अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अल-बिर्र (الْبِرّ): नेकी, भलाई, ईमान और आज्ञाकारिता।
- तन्सौन (تَنْسَوْنَ): तुम भूल जाते हो — अर्थात अपने आप को छोड़ देते हो, उस पर अमल नहीं करते।
- तत्लून (تَتْلُونَ): तुम पढ़ते हो (तिलावत करते हो)।
- अफ़ला तअ़्क़िलून (أَفَلَا تَعْقِلُونَ): क्या तुम अक़्ल (समझ-बूझ) का इस्तेमाल नहीं करते?
तफ़सीर:
यह आयत उन लोगों को नसीहत करती है जो दूसरों को भलाई का हुक्म देते हैं, लेकिन खुद उस पर अमल नहीं करते। अल्लाह तआला फ़रमाता है: “क्या तुम लोगों को नेकी का हुक्म देते हो और अपने आप को भूल जाते हो, हालाँकि तुम किताब (तौरात) पढ़ते हो? क्या तुम अक़्ल नहीं रखते?”
यह आयत यहूदी विद्वानों के बारे में उतरी, जो अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से कहते थे कि मुहम्मद ﷺ के दीन पर साबित रहो, उनका दीन हक़ है और उनकी बात सच्ची है — लेकिन वे खुद उन पर ईमान नहीं लाते थे। वे तौरात पढ़ते थे, जिसमें मुहम्मद ﷺ की निशानियाँ और गुण मौजूद थे, फिर भी वे उनका अनुसरण करने से मुँह मोड़ते थे।
अल्लाह तआला उन्हें उनके इस बुरे काम पर टोकते हुए फ़रमाता है: “क्या तुम अक़्ल का इस्तेमाल नहीं करते?” यानी अगर तुम सच में समझदार होते, तो पहले खुद उस हक़ को क़बूल करते जिसकी तरफ़ दूसरों को बुलाते हो। यह एक बहुत बड़ी नसीहत है — इंसान को चाहिए कि वह दूसरों को भलाई की दावत देने से पहले खुद उस पर अमल करे, क्योंकि अमल के बिना सिर्फ़ ज़बान से कहना लोगों पर असर नहीं डालता।
यह आयत हमें सिखाती है कि दावत और नसीहत का सबसे बड़ा सबूत खुद हमारा अमल है। जब हम दूसरों को नेकी की तरफ़ बुलाते हैं, तो हमें सबसे पहले खुद उस पर चलना चाहिए। अल्लाह तआला ने इस आयत में उन लोगों की मज़म्मत (निंदा) की है जो दूसरों को भलाई का हुक्म देते हैं लेकिन खुद उससे ग़ाफ़िल रहते हैं।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमारे लिए एक आईना है। हमें चाहिए कि हम दूसरों को नेकी की दावत दें, लेकिन साथ ही अपनी ज़िंदगी को भी उसी नेकी पर ढालें। जब हमारा अमल हमारी बात की तस्दीक़ करेगा, तो हमारी दावत ज़्यादा असरदार होगी। अल्लाह तआला हमें अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए — आमीन।
📜 आयत 42-46 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 44
सूरा अल-बकरा आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम लोगों से नेकी करने को कहते हो और…सूरा आयत 44/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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