Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- هُزُوًا: मज़ाक, उपहास, ठट्ठा।
- أَعُوذُ بِاللَّهِ: मैं अल्लाह की शरण माँगता हूँ।
- الْجَاهِلِينَ: अज्ञानी लोग, जो अनुचित बातें करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ बनी इसराइल! उस समय को याद करो जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से कहा: "अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि तुम एक गाय ज़ब्ह करो।" यह आदेश एक हत्या के रहस्य को उजागर करने के सिलसिले में था, जब उन्होंने मूसा से एक मुर्दे के क़ातिल का पता पूछा था। लेकिन उन्होंने अल्लाह के आदेश को सुनकर तुरंत उसे मानने के बजाय अकड़ और हठधर्मी दिखाते हुए कहा: "क्या तू हमारा मज़ाक उड़ा रहा है? हम तुझसे एक गंभीर मामले के बारे में पूछ रहे हैं और तू हमें गाय ज़ब्ह करने को कह रहा है?" उन्हें यह बात अजीब लगी क्योंकि उनके सवाल और इस आदेश के बीच कोई स्पष्ट संबंध नज़र नहीं आ रहा था, और वे इसके पीछे की हिकमत को नहीं समझ पा रहे थे।
मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उनकी इस बात पर बड़ी नम्रता और गंभीरता से जवाब दिया: "मैं अल्लाह की शरण माँगता हूँ कि मैं अज्ञानियों में से हो जाऊँ।" उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि मज़ाक उड़ाना और उपहास करना अज्ञानियों का काम है, और वे इससे बिल्कुल पाक हैं। वे अल्लाह के नबी हैं और उनका काम केवल अल्लाह का संदेश पहुँचाना है, न कि लोगों के साथ मज़ाक करना। उन्होंने अपनी बात को अल्लाह की पनाह में देकर यह भी बताया कि वे अल्लाह के आदेश को पूरी गंभीरता से पेश कर रहे हैं, और इसमें कोई मज़ाक या हँसी की गुंजाइश नहीं है।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह के आदेशों को बिना किसी हिचकिचाहट और सवाल-जवाब के स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे अधिक जानने वाला है और उसका हर आदेश हिकमत से भरा होता है।
- नबियों और अल्लाह के धर्म के प्रचारकों के साथ बदतमीज़ी और उन्हें मज़ाक समझना बहुत बड़ी गलती है; उनका हर काम और बात गंभीर और सच्ची होती है।
- मूसा (अलैहिस्सलाम) का जवाब हमें सिखाता है कि जब कोई व्यक्ति हम पर झूठा इल्ज़ाम लगाए, तो हमें सब्र और नम्रता से जवाब देना चाहिए और अल्लाह की शरण माँगनी चाहिए, न कि गुस्से में आकर जवाब देना चाहिए।
- उपहास और मज़ाक करना अज्ञानता की निशानी है, और एक मुसलमान को चाहिए कि वह इस बुरी आदत से बचे और हमेशा सच्चाई और गंभीरता को अपनाए।
📜 आयत 65-69 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 67
सूरा अल-बकरा आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (वह वक्त याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम…सूरा आयत 67/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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