ताहा · 42/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
اذْهَبْ أَنتَ وَأَخُوكَ بِآيَاتِي وَلَا تَنِيَا فِي ذِكْرِي ۝٤٢
Izhab anta wa akhooka bi Aayaatee wa laa taniyaa fee zikree
📖 हिंदी अर्थ
तुम अपने भाई समैत हमारे मौजिज़े लेकर जाओ और (देखो) मेरी याद में सुस्ती न करना

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • तनीया (تَنِيَا): कमज़ोर मत पड़ना, ढीले मत पड़ना, आलस्य न करना।
  • ज़िक्र (ذِكْر): याद करना, स्मरण करना — यहाँ अर्थ है अल्लाह की तस्बीह, तहलील, उसकी हम्द और उसी से मदद माँगना।

तफ़सीर:

ऐ मूसा! तुम और तुम्हारे भाई हारून — दोनों मेरी निशानियों के साथ जाओ। ये वो नौ बड़ी निशानियाँ हैं जो मेरी क़ुदरत, मेरी वहदानियत (एकता) और तुम्हारी रिसालत (पैग़म्बरी) की सच्चाई को साबित करती हैं। ये निशानियाँ सिर्फ़ दिखाने के लिए नहीं, बल्कि लोगों को सीधे रास्ते पर लाने का ज़रिया हैं।

अल्लाह ने मूसा और हारून को एक साथ भेजा — ये इस बात की तालीम है कि दावत-ए-दीन (धर्म की पुकार) में भाईचारा, आपसी सहयोग और एकजुटता कितनी ज़रूरी है। अकेले नहीं, बल्कि मिलकर काम करने से दावत ज़्यादा असरदार होती है।

फिर अल्लाह ने फ़रमाया: "और मेरे ज़िक्र में ढीले मत पड़ना।" यानी मेरी याद में कभी कमज़ोरी न आने पाए, न तुम्हारे दिलों से मेरी मुहब्बत घटे, न तुम्हारी ज़ुबान से मेरा नाम रुके। जब तुम फ़िरऔन के सामने जाओ — जो अपनी सरकशी में हद से गुज़र चुका है — तो उसके सामने भी मेरा ज़िक्र जारी रखो। मेरी याद ही तुम्हारी ताक़त है, मेरी याद ही तुम्हारी ढाल है।

ये हुक्म सिर्फ़ मूसा और हारून के लिए नहीं, बल्कि हर दावत-दार (पुकारने वाले) और हर मोमिन के लिए एक सबक़ है — काम चाहे कितना भी बड़ा हो, मुश्किल चाहे कितनी भी हो, अल्लाह का ज़िक्र कभी न छूटे। जो ज़िक्र में डटा रहता है, अल्लाह उसे कामयाबी देता है।

और याद रखो — जब अल्लाह तुम्हें किसी काम पर भेजता है, तो वो तुम्हें अकेला नहीं छोड़ता। वो तुम्हारे साथ होता है, तुम्हें ताक़त देता है, और तुम्हारे कदमों को मज़बूत करता है। बस ज़रूरत है तो सिर्फ़ उसकी याद में जुड़े रहने की, और उसके भरोसे पर चलने की।



📜 आयत 40-44 — ताहा

40إِذْ تَمْشِي أُخْتُكَ فَتَقُولُ هَلْ أَدُلُّكُمْ عَلَىٰ مَن يَكْفُلُهُ ۖ فَرَجَعْنَاكَ إِلَىٰ أُمِّكَ كَيْ تَقَرَّ عَيْنُهَا وَلَا تَحْزَنَ ۚ وَقَتَلْتَ نَفْسًا فَنَجَّيْنَاكَ مِنَ الْغَمِّ وَفَتَنَّاكَ فُتُونًا ۚ فَلَبِثْتَ سِنِينَ فِي أَهْلِ مَدْيَنَ ثُمَّ جِئْتَ عَلَىٰ قَدَرٍ يَا مُوسَىٰ
(उस वक्त) ज़ब तुम्हारी बहन चली (और फिर उनके घर में आकर) कहने लगी कि कहो तो मैं तुम्हें ऐसी दाया बताऊँ कि जो इसे अच्छी तरह पाले तो (इस तदबीर से) हमने फिर तुमको तुम्हारी माँ के पास पहुँचा दिया ताकि उसकी ऑंखें ठन्डी रहें और तुम्हारी (जुदाई पर) कुढ़े नहीं और तुमने एक शख्स (क़िबती) को मार डाला था और सख्त परेशान थे तो हमने तुमको (इस) ग़म से नजात दी और हमने तुम्हारा अच्छी तरह इम्तिहान कर लिया फिर तुम कई बरस तक मदयन के लोगों में जाकर रहे ऐ मूसा फिर तुम (उम्र के) एक अन्दाजे पर आ गए नबूवत के क़ायल हुए
41وَاصْطَنَعْتُكَ لِنَفْسِي
और मैंने तुमको अपनी रिसालत के वास्ते मुन्तख़िब किया
42اذْهَبْ أَنتَ وَأَخُوكَ بِآيَاتِي وَلَا تَنِيَا فِي ذِكْرِي
तुम अपने भाई समैत हमारे मौजिज़े लेकर जाओ और (देखो) मेरी याद में सुस्ती न करना
43اذْهَبَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُ طَغَىٰ
तुम दोनों फिरऔन के पास जाओ बेशक वह बहुत सरकश हो गया है
44فَقُولَا لَهُ قَوْلًا لَّيِّنًا لَّعَلَّهُ يَتَذَكَّرُ أَوْ يَخْشَىٰ
फिर उससे (जाकर) नरमी से बातें करो ताकि वह नसीहत मान ले या डर जाए
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42आयत

अनुवाद — ताहा 42

सूरा ताहा आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम अपने भाई समैत हमारे मौजिज़े लेकर जाओ और (देखो)…

सूरा आयत 42/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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