अल-अंबिया · 78/112
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अंबिया
وَدَاوُودَ وَسُلَيْمَانَ إِذْ يَحْكُمَانِ فِي الْحَرْثِ إِذْ نَفَشَتْ فِيهِ غَنَمُ الْقَوْمِ وَكُنَّا لِحُكْمِهِمْ شَاهِدِينَ ۝٧٨
Wa Daawooda wa Sulaimaana iz yahkumaani fil harsi iz nafashat feehi ghanamul qawmi wa kunnaa lihukmihim shaahideen
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल इनको) दाऊद और सुलेमान का (वाक्या याद दिलाओ) जब ये दोनों एक खेती के बारे में जिसमें रात के वक्त क़ुछ लोगों की बकरियाँ (घुसकर) चर गई थी फैसला करने बैठे और हम उन लोगों के क़िस्से को देख रहे थे (कि बाहम इख़तेलाफ़ हुआ)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • अल-हर्स (الْحَرْثِ): खेती या बगीचा, जिसमें फसलें लगी हों।
  • नफ़शत (نَفَشَتْ): भेड़ों का रात के समय बिना चरवाहे के खेत में फैल जाना और उसे नुकसान पहुँचाना।
  • शाहिदीन (شَاهِدِينَ): देखने वाले, जानने वाले, जिनसे कोई बात छिपी न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप दाऊद (अलैहिस्सलाम) और उनके बेटे सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के उस फ़ैसले को याद करें, जब वे एक खेत के मामले में न्याय कर रहे थे। दरअसल हुआ यूँ कि कुछ लोगों की भेड़ें रात के समय बिना चरवाहे के एक खेत में घुस गईं और उसे चर गईं, जिससे खेत की फसल बर्बाद हो गई। यह मामला दाऊद (अलैहिस्सलाम) के पास पेश किया गया। उन्होंने फ़ैसला सुनाया कि खेत का मालिक उन भेड़ों को अपने कब्ज़े में ले ले, क्योंकि भेड़ों की कीमत खेत के नुकसान के बराबर थी। यह एक न्यायसंगत फ़ैसला था। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम उन दोनों के फ़ैसले के गवाह थे, यानी हमारे इल्म से उनका कोई फ़ैसला छिपा नहीं था, और हम उन्हें सही रास्ता दिखाने वाले थे।

इस घटना में हमारे लिए बड़ी सीख है कि न्याय और इंसाफ़ कितना अहम है। अल्लाह तआला अपने नबियों के ज़रिए हमें सिखाता है कि हर मामले में सच्चाई और इंसाफ़ पर क़ायम रहना चाहिए। साथ ही, यह भी पता चलता है कि अल्लाह तआला अपने बंदों के हर अच्छे काम को देखता है और उसकी क़द्र करता है। जो लोग इंसाफ़ करते हैं, अल्लाह उन्हें हिकमत (समझदारी) और सही फ़ैसले की तौफ़ीक़ देता है। हमें भी चाहिए कि अपनी ज़िंदगी में इंसाफ़ को अपनाएँ, चाहे मामला कितना भी पेचीदा हो, क्योंकि अल्लाह इंसाफ़ करने वालों से मुहब्बत करता है। यह क़िस्सा हमें यह भी बताता है कि इल्म और हिकमत अल्लाह की तरफ़ से नेमत है, और जो अल्लाह से डरता है और सच्चाई पर चलता है, अल्लाह उसे और समझ और बेहतरीन फ़ैसले की क़ुदरत अता फ़रमाता है।



📜 आयत 76-80 — सूरा अल-अंबिया

76وَنُوحًا إِذْ نَادَىٰ مِن قَبْلُ فَاسْتَجَبْنَا لَهُ فَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और (ऐ रसूल लूत से भी) पहले (हमने) नूह को नबूवत पर फ़ायज़ किया जब उन्होंने (हमको) आवाज़ दी तो हमने उनकी (दुआ) सुन ली फिर उनको और उनके साथियों को (तूफ़ान की) बड़ी सख्त मुसीबत से नजात दी
77وَنَصَرْنَاهُ مِنَ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمَ سَوْءٍ فَأَغْرَقْنَاهُمْ أَجْمَعِينَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था उनके मुक़ाबले में उनकी मदद की बेशक ये लोग (भी) बहुत बुरे लोग थे तो हमने उन सबको डुबो मारा
78وَدَاوُودَ وَسُلَيْمَانَ إِذْ يَحْكُمَانِ فِي الْحَرْثِ إِذْ نَفَشَتْ فِيهِ غَنَمُ الْقَوْمِ وَكُنَّا لِحُكْمِهِمْ شَاهِدِينَ
और (ऐ रसूल इनको) दाऊद और सुलेमान का (वाक्या याद दिलाओ) जब ये दोनों एक खेती के बारे में जिसमें रात के वक्त क़ुछ लोगों की बकरियाँ (घुसकर) चर गई थी फैसला करने बैठे और हम उन लोगों के क़िस्से को देख रहे थे (कि बाहम इख़तेलाफ़ हुआ)
79فَفَهَّمْنَاهَا سُلَيْمَانَ ۚ وَكُلًّا آتَيْنَا حُكْمًا وَعِلْمًا ۚ وَسَخَّرْنَا مَعَ دَاوُودَ الْجِبَالَ يُسَبِّحْنَ وَالطَّيْرَ ۚ وَكُنَّا فَاعِلِينَ
तो हमने सुलेमान को (इसका सही फ़ैसला समझा दिया) और (यूँ तो) सबको हम ही ने फहमे सलीम और इल्म अता किया और हम ही ने पहाड़ों को दाऊद का ताबेए बना दिया था कि उनके साथ (खुदा की) तस्बीह किया करते थे और परिन्दों को (भी ताबेए कर दिया था) और हम ही (ये अज़ाब) किया करते थे
80وَعَلَّمْنَاهُ صَنْعَةَ لَبُوسٍ لَّكُمْ لِتُحْصِنَكُم مِّن بَأْسِكُمْ ۖ فَهَلْ أَنتُمْ شَاكِرُونَ
और हम ही ने उनको तुम्हारी जंगी पोशिश (ज़िराह) का बनाना सिखा दिया ताकि तुम्हें (एक दूसरे के) वार से बचाए तो क्या तुम (अब भी) उसके शुक्रगुज़ार बनोगे
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीअवतरण स्थान
78आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 78

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Saturday, October 3, 2026

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