Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَاسْتَعِينُوا: मदद माँगो, सहायता चाहो।
- بِالصَّبْرِ: धैर्य और संयम से।
- وَالصَّلَاةِ: और नमाज़ से।
- لَكَبِيرَةٌ: अत्यंत कठिन, भारी और कष्टदायक।
- الْخَاشِعِينَ: वे लोग जो अल्लाह के आगे झुकने वाले, विनम्र और उसके प्रति पूर्ण समर्पित हों।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बंदों को नसीहत करता है कि अपने जीवन के हर मामले में — चाहे वह दीन (धार्मिक) हो या दुनियावी — तुम धैर्य और नमाज़ के माध्यम से अल्लाह से मदद माँगो। धैर्य का अर्थ है नफ्स को गुनाहों से रोकना, मुसीबतों पर सब्र करना और इबादत पर स्थिर रहना। नमाज़ वह पवित्र साधन है जो बंदे को अल्लाह से जोड़ती है, उसके गुनाहों को मिटाती है और उसे अल्लाह की रहमत और हिफ़ाज़त का हक़दार बनाती है।
यह काम (धैर्य और नमाज़ के ज़रिए मदद माँगना) बहुत भारी और कठिन है, लेकिन यह कठिनाई उन लोगों पर नहीं होती जो अल्लाह के सामने सच्चे दिल से झुकते हैं, उसकी रज़ा पर राज़ी रहते हैं और अपने दिलों में उसका खौफ़ रखते हैं। ये ख़ाशेअन (विनम्र) लोग ही हैं जो नमाज़ की असली लज़्ज़त और सब्र की बरकत को महसूस करते हैं, क्योंकि उनके दिल अल्लाह की याद में जीते हैं और उनकी आँखें उसी की तरफ़ लगी रहती हैं।
फ़ायदे (उपदेश):
- यह आयत हमें सिखाती है कि जीवन की हर मुश्किल में अल्लाह ही सबसे बड़ा सहारा है, और उस तक पहुँचने के दो सबसे मज़बूत ज़रिये सब्र और नमाज़ हैं।
- नमाज़ सिर्फ़ एक रस्म नहीं, बल्कि एक ताकत है — जो इंसान को मुसीबतों में स्थिर रखती है, उसके दिल को सुकून देती है और उसे अल्लाह की मदद का हक़दार बनाती है।
- सब्र का मतलब केवल बर्दाश्त करना नहीं, बल्कि गुनाहों से बचना, इबादत पर क़ायम रहना और अल्लाह के फ़ैसलों पर राज़ी रहना है — यही सच्ची कामयाबी की कुंजी है।
- जो लोग अल्लाह के सामने विनम्र होते हैं, उनके लिए इबादत बोझ नहीं बल्कि राहत बन जाती है — यह दिखाता है कि अल्लाह से नज़दीकी हर कठिनाई को आसान कर देती है।
- यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह अपने बंदों से मुहब्बत करता है और उन्हें ताकत देने के लिए ये आसान रास्ते दिखाता है — ताकि वे कभी मायूस न हों और हमेशा उसी की तरफ़ रुजू करें।
📜 आयत 43-47 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 45
सूरा अल-बकरा आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (मुसीबत के वक्त) सब्र और नमाज़ का सहारा पकड़ो…सूरा आयत 45/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 43–47. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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