अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- नकालन: दंड, सबक और शिक्षा का साधन।
- लिमा बैना यदैहा: उन पापों के लिए जो पहले हो चुके थे।
- वा मा खल्फहा: उन पापों के लिए जो उसके बाद हुए (यानी मछली पकड़ने का अपराध)।
- मौ'इज़ा: नसीहत, चेतावनी और याद दिलाने का ज़रिया।
- लिल्मुत्तक़ीन: उन लोगों के लिए जो अल्लाह से डरते हैं और उसकी नाफ़रमानी से बचते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने उस बस्ती (क़रिया) के लोगों को, जिन्होंने सब्त (शनिवार) के दिन मछली पकड़ने में अल्लाह की हद से उल्लंघन किया था, बंदरों में तब्दील कर दिया। यह सज़ा सिर्फ़ उन्हीं तक सीमित नहीं रही, बल्कि अल्लाह ने इस घटना को एक ऐसा निशान बना दिया जो आने वाली नस्लों के लिए सबक़ बन गया।
यह दंड उन लोगों के लिए भी था जो उस बस्ती के आस-पास रहते थे, ताकि वे देखें और समझें कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम कितना भयानक हो सकता है। और उन लोगों के लिए भी जो उनके बाद आए, ताकि वे इससे सीख लें और अल्लाह के हुक्म की उल्लंघन करने की हिम्मत न करें। यह घटना उन लोगों के लिए एक स्पष्ट चेतावनी थी कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है और वह अपनी हदों को तोड़ने वालों को कभी नहीं छोड़ता।
साथ ही, अल्लाह ने इस घटना को मुत्तक़ीन (परहेज़गारों) के लिए एक नसीहत और याद दिलाने का ज़रिया बनाया। यानी जो लोग अल्लाह से डरते हैं और उसकी रज़ा के तालिब हैं, वे इस घटना से सबक़ लेते हैं, अपने ईमान पर क़ायम रहते हैं, और अल्लाह की नाफ़रमानी से दूर रहते हैं। यह उनके लिए एक रहमत है कि वे दूसरों के अंजाम से सीखकर अपनी ज़िंदगी को सही रास्ते पर चलाते हैं।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हर आज्ञा का पालन करना कितना ज़रूरी है। जब हम अल्लाह के हुक्मों की उल्लंघन करते हैं, तो हम सिर्फ़ अपने लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए बुराई का सबब बनते हैं। लेकिन अल्लाह रहीम और करीम है—वह हमें मौक़ा देता है कि हम दूसरों की ग़लतियों से सीखें और अपनी ज़िंदगी को सही करें।
मुत्तक़ी बनने का मतलब है कि हम अल्लाह के हर हुक्म को दिल से क़बूल करें, चाहे वह हमारी समझ में न आए। क्योंकि अल्लाह ही बेहतर जानता है कि हमारे लिए क्या भला है और क्या बुरा। यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की नज़दीकी और उसकी रहमत उन्हीं को मिलती है जो उससे डरते हैं और उसकी राह पर चलते हैं।
आओ, हम इस घटना से सबक़ लें और अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों को सबसे ऊपर रखें। यही कामयाबी की राह है—दुनिया में भी और आख़िरत में भी। अल्लाह हमें सच्चा मुत्तक़ी बनने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 64-68 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 66
सूरा अल-बकरा आयत 66 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : पस हमने इस वाक़ये से उन लोगों के वास्ते जिन…सूरा आयत 66/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 64–68. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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