अल-बकरा · 67/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُكُمْ أَن تَذْبَحُوا بَقَرَةً ۖ قَالُوا أَتَتَّخِذُنَا هُزُوًا ۖ قَالَ أَعُوذُ بِاللَّهِ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْجَاهِلِينَ ۝٦٧
Wa iz qaala Moosaa liqawmiheee innal laaha yaamurukum an tazbahoo baqaratan qaalooo atattakhizunna huzuwan qaala a`oozu billaahi an akoona minal jaahileen
📖 हिंदी अर्थ
और (वह वक्त याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि खुदा तुम लोगों को ताकीदी हुक्म करता है कि तुम एक गाय ज़िबाह करो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमसे दिल्लगी करते हो मूसा ने कहा मैं खुदा से पनाह माँगता हूँ कि मैं जाहिल बनूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • هُزُوًا: मज़ाक, उपहास, ठट्ठा।
  • أَعُوذُ بِاللَّهِ: मैं अल्लाह की शरण माँगता हूँ।
  • الْجَاهِلِينَ: अज्ञानी लोग, जो अनुचित बातें करते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ बनी इसराइल! उस समय को याद करो जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम से कहा: "अल्लाह तुम्हें आदेश देता है कि तुम एक गाय ज़ब्ह करो।" यह आदेश एक हत्या के रहस्य को उजागर करने के सिलसिले में था, जब उन्होंने मूसा से एक मुर्दे के क़ातिल का पता पूछा था। लेकिन उन्होंने अल्लाह के आदेश को सुनकर तुरंत उसे मानने के बजाय अकड़ और हठधर्मी दिखाते हुए कहा: "क्या तू हमारा मज़ाक उड़ा रहा है? हम तुझसे एक गंभीर मामले के बारे में पूछ रहे हैं और तू हमें गाय ज़ब्ह करने को कह रहा है?" उन्हें यह बात अजीब लगी क्योंकि उनके सवाल और इस आदेश के बीच कोई स्पष्ट संबंध नज़र नहीं आ रहा था, और वे इसके पीछे की हिकमत को नहीं समझ पा रहे थे।

मूसा (अलैहिस्सलाम) ने उनकी इस बात पर बड़ी नम्रता और गंभीरता से जवाब दिया: "मैं अल्लाह की शरण माँगता हूँ कि मैं अज्ञानियों में से हो जाऊँ।" उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि मज़ाक उड़ाना और उपहास करना अज्ञानियों का काम है, और वे इससे बिल्कुल पाक हैं। वे अल्लाह के नबी हैं और उनका काम केवल अल्लाह का संदेश पहुँचाना है, न कि लोगों के साथ मज़ाक करना। उन्होंने अपनी बात को अल्लाह की पनाह में देकर यह भी बताया कि वे अल्लाह के आदेश को पूरी गंभीरता से पेश कर रहे हैं, और इसमें कोई मज़ाक या हँसी की गुंजाइश नहीं है।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह के आदेशों को बिना किसी हिचकिचाहट और सवाल-जवाब के स्वीकार करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे अधिक जानने वाला है और उसका हर आदेश हिकमत से भरा होता है।
  2. नबियों और अल्लाह के धर्म के प्रचारकों के साथ बदतमीज़ी और उन्हें मज़ाक समझना बहुत बड़ी गलती है; उनका हर काम और बात गंभीर और सच्ची होती है।
  3. मूसा (अलैहिस्सलाम) का जवाब हमें सिखाता है कि जब कोई व्यक्ति हम पर झूठा इल्ज़ाम लगाए, तो हमें सब्र और नम्रता से जवाब देना चाहिए और अल्लाह की शरण माँगनी चाहिए, न कि गुस्से में आकर जवाब देना चाहिए।
  4. उपहास और मज़ाक करना अज्ञानता की निशानी है, और एक मुसलमान को चाहिए कि वह इस बुरी आदत से बचे और हमेशा सच्चाई और गंभीरता को अपनाए।


📜 आयत 65-69 — सूरा अल-बकरा

65وَلَقَدْ عَلِمْتُمُ الَّذِينَ اعْتَدَوْا مِنكُمْ فِي السَّبْتِ فَقُلْنَا لَهُمْ كُونُوا قِرَدَةً خَاسِئِينَ
और अपनी क़ौम से उन लोगों की हालत तो तुम बखूबी जानते हो जो शम्बे (सनीचर) के दिन अपनी हद से गुज़र गए (कि बावजूद मुमानिअत शिकार खेलने निकले) तो हमने उन से कहा कि तुम राइन्दे गए बन्दर बन जाओ (और वह बन्दर हो गए)
66فَجَعَلْنَاهَا نَكَالًا لِّمَا بَيْنَ يَدَيْهَا وَمَا خَلْفَهَا وَمَوْعِظَةً لِّلْمُتَّقِينَ
पस हमने इस वाक़ये से उन लोगों के वास्ते जिन के सामने हुआ था और जो उसके बाद आनेवाले थे अज़ाब क़रार दिया, और परहेज़गारों के लिए नसीहत
67وَإِذْ قَالَ مُوسَىٰ لِقَوْمِهِ إِنَّ اللَّهَ يَأْمُرُكُمْ أَن تَذْبَحُوا بَقَرَةً ۖ قَالُوا أَتَتَّخِذُنَا هُزُوًا ۖ قَالَ أَعُوذُ بِاللَّهِ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْجَاهِلِينَ
और (वह वक्त याद करो) जब मूसा ने अपनी क़ौम से कहा कि खुदा तुम लोगों को ताकीदी हुक्म करता है कि तुम एक गाय ज़िबाह करो वह लोग कहने लगे क्या तुम हमसे दिल्लगी करते हो मूसा ने कहा मैं खुदा से पनाह माँगता हूँ कि मैं जाहिल बनूँ
68قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا هِيَ ۚ قَالَ إِنَّهُ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٌ لَّا فَارِضٌ وَلَا بِكْرٌ عَوَانٌ بَيْنَ ذَٰلِكَ ۖ فَافْعَلُوا مَا تُؤْمَرُونَ
(तब वह लोग कहने लगे कि (अच्छा) तुम अपने खुदा से दुआ करो कि हमें बता दे कि वह गाय कैसी हो मूसा ने कहा बेशक खुदा ने फरमाता है कि वह गाय न तो बहुत बूढ़ी हो और न बछिया बल्कि उनमें से औसत दरजे की हो, ग़रज़ जो तुमको हुक्म दिया गया उसको बजा लाओ
69قَالُوا ادْعُ لَنَا رَبَّكَ يُبَيِّن لَّنَا مَا لَوْنُهَا ۚ قَالَ إِنَّهُ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٌ صَفْرَاءُ فَاقِعٌ لَّوْنُهَا تَسُرُّ النَّاظِرِينَ
वह कहने लगे (वाह) तुम अपने खुदा से दुआ करो कि हमें ये बता दे कि उसका रंग आख़िर क्या हो मूसा ने कहा बेशक खुदा फरमाता है कि वह गाय खूब गहरे ज़र्द रंग की हो देखने वाले उसे देखकर खुश हो जाए
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अनुवाद — अल-बकरा 67

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Monday, September 7, 2026

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