अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَظُنُّونَ – यहाँ इसका अर्थ "यक़ीन रखना" है, न कि संदेह करना। अरबी भाषा में कभी-कभी "ظن" का प्रयोग यक़ीन के अर्थ में होता है।
- مُلَاقُو رَبِّهِمْ – अपने रब से मिलने वाले, यानी क़यामत के दिन अल्लाह के सामने हाज़िर होने वाले।
- رَاجِعُونَ – लौटकर जाने वाले, यानी मरने के बाद अल्लाह की ओर पलटकर जाने वाले।
तफ़सीर:
ये वे लोग हैं जो अल्लाह का डर रखते हैं और उसकी रहमत की उम्मीद भी रखते हैं। वे पूरे यक़ीन के साथ जानते हैं कि एक दिन उन्हें मौत के बाद अपने रब के सामने हाज़िर होना है और क़यामत के दिन वे उसी की ओर लौटकर जाएंगे। वे इस बात पर दृढ़ विश्वास रखते हैं कि अल्लाह उन्हें उनके अच्छे और बुरे कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा। यह यक़ीन उनके दिलों में इतना गहरा होता है कि वे दुनिया की किसी भी चीज़ को अल्लाह की आज्ञा से आगे नहीं बढ़ने देते। वे जानते हैं कि यह दुनिया का जीवन अस्थायी है, और असली जीवन आख़िरत का है, जहाँ हर इंसान अपने किए का फल पाएगा। यही वह विश्वास है जो उन्हें नमाज़, ज़कात और अन्य अच्छे कामों पर सब्र और स्थिरता प्रदान करता है।
फ़ायदे:
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि मौत के बाद जीवन और अल्लाह के सामने हाज़िर होने का यक़ीन इंसान को अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है और बुराई से रोकता है।
- यह विश्वास कि हमें अपने रब से मिलना है, इंसान के दिल में अल्लाह की मुहब्बत और उसका खौफ़ पैदा करता है, जिससे वह दुनिया की मोहब्बत में ग़ाफ़िल नहीं होता।
- यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान सिर्फ ज़ुबान से नहीं, बल्कि दिल के यक़ीन और अमल से होता है — जो इंसान को हर हाल में नेकी पर क़ायम रखता है।
- अल्लाह से मुलाक़ात की आशा और उसकी ओर लौटने का यक़ीन इंसान को मुसीबतों में सब्र और ख़ुशहाली में शुक्र करने की ताक़त देता है।
📜 आयत 44-48 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 46
सूरा अल-बकरा आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कि वह अपने परवरदिगार की बारगाह में हाज़िर होंगे और…सूरा आयत 46/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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