ताहा · 33/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
كَيْ نُسَبِّحَكَ كَثِيرًا ۝٣٣
Kai nusabbihaka kaseeraa
📖 हिंदी अर्थ
ताकि हम दोनों (मिलकर) कसरत से तेरी तसबीह करें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • كَيْ نُسَبِّحَكَ – ताकि हम तेरी तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करें।
  • كَثِيرًا – बहुत अधिक मात्रा में, लगातार और प्रचुर रूप से।

विस्तृत तफ़सीर:

यह आयत हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की उस प्रार्थना का हिस्सा है जो उन्होंने अल्लाह तआला से की थी जब उन्हें फ़िरऔन के पास जाने का आदेश मिला। इस आयत में मूसा (अलैहिस्सलाम) अल्लाह से कहते हैं कि ऐ मेरे रब! मुझे वह ताक़त और सहारा दे कि मैं तेरी तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) बहुत अधिक कर सकूँ।

इसका अर्थ यह है कि मूसा (अलैहिस्सलाम) यह दुआ कर रहे हैं कि जब मुझे फ़िरऔन जैसे ज़ालिम के सामने जाना है, तो मुझे ऐसी हिम्मत, ऐसा सीना (दिल), ऐसी ज़बान और ऐसा साथी (हारून) अता कर कि मैं तेरी इबादत और तेरी तस्बीह को भरपूर अंदाज़ में अंजाम दे सकूँ। यानी वे यह चाहते हैं कि उनकी पूरी ज़िंदगी, उनका हर काम और उनकी हर साँस अल्लाह की याद और उसकी तस्बीह से भरी हो।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि जब भी हम किसी बड़े काम या मुश्किल ज़िम्मेदारी का सामना करें, तो हमें अल्लाह से तौफ़ीक़ माँगनी चाहिए कि वह हमें अपनी याद और इबादत की ताक़त दे। तस्बीह (अल्लाह की पवित्रता का वर्णन) सिर्फ़ ज़बान से कहना नहीं है, बल्कि दिल की गहराई से अल्लाह की बड़ाई और पाकी को मानना है। जब इंसान अल्लाह की तस्बीह करता है, तो उसका दिल सुकून पाता है, उसकी मुश्किलें आसान होती हैं और उसे हर काम में कामयाबी मिलती है।

अल्लाह तआला हम सबको भी यह तौफ़ीक़ दे कि हम उसे बहुत ज़्यादा याद करें, उसकी तस्बीह करें और उसके दिए हुए हर नेमत पर उसका शुक्र अदा करें। यही सच्ची कामयाबी है कि इंसान की ज़िंदगी अल्लाह की याद से जुड़ी हो और वह हर हाल में अपने रब को याद करता रहे।



📜 आयत 31-35 — सूरा ताहा

31اشْدُدْ بِهِ أَزْرِي
उसके ज़रिए से मेरी पुश्त मज़बूत कर दे
32وَأَشْرِكْهُ فِي أَمْرِي
और मेरे काम में उसको मेरा शरीक बना
33كَيْ نُسَبِّحَكَ كَثِيرًا
ताकि हम दोनों (मिलकर) कसरत से तेरी तसबीह करें
34وَنَذْكُرَكَ كَثِيرًا
और कसरत से तेरी याद करें
35إِنَّكَ كُنتَ بِنَا بَصِيرًا
तू तो हमारी हालत देख ही रहा है
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
33आयत

अनुवाद — ताहा 33

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Thursday, October 1, 2026

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