अल-अंबिया · 68/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
قَالُوا حَرِّقُوهُ وَانصُرُوا آلِهَتَكُمْ إِن كُنتُمْ فَاعِلِينَ ۝٦٨
Qaaloo harriqooho wansurooo aalihatakum in kuntum faa`ileen
📖 हिंदी अर्थ
(आख़िर) वह लोग (बाहम) कहने लगे कि अगर तुम कुछ कर सकते हो तो इबराहीम को आग में जला दो और अपने खुदाओं की मदद करो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَرِّقُوهُ: उसे आग में जला दो।
  • وَانصُرُوا آلِهَتَكُمْ: अपने देवताओं की सहायता करो।
  • إِن كُنتُمْ فَاعِلِينَ: अगर तुम कुछ कर सकते हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के सामने बुतों की बेबसी और बेकारी को साबित कर दिया और उनके सारे तर्क ध्वस्त हो गए, तो उनकी क़ौम के पास कोई जवाब नहीं बचा। वे तर्क और दलील से हार चुके थे, इसलिए उन्होंने ज़ोर और ज़ुल्म का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा: "इसे आग में जला दो! इस तरह अपने देवताओं की मदद करो, अगर तुम कुछ कर सकते हो।" यानी उन्होंने यह सोचा कि आग सबसे कठोर और दर्दनाक सज़ा है, और इससे वे इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को ख़त्म कर देंगे और अपने बुतों की इज़्ज़त बचा लेंगे।

उन्होंने एक विशाल आग जलाई और हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) को उसमें डाल दिया। लेकिन अल्लाह तआला ने अपने नबी की मदद की और आग को हुक्म दिया: "ऐ आग! तू इब्राहीम के लिए ठंडी और सलामती वाली बन जा।" चुनांचे आग ने उन्हें कोई नुक़सान नहीं पहुँचाया, और अल्लाह ने अपने नबी को इस मुश्किल से बचा लिया। यह अल्लाह की क़ुदरत का एक ज़बरदस्त नमूना था, जिसने दुश्मनों की साज़िश को नाकाम कर दिया।

दावती पहलू:

यह वाक़िया हमें सिखाता है कि सच्चाई और ईमान की राह पर चलने वालों को चाहे कितनी भी मुश्किलों और आज़माइशों का सामना करना पड़े, अल्लाह तआला उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। जिस तरह आग, जो सबसे बड़ी ताक़त थी, इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के लिए ठंडी और सलामती वाली बन गई, उसी तरह अल्लाह अपने नेक बंदों की हर मुश्किल में मदद करता है। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम सिर्फ़ अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी राह में किसी भी क़ुर्बानी से पीछे न हटें। अल्लाह का वादा है कि वह सब्र करने वालों और ईमान वालों के साथ है।



📜 आयत 66-70 — अल-अंबिया

66قَالَ أَفَتَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنفَعُكُمْ شَيْئًا وَلَا يَضُرُّكُمْ
(फिर इनसे क्या पूछे) इबराहीम ने कहा तो क्या तुम लोग खुदा को छोड़कर ऐसी चीज़ों की परसतिश करते हो जो न तुम्हें कुछ नफा ही पहुँचा सकती है और न तुम्हारा कुछ नुक़सान ही कर सकती है
67أُفٍّ لَّكُمْ وَلِمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
तफ है तुम पर उस चीज़ पर जिसे तुम खुदा के सिवा पूजते हो तो क्या तुम इतना भी नहीं समझते
68قَالُوا حَرِّقُوهُ وَانصُرُوا آلِهَتَكُمْ إِن كُنتُمْ فَاعِلِينَ
(आख़िर) वह लोग (बाहम) कहने लगे कि अगर तुम कुछ कर सकते हो तो इबराहीम को आग में जला दो और अपने खुदाओं की मदद करो
69قُلْنَا يَا نَارُ كُونِي بَرْدًا وَسَلَامًا عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ
(ग़रज़) उन लोगों ने इबराहीम को आग में डाल दिया तो हमने फ़रमाया ऐ आग तू इबराहीम पर बिल्कुल ठन्डी और सलामती का बाइस हो जा
70وَأَرَادُوا بِهِ كَيْدًا فَجَعَلْنَاهُمُ الْأَخْسَرِينَ
(कि उनको कोई तकलीफ़ न पहुँचे) और उन लोगों में इबराहीम के साथ चालबाज़ी करनी चाही थी तो हमने इन सब को नाकाम कर दिया
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अनुवाद — अल-अंबिया 68

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Tuesday, August 18, 2026

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