अल-बकरा · 42/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
وَلَا تَلْبِسُوا الْحَقَّ بِالْبَاطِلِ وَتَكْتُمُوا الْحَقَّ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ ۝٤٢
Wa laa talbisul haqqa bilbaatili wa taktumul haqqa wa antum ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और हक़ को बातिल के साथ न मिलाओ और हक़ बात को न छिपाओ हालाँकि तुम जानते हो और पाबन्दी से नमाज़ अदा करो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • तल्बिस (تَلْبِسُوا): मिलाना, मिश्रित करना, छिपाना।
  • हक़ (الْحَقَّ): सत्य, वास्तविकता, वह बात जो अल्लाह ने उतारी।
  • बातिल (الْبَاطِلِ): असत्य, झूठ, मनगढ़ंत बात।
  • तकतुमू (تَكْتُمُوا): छिपाना, प्रकट न करना।

विस्तृत व्याख्या:

अल्लाह तआला इस आयत में अहले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) को संबोधित करते हुए दो बड़े अपराधों से रोकता है:

पहला अपराध: सत्य को असत्य के साथ मिलाना। अर्थात् जो सत्य अल्लाह ने अपनी किताबों (तौरात, इंजील) में उतारा था, उसे अपने मनगढ़ंत विचारों, झूठी व्याख्याओं और विकृतियों के साथ इस प्रकार मिश्रित न करो कि लोगों को सत्य और असत्य में अंतर ही न रह जाए। वे अपने हाथों से लिखकर कहते थे कि यह अल्लाह की ओर से है, जबकि वह अल्लाह की ओर से नहीं होता था। इस प्रकार वे सत्य को असत्य से मिला देते थे।

दूसरा अपराध: सत्य को जानबूझकर छिपाना। उनकी किताबों में अंतिम नबी मुहम्मद ﷺ की स्पष्ट निशानियाँ और विशेषताएँ मौजूद थीं। वे उन्हें अच्छी तरह जानते और पहचानते थे, जैसे कोई अपने बेटे को पहचानता है। लेकिन अपनी सत्ता, पद और सांसारिक लाभों के भय से वे उस सत्य को प्रकट नहीं करते थे, बल्कि उसे छिपाते थे।

अल्लाह ने उन्हें स्पष्ट चेतावनी दी कि यह कार्य उनके अपने ज्ञान के बावजूद किया जा रहा है — "और तुम जानते हुए हो" — अर्थात् तुम्हें पूरा विश्वास है कि यह सत्य है, फिर भी तुम उसे छिपाते हो। यह उनके अपराध को और अधिक गंभीर बनाता है, क्योंकि अज्ञानता में किया गया कार्य क्षमा योग्य हो सकता है, परंतु जानते हुए सत्य को छिपाना और उसे विकृत करना अत्यंत घृणित अपराध है।


शिक्षाएँ और लाभ:

  1. सत्य की अमानत: सत्य अल्लाह की अमानत है। उसे छिपाना, विकृत करना या असत्य के साथ मिलाना बड़ा पाप है। हर मुसलमान को चाहिए कि वह सत्य को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करे, चाहे उसके विपरीत उसकी अपनी इच्छाएँ हों।
  2. ज्ञान का दायित्व: जिसे ज्ञान दिया गया है, उससे उस ज्ञान के प्रकट करने का प्रश्न होगा। जानते हुए सत्य को छिपाना अल्लाह की नज़र में बहुत बड़ा अपराध है। यह आयत उन सभी के लिए चेतावनी है जो जानते हुए भी सत्य को नहीं बोलते।
  3. धोखे से बचाव: सत्य को असत्य के साथ मिलाना लोगों को धोखा देना है। इस्लाम धोखे, भ्रम और धोखाधड़ी से पाक है। हमें अपने जीवन के हर क्षेत्र में स्पष्टता और ईमानदारी अपनानी चाहिए।
  4. नबी ﷺ की सच्चाई: यह आयत इस बात की गवाह है कि पैगंबर मुहम्मद ﷺ की नबुव्वत की खबर पिछली किताबों में मौजूद थी। यह हमारे लिए उन पर ईमान लाने और उनके मार्ग पर चलने की प्रेरणा है।
  5. अल्लाह की नज़र: अल्लाह हर उस बात को जानता है जो हम छिपाते हैं। हमें याद रखना चाहिए कि हमारे अंदर का विश्वास और बाहर का व्यवहार एक जैसा होना चाहिए। दिखावा और पाखंड अल्लाह को बहुत नापसंद है।


📜 आयत 40-44 — सूरा अल-बकरा

40يَا بَنِي إِسْرَائِيلَ اذْكُرُوا نِعْمَتِيَ الَّتِي أَنْعَمْتُ عَلَيْكُمْ وَأَوْفُوا بِعَهْدِي أُوفِ بِعَهْدِكُمْ وَإِيَّايَ فَارْهَبُونِ
ऐ बनी इसराईल (याक़ूब की औलाद) मेरे उन एहसानात को याद करो जो तुम पर पहले कर चुके हैं और तुम मेरे एहद व इक़रार (ईमान) को पूरा करो तो मैं तुम्हारे एहद (सवाब) को पूरा करूँगा, और मुझ ही से डरते रहो
41وَآمِنُوا بِمَا أَنزَلْتُ مُصَدِّقًا لِّمَا مَعَكُمْ وَلَا تَكُونُوا أَوَّلَ كَافِرٍ بِهِ ۖ وَلَا تَشْتَرُوا بِآيَاتِي ثَمَنًا قَلِيلًا وَإِيَّايَ فَاتَّقُونِ
और जो (कुरान) मैंने नाज़िल किया वह उस किताब (तौरेत) की (भी) तसदीक़ करता हूँ जो तुम्हारे पास है और तुम सबसे चले उसके इन्कार पर मौजूद न हो जाओ और मेरी आयतों के बदले थोड़ी क़ीमत (दुनयावी फायदा) न लो और मुझ ही से डरते रहो
42وَلَا تَلْبِسُوا الْحَقَّ بِالْبَاطِلِ وَتَكْتُمُوا الْحَقَّ وَأَنتُمْ تَعْلَمُونَ
और हक़ को बातिल के साथ न मिलाओ और हक़ बात को न छिपाओ हालाँकि तुम जानते हो और पाबन्दी से नमाज़ अदा करो
43وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَارْكَعُوا مَعَ الرَّاكِعِينَ
और ज़कात दिया करो और जो लोग (हमारे सामने) इबादत के लिए झुकते हैं उनके साथ तुम भी झुका करो
44۞ أَتَأْمُرُونَ النَّاسَ بِالْبِرِّ وَتَنسَوْنَ أَنفُسَكُمْ وَأَنتُمْ تَتْلُونَ الْكِتَابَ ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
और तुम लोगों से नेकी करने को कहते हो और अपनी ख़बर नहीं लेते हालाँकि तुम किताबे खुदा को (बराबर) रटा करते हो तो तुम क्या इतना भी नहीं समझते
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
42आयत

अनुवाद — अल-बकरा 42

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Wednesday, September 30, 2026

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