अल-अंबिया · 67/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
أُفٍّ لَّكُمْ وَلِمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ أَفَلَا تَعْقِلُونَ ۝٦٧
Uffil lakum wa limaa ta`budoona min doonil laah; afalaa ta`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
तफ है तुम पर उस चीज़ पर जिसे तुम खुदा के सिवा पूजते हो तो क्या तुम इतना भी नहीं समझते

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُفٍّ لَّكُمْ: तुम पर धिक्कार है, तुम्हारे लिए घृणा और ग्लानि है।
  • وَلِمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ: और उन चीज़ों पर भी धिक्कार है जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते हो।
  • أَفَلَا تَعْقِلُونَ: तो क्या तुम समझते नहीं हो? क्या तुम्हारे पास अक्ल नहीं है?

तफसीर (व्याख्या):

हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम को ख़ुदा के सिवा उन बुतों की पूजा करते देखा जो न कुछ सुनते हैं, न देखते हैं, न फ़ायदा पहुँचा सकते हैं और न नुक़्सान। उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "तुम पर धिक्कार है और उन चीज़ों पर भी धिक्कार है जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पूजते हो।"

यह एक सख़्त और स्पष्ट फटकार थी, जिसमें इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के इस कृत्य को बेहद घिनौना और बेवक़ूफ़ी भरा करार दिया। उन्होंने फ़रमाया: "क्या तुम अक्ल से काम नहीं लेते?" यानी जिस इंसान के पास ज़रा सी भी समझ हो, वह यह बात समझ सकता है कि जो चीज़ ख़ुद को नहीं बना सकती, जो सुनने, देखने और बोलने से असमर्थ है, वह किसी की इबादत की हक़दार कैसे हो सकती है?

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने इंसान को अक्ल और समझ की नेमत से नवाज़ा है। यह अक्ल ही है जो इंसान को सही रास्ता दिखाती है और उसे अंधी नक़ल और बुतपरस्ती से बचाती है। जो लोग अपनी अक्ल का इस्तेमाल नहीं करते, वही लोग गुमराही में पड़ जाते हैं और ऐसी चीज़ों की पूजा करने लगते हैं जो न तो उन्हें फ़ायदा पहुँचा सकती हैं और न नुक़्सान।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें हमेशा अपनी अक्ल और समझ का इस्तेमाल करना चाहिए। अल्लाह तआला ने हमें यह नेमत इसलिए दी है ताकि हम उसकी पैदाइश पर ग़ौर करें, उसकी निशानियों पर विचार करें और उसे पहचानें। जो इंसान अपनी अक्ल से काम लेता है, वह कभी बुतपरस्ती या शिर्क जैसी बेवक़ूफ़ी में नहीं पड़ सकता।

आज भी हमारे आस-पास बहुत से लोग ऐसी चीज़ों की पूजा करते हैं जो न तो उन्हें फ़ायदा पहुँचा सकती हैं और न नुक़्सान। वे पत्थरों, मूर्तियों, क़ब्रों और इंसानों की पूजा करते हैं। यह सब अक्ल का इस्तेमाल न करने की वजह से है। अगर वे अपनी अक्ल से काम लें, तो समझ सकते हैं कि यह सब बिल्कुल बेकार है। सिर्फ़ अल्लाह ही इबादत के लायक़ है, जिसने यह सब कुछ पैदा किया है।

यह आयत हमें तौहीद (एकेश्वरवाद) की तरफ़ बुलाती है और शिर्क से बचने की ताकीद करती है। हमें चाहिए कि हम अपनी अक्ल का इस्तेमाल करें, अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करें और सिर्फ़ उसी की इबादत करें। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 65-69 — अल-अंबिया

65ثُمَّ نُكِسُوا عَلَىٰ رُءُوسِهِمْ لَقَدْ عَلِمْتَ مَا هَٰؤُلَاءِ يَنطِقُونَ
फिर उन लोगों के सर इसी गुमराही में झुका दिए गए (और तो कुछ बन न पड़ा मगर ये बोले) तुमको तो अच्छी तरह मालूम है कि ये बुत बोला नहीं करते
66قَالَ أَفَتَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنفَعُكُمْ شَيْئًا وَلَا يَضُرُّكُمْ
(फिर इनसे क्या पूछे) इबराहीम ने कहा तो क्या तुम लोग खुदा को छोड़कर ऐसी चीज़ों की परसतिश करते हो जो न तुम्हें कुछ नफा ही पहुँचा सकती है और न तुम्हारा कुछ नुक़सान ही कर सकती है
67أُفٍّ لَّكُمْ وَلِمَا تَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ ۖ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
तफ है तुम पर उस चीज़ पर जिसे तुम खुदा के सिवा पूजते हो तो क्या तुम इतना भी नहीं समझते
68قَالُوا حَرِّقُوهُ وَانصُرُوا آلِهَتَكُمْ إِن كُنتُمْ فَاعِلِينَ
(आख़िर) वह लोग (बाहम) कहने लगे कि अगर तुम कुछ कर सकते हो तो इबराहीम को आग में जला दो और अपने खुदाओं की मदद करो
69قُلْنَا يَا نَارُ كُونِي بَرْدًا وَسَلَامًا عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ
(ग़रज़) उन लोगों ने इबराहीम को आग में डाल दिया तो हमने फ़रमाया ऐ आग तू इबराहीम पर बिल्कुल ठन्डी और सलामती का बाइस हो जा
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीRevelation
67आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 67

सूरा अल-अंबिया आयत 67 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तफ है तुम पर उस चीज़ पर जिसे तुम खुदा…

सूरा आयत 67/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 65–69. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए