Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- तल्बिस (تَلْبِسُوا): मिलाना, मिश्रित करना, छिपाना।
- हक़ (الْحَقَّ): सत्य, वास्तविकता, वह बात जो अल्लाह ने उतारी।
- बातिल (الْبَاطِلِ): असत्य, झूठ, मनगढ़ंत बात।
- तकतुमू (تَكْتُمُوا): छिपाना, प्रकट न करना।
विस्तृत व्याख्या:
अल्लाह तआला इस आयत में अहले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) को संबोधित करते हुए दो बड़े अपराधों से रोकता है:
पहला अपराध: सत्य को असत्य के साथ मिलाना। अर्थात् जो सत्य अल्लाह ने अपनी किताबों (तौरात, इंजील) में उतारा था, उसे अपने मनगढ़ंत विचारों, झूठी व्याख्याओं और विकृतियों के साथ इस प्रकार मिश्रित न करो कि लोगों को सत्य और असत्य में अंतर ही न रह जाए। वे अपने हाथों से लिखकर कहते थे कि यह अल्लाह की ओर से है, जबकि वह अल्लाह की ओर से नहीं होता था। इस प्रकार वे सत्य को असत्य से मिला देते थे।
दूसरा अपराध: सत्य को जानबूझकर छिपाना। उनकी किताबों में अंतिम नबी मुहम्मद ﷺ की स्पष्ट निशानियाँ और विशेषताएँ मौजूद थीं। वे उन्हें अच्छी तरह जानते और पहचानते थे, जैसे कोई अपने बेटे को पहचानता है। लेकिन अपनी सत्ता, पद और सांसारिक लाभों के भय से वे उस सत्य को प्रकट नहीं करते थे, बल्कि उसे छिपाते थे।
अल्लाह ने उन्हें स्पष्ट चेतावनी दी कि यह कार्य उनके अपने ज्ञान के बावजूद किया जा रहा है — "और तुम जानते हुए हो" — अर्थात् तुम्हें पूरा विश्वास है कि यह सत्य है, फिर भी तुम उसे छिपाते हो। यह उनके अपराध को और अधिक गंभीर बनाता है, क्योंकि अज्ञानता में किया गया कार्य क्षमा योग्य हो सकता है, परंतु जानते हुए सत्य को छिपाना और उसे विकृत करना अत्यंत घृणित अपराध है।
शिक्षाएँ और लाभ:
- सत्य की अमानत: सत्य अल्लाह की अमानत है। उसे छिपाना, विकृत करना या असत्य के साथ मिलाना बड़ा पाप है। हर मुसलमान को चाहिए कि वह सत्य को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करे, चाहे उसके विपरीत उसकी अपनी इच्छाएँ हों।
- ज्ञान का दायित्व: जिसे ज्ञान दिया गया है, उससे उस ज्ञान के प्रकट करने का प्रश्न होगा। जानते हुए सत्य को छिपाना अल्लाह की नज़र में बहुत बड़ा अपराध है। यह आयत उन सभी के लिए चेतावनी है जो जानते हुए भी सत्य को नहीं बोलते।
- धोखे से बचाव: सत्य को असत्य के साथ मिलाना लोगों को धोखा देना है। इस्लाम धोखे, भ्रम और धोखाधड़ी से पाक है। हमें अपने जीवन के हर क्षेत्र में स्पष्टता और ईमानदारी अपनानी चाहिए।
- नबी ﷺ की सच्चाई: यह आयत इस बात की गवाह है कि पैगंबर मुहम्मद ﷺ की नबुव्वत की खबर पिछली किताबों में मौजूद थी। यह हमारे लिए उन पर ईमान लाने और उनके मार्ग पर चलने की प्रेरणा है।
- अल्लाह की नज़र: अल्लाह हर उस बात को जानता है जो हम छिपाते हैं। हमें याद रखना चाहिए कि हमारे अंदर का विश्वास और बाहर का व्यवहार एक जैसा होना चाहिए। दिखावा और पाखंड अल्लाह को बहुत नापसंद है।
📜 आयत 40-44 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 42
सूरा अल-बकरा आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हक़ को बातिल के साथ न मिलाओ और हक़…सूरा आयत 42/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


