अल-बकरा · 65/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ الَّذِينَ اعْتَدَوْا مِنكُمْ فِي السَّبْتِ فَقُلْنَا لَهُمْ كُونُوا قِرَدَةً خَاسِئِينَ ۝٦٥
Wa laqad `alimtumul lazeena`-tadaw minkum fis Sabti faqulnaa lahum koonoo qiradatan khaasi`een
📖 हिंदी अर्थ
और अपनी क़ौम से उन लोगों की हालत तो तुम बखूबी जानते हो जो शम्बे (सनीचर) के दिन अपनी हद से गुज़र गए (कि बावजूद मुमानिअत शिकार खेलने निकले) तो हमने उन से कहा कि तुम राइन्दे गए बन्दर बन जाओ (और वह बन्दर हो गए)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اعْتَدَوْا: हद से बढ़ गए, उल्लंघन किया।
  • السَّبْت: शनिवार का दिन, जो यहूदियों के लिए आराम और इबादत का दिन था, और उस दिन मछली पकड़ना उन पर हराम किया गया था।
  • قِرَدَةً: बंदर।
  • خَاسِئِينَ: अपमानित, दूर किए हुए, फटकारे हुए।

तफसीर (व्याख्या):

ऐ बनी इसराइल की संतान! तुम उन लोगों के हाल को अच्छी तरह जानते हो, जिन्होंने तुममें से सब्त (शनिवार) के दिन की पवित्रता का उल्लंघन किया था। उन पर यह आदेश था कि वे उस दिन मछली का शिकार न करें, लेकिन उन्होंने चालाकी से इस हुक्म को तोड़ा—उन्होंने शनिवार से पहले जाल बिछा दिए और शनिवार के बाद उन्हें निकाला, ताकि वे अपनी हरकत को जायज़ ठहरा सकें। यह उनकी सरासर हद से बढ़ना था, क्योंकि वे अल्लाह की स्पष्ट आज्ञा को धोखे से टाल रहे थे।

जब उन्होंने यह ज़ुल्म और हठधर्मी की, तो अल्लाह ने उन्हें अपनी क़ुदरत से बंदरों में बदल दिया—अपमानित और रहमत से दूर किए हुए। यह उनकी शक्ल ही नहीं, बल्कि उनके कर्मों का प्रतिफल था, क्योंकि उन्होंने अल्लाह के दीन के साथ मज़ाक किया और उसकी हदों को तोड़ा।

दावत और सीख:

यह क़िस्सा सिर्फ़ इतिहास का एक वाक़या नहीं, बल्कि हर उस इंसान के लिए एक ज़ोरदार नसीहत है जो अल्लाह के हुक्मों को हल्का समझता है या उनमें हील-हरकतें तलाशता है। अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह उन लोगों को कभी नहीं छोड़ता जो उसकी नाफ़रमानी में हद से बढ़ जाते हैं। लेकिन साथ ही, यह भी याद रखो कि अल्लाह तौबा करने वालों को बहुत प्यार करता है—जो कोई अपनी गलती से बाज़ आए और सच्चे दिल से रुजू करे, अल्लाह उसकी तौबा क़बूल करता है और उसे माफ़ कर देता है।

इसलिए, ऐ मुसलमान! अल्लाह के हुक्मों को पूरे दिल से क़बूल करो, उनमें कोई कमी या धोखा न करो। दीन में नर्मी और सच्चाई अपनाओ, क्योंकि अल्लाह उन्हीं को कामयाब बनाता है जो उसकी राह पर सीधे चलते हैं। यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम बहुत बुरा होता है, और उसकी इताअत (आज्ञा पालन) ही सच्ची इज़्ज़त और कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 63-67 — सूरा अल-बकरा

63وَإِذْ أَخَذْنَا مِيثَاقَكُمْ وَرَفَعْنَا فَوْقَكُمُ الطُّورَ خُذُوا مَا آتَيْنَاكُم بِقُوَّةٍ وَاذْكُرُوا مَا فِيهِ لَعَلَّكُمْ تَتَّقُونَ
और (वह वक्त याद करो) जब हमने (तामीले तौरेत) का तुमसे एक़रार कर लिया और हमने तुम्हारे सर पर तूर से (पहाड़ को) लाकर लटकाया और कह दिया कि तौरेत जो हमने तुमको दी है उसको मज़बूत पकड़े रहो और जो कुछ उसमें है उसको याद रखो
64ثُمَّ تَوَلَّيْتُم مِّن بَعْدِ ذَٰلِكَ ۖ فَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ لَكُنتُم مِّنَ الْخَاسِرِينَ
ताकि तुम परहेज़गार बनो फिर उसके बाद तुम (अपने एहदो पैमान से) फिर गए पस अगर तुम पर खुदा का फज़ल और उसकी मेहरबानी न होती तो तुमने सख्त घाटा उठाया होता
65وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ الَّذِينَ اعْتَدَوْا مِنكُمْ فِي السَّبْتِ فَقُلْنَا لَهُمْ كُونُوا قِرَدَةً خَاسِئِينَ
और अपनी क़ौम से उन लोगों की हालत तो तुम बखूबी जानते हो जो शम्बे (सनीचर) के दिन अपनी हद से गुज़र गए (कि बावजूद मुमानिअत शिकार खेलने निकले) तो हमने उन से कहा कि तुम राइन्दे गए बन्दर बन जाओ (और वह बन्दर हो गए)
66فَجَعَلْنَاهَا نَكَالًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهَا وَمَا خَلْفَهَا وَمَوْعِظَةً لِّلْمُتَّقِينَ
पस हमने इस वाक़ये से उन लोगों के वास्ते जिन के सामने हुआ था और जो उसके बाद आनेवाले थे अज़ाब क़रार दिया, और परहेज़गारों के लिए नसीहत
67وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُكُمْ أَن تَذْبَحُوا بَقَرَةً ۖ قَالُوا أَتَتَّخِذُنَا هُزُوًا ۖ قَالَ أَعُوذُ بِاللَّهِ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْجَاهِلِينَ
और (वह वक्त याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि खुदा तुम लोगों को ताकीदी हुक्म करता है कि तुम एक गाय ज़िबाह करो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमसे दिल्लगी करते हो मूसा ने कहा मैं खुदा से पनाह माँगता हूँ कि मैं जाहिल बनूँ
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
65आयत

अनुवाद — अल-बकरा 65

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Monday, September 28, 2026

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