 — सूरा अल-बकरा

19أَوْ كَصَيِّبٍ مِّنَ السَّمَاءِ فِيهِ ظُلُمَاتٌ وَرَعْدٌ وَبَرْقٌ يَجْعَلُونَ أَصَابِعَهُمْ فِي آذَانِهِم مِّنَ الصَّوَاعِقِ حَذَرَ الْمَوْتِ ۚ وَاللَّهُ مُحِيطٌ بِالْكَافِرِينَ
या उनकी मिसाल ऐसी है जैसे आसमानी बारिश जिसमें तारिकियाँ ग़र्ज़ बिजली हो मौत के खौफ से कड़क के मारे अपने कानों में ऊँगलियाँ दे लेते हैं हालाँकि खुदा काफ़िरों को (इस तरह) घेरे हुए है (कि उसक हिल नहीं सकते)
20يَكَادُ الْبَرْقُ يَخْطَفُ أَبْصَارَهُمْ ۖ كُلَّمَا أَضَاءَ لَهُم مَّشَوْا فِيهِ وَإِذَا أَظْلَمَ عَلَيْهِمْ قَامُوا ۚ وَلَوْ شَاءَ اللَّهُ لَذَهَبَ بِسَمْعِهِمْ وَأَبْصَارِهِمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ
क़रीब है कि बिजली उनकी ऑंखों को चौन्धिया दे जब उनके आगे बिजली चमकी तो उस रौशनी में चल खड़े हुए और जब उन पर अंधेरा छा गया तो (ठिठके के) खड़े हो गए और खुदा चाहता तो यूँ भी उनके देखने और सुनने की कूवतें छीन लेता बेशक खुदा हर चीज़ पर क़ादिर है
21يَا أَيُّهَا النَّاسُ اعْبُدُوا رَبَّكُمُ الَّذِي خَلَقَكُمْ وَالَّذِينَ مِن قَبْلِكُمْ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ
ऐ लोगों अपने परवरदिगार की इबादत करो जिसने तुमको और उन लोगों को जो तुम से पहले थे पैदा किया है अजब नहीं तुम परहेज़गार बन जाओ
22الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَرْضَ فِرَاشًا وَالسَّمَاءَ بِنَاءً وَأَنزَلَ مِنَ السَّمَاءِ مَاءً فَأَخْرَجَ بِهِ مِنَ الثَّمَرَاتِ رِزْقًا لَّكُمْ ۖ فَلَا تَجْعَلُوا لِلَّهِ أَندَادًا وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ
जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन का बिछौना और आसमान को छत बनाया और आसमान से पानी बरसाया फिर उसी ने तुम्हारे खाने के लिए बाज़ फल पैदा किए पस किसी को खुदा का हमसर न बनाओ हालाँकि तुम खूब जानते हो
23وَإِن كُنتُمْ فِي رَيْبٍ مِّمَّا نَزَّلْنَا عَلَىٰ عَبْدِنَا فَأْتُوا بِسُورَةٍ مِّن مِّثْلِهِ وَادْعُوا شُهَدَاءَكُم مِّن دُونِ اللَّهِ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और अगर तुम लोग इस कलाम से जो हमने अपने बन्दे (मोहम्मद) पर नाज़िल किया है शक में पड़े हो पस अगर तुम सच्चे हो तो तुम (भी) एक सूरा बना लाओ और खुदा के सिवा जो भी तुम्हारे मददगार हों उनको भी बुला लो
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
21आयत

अनुवाद — अल-बकरा 21

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Monday, September 28, 2026

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