अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَأَشْرِكْهُ: उसे साझीदार बना दे
- فِي أَمْرِي: मेरे कार्य में (अर्थात नबुव्वत और रिसालत के कार्य में)
विस्तृत तफसीर:
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने रब से एक और प्यारी दुआ की — "ऐ मेरे पालनहार! मेरे भाई हारून को मेरे इस कार्य में मेरा साझीदार बना दे।" यह वह कार्य था जो अल्लाह ने उन्हें सौंपा था — फ़िरऔन के पास जाकर उसे तौहीद का पैग़ाम पहुँचाना और बनी इसराईल को उसके ज़ुल्म से आज़ाद कराना।
हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने यह दुआ इसलिए की क्योंकि हारून (अलैहिस्सलाम) उनके भाई थे, उनकी ज़बान फ़सीह थी, और वे इस कठिन ज़िम्मेदारी में उनका सहारा बन सकते थे। अल्लाह ने यह दुआ क़बूल फ़रमाई और हारून (अलैहिस्सलाम) को भी नबी बनाकर मूसा (अलैहिस्सलाम) का साथी बना दिया।
इस आयत से हमें कई अहम सबक़ मिलते हैं:
- भाईचारे और सहयोग की ताक़त: अच्छे कामों में दूसरों को शामिल करना और उनसे मदद लेना कोई बुरी बात नहीं, बल्कि यह अल्लाह को पसंद है। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने भाई को आगे बढ़ाने में कोई हिचकिचाहट नहीं की।
- इस्लामी भाईचारा: इस्लाम सिखाता है कि नेक कामों में एक-दूसरे का हाथ बटाना चाहिए। जब हम किसी अच्छे काम में दूसरों को शामिल करते हैं, तो अल्लाह उसमें बरकत देता है।
- अल्लाह से माँगने का तरीक़ा: हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह से बड़ी अदब और इख़लास के साथ माँगा। हमें भी चाहिए कि अपनी हर ज़रूरत के लिए अल्लाह से दुआ करें, क्योंकि वही सब कुछ कर सकता है।
- ज़िम्मेदारी का एहसास: हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) अकेले इस बड़ी ज़िम्मेदारी को उठाना चाहते थे, लेकिन उन्होंने अल्लाह से मदद माँगी। यह हमें सिखाता है कि बड़े कामों के लिए अल्लाह से ताक़त और मदद माँगनी चाहिए।
यह दुआ हमें सिखाती है कि जब हम किसी नेक काम की शुरुआत करें, तो अल्लाह से तौफ़ीक़ माँगें और अच्छे लोगों का साथ भी चाहें। अल्लाह अपने बंदों की दुआएँ सुनता है और उन्हें क़बूल करता है।
📜 आयत 30-34 — ताहा
अनुवाद — ताहा 32
सूरा ताहा आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मेरे काम में उसको मेरा शरीक बनासूरा आयत 32/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








