ताहा · 41/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
وَاصْطَنَعْتُكَ لِنَفْسِي ۝٤١
Wastana` tuka linafsee
📖 हिंदी अर्थ
और मैंने तुमको अपनी रिसालत के वास्ते मुन्तख़िब किया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَاصْطَنَعْتُكَ: मैंने तुम्हें अपने लिए चुना, विशेष रूप से तैयार किया और अपनी रिसालत (पैग़म्बरी) के लिए पसंद किया।
  • لِنَفْسِي: अपने लिए, यानी अपनी ख़ास इबादत, अपने पैग़ाम के प्रचार और अपने आदेशों के पालन के लिए।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ मूसा (अलैहिस्सलाम)! मैंने तुम्हें अपनी विशेष रहमत से नवाज़ा और तुम्हें अपनी रिसालत के लिए चुना। यह कोई साधारण चयन नहीं था, बल्कि मैंने तुम्हें अपने लिए ख़ास बनाया—तुम्हारी परवरिश, तुम्हारी हिफ़ाज़त और तुम्हारी तैयारी सब कुछ मेरी निगरानी में हुई। मैंने तुम्हें अपना पैग़म्बर बनाया, ताकि तुम मेरा पैग़ाम लोगों तक पहुँचाओ, उन्हें मेरे आदेशों की तालीम दो और उन्हें मेरी इबादत की तरफ़ बुलाओ। यह एक ऐसा शरफ़ (सम्मान) है जो किसी आम इंसान को नहीं मिलता—यह ख़ुद अल्लाह की तरफ़ से एक ख़ास इनायत है।

यहाँ अल्लाह तआला मूसा (अलैहिस्सलाम) को यह बताना चाहते हैं कि तुम्हारा चुनाव मेरी मर्ज़ी से हुआ है, और मैंने तुम्हें अपनी रिसालत के लिए तैयार किया है। यह चुनाव तुम्हारी अपनी ख़्वाहिश से नहीं, बल्कि मेरे इल्म और हिकमत (बुद्धिमत्ता) से हुआ है। मैंने तुम्हें अपने कलाम (बात) का हामिल (वाहक) बनाया, ताकि तुम मेरे बंदों को मेरी तरफ़ बुलाओ और उन्हें ज़ुल्म और गुमराही से निकालकर हक़ और हिदायत की राह दिखाओ।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह तआला जिसे चाहता है, अपनी ख़ास रहमत से नवाज़ता है और उसे अपने दीन की खिदमत के लिए चुन लेता है। यह चुनाव अल्लाह की तरफ़ से एक बहुत बड़ी नेमत है, जो उसे मिलती है जो अल्लाह की राह में सब्र और इख़्लास (निष्ठा) के साथ जुड़ जाता है। हमें भी चाहिए कि अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें अपने दीन की खिदमत करने की तौफ़ीक़ दे, और हमें उन लोगों में शामिल करे जिन्हें उसने अपने लिए चुना है। यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रज़ा (खुशी) ही सबसे बड़ी कामयाबी है, और जो अल्लाह के क़रीब हो जाता है, अल्लाह उसे अपनी ख़ास निगरानी और हिफ़ाज़त में ले लेता है।



📜 आयत 39-43 — ताहा

39أَنِ اقْذِفِيهِ فِي التَّابُوتِ فَاقْذِفِيهِ فِي الْيَمِّ فَلْيُلْقِهِ الْيَمُّ بِالسَّاحِلِ يَأْخُذْهُ عَدُوٌّ لِّي وَعَدُوٌّ لَّهُ ۚ وَأَلْقَيْتُ عَلَيْكَ مَحَبَّةً مِّنِّي وَلِتُصْنَعَ عَلَىٰ عَيْنِي
कि तुम इसे (मूसा को) सन्दूक़ में रखकर सन्दूक़ को दरिया में डाल दो फिर दरिया उसे ढकेल कर किनारे डाल देगा कि मूसा को मेरा दुशमन और मूसा का दुशमन (फिरऔन) उठा लेगा और मैंने तुम पर अपनी मोहब्बत को डाल दिया जो देखता (प्यार करता) ताकि तुम मेरी ख़ास निगरानी में पाले पोसे जाओ
40إِذْ تَمْشِي أُخْتُكَ فَتَقُولُ هَلْ أَدُلُّكُمْ عَلَىٰ مَن يَكْفُلُهُ ۖ فَرَجَعْنَاكَ إِلَىٰ أُمِّكَ كَيْ تَقَرَّ عَيْنُهَا وَلَا تَحْزَنَ ۚ وَقَتَلْتَ نَفْسًا فَنَجَّيْنَاكَ مِنَ الْغَمِّ وَفَتَنَّاكَ فُتُونًا ۚ فَلَبِثْتَ سِنِينَ فِي أَهْلِ مَدْيَنَ ثُمَّ جِئْتَ عَلَىٰ قَدَرٍ يَا مُوسَىٰ
(उस वक्त) ज़ब तुम्हारी बहन चली (और फिर उनके घर में आकर) कहने लगी कि कहो तो मैं तुम्हें ऐसी दाया बताऊँ कि जो इसे अच्छी तरह पाले तो (इस तदबीर से) हमने फिर तुमको तुम्हारी माँ के पास पहुँचा दिया ताकि उसकी ऑंखें ठन्डी रहें और तुम्हारी (जुदाई पर) कुढ़े नहीं और तुमने एक शख्स (क़िबती) को मार डाला था और सख्त परेशान थे तो हमने तुमको (इस) ग़म से नजात दी और हमने तुम्हारा अच्छी तरह इम्तिहान कर लिया फिर तुम कई बरस तक मदयन के लोगों में जाकर रहे ऐ मूसा फिर तुम (उम्र के) एक अन्दाजे पर आ गए नबूवत के क़ायल हुए
41وَاصْطَنَعْتُكَ لِنَفْسِي
और मैंने तुमको अपनी रिसालत के वास्ते मुन्तख़िब किया
42اذْهَبْ أَنتَ وَأَخُوكَ بِآيَاتِي وَلَا تَنِيَا فِي ذِكْرِي
तुम अपने भाई समैत हमारे मौजिज़े लेकर जाओ और (देखो) मेरी याद में सुस्ती न करना
43اذْهَبَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ إِنَّهُ طَغَىٰ
तुम दोनों फिरऔन के पास जाओ बेशक वह बहुत सरकश हो गया है
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अनुवाद — ताहा 41

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सूरा आयत 41/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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