अल-अंबिया · 77/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
وَنَصَرْنَاهُ مِنَ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمَ سَوْءٍ فَأَغْرَقْنَاهُمْ أَجْمَعِينَ ۝٧٧
Wa nasarnaahu minal qawmil lazeena kazzaboo bi Aayaatinaa; innahum kkaanoo qawma saw`in fa-aghraq naahum ajma`een
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था उनके मुक़ाबले में उनकी मदद की बेशक ये लोग (भी) बहुत बुरे लोग थे तो हमने उन सबको डुबो मारा

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَنَصَرْنَاهُ: हमने उनकी सहायता की और उन्हें बचाया।
  • مِنَ الْقَوْمِ: उन लोगों (के अत्याचार) से।
  • كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا: जिन्होंने हमारी निशानियों (आयतों) को झुठलाया।
  • قَوْمَ سَوْءٍ: बुरे लोग, भ्रष्ट और दुष्ट कौम।
  • فَأَغْرَقْنَاهُمْ أَجْمَعِينَ: तो हमने उन सबको (पानी में) डुबोकर हलाक कर दिया।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करते हुए बताते हैं कि हमने उन्हें उन लोगों के अत्याचार और नुक़्सान से बचाया और उनकी मदद की, जो हमारी आयतों और निशानियों को झुठला रहे थे। ये वो लोग थे जिन्होंने नूह (अलैहिस्सलाम) की दावत को नकारा, उनके साथ मज़ाक़ किया और उन्हें नुक़्सान पहुँचाने की कोशिशें कीं। अल्लाह ने उन्हें बताया कि ये लोग बुराई और फ़साद में डूबे हुए थे, उनके दिल सख़्त थे और वे हक़ (सत्य) को क़बूल करने के लिए तैयार नहीं थे। इसलिए अल्लाह ने उन्हें तूफ़ान (सैलाब) में डुबोकर सबको हलाक कर दिया — कोई भी उनमें से बच नहीं पाया।

इस आयत में दो बातें बहुत अहम हैं: पहली ये कि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है और उन्हें ज़ालिमों के नुक़्सान से बचाता है। दूसरी ये कि जब कोई कौम हक़ को झुठलाने और बुराई में डूबने पर अड़ जाती है, तो अल्लाह की पकड़ बहुत सख़्त होती है और वो उन्हें हलाक कर देता है।

ये क़िस्सा हमारे लिए सबक़ है कि हमें हक़ को क़बूल करने में देर नहीं करनी चाहिए, और अल्लाह के नबियों और उनके पैग़ाम को नकारने से बचना चाहिए। अल्लाह की रहमत उन पर होती है जो उसकी तरफ़ रुजू करते हैं, और उसका अज़ाब उन पर होता है जो हक़ से मुँह मोड़ते हैं। आज भी अगर हम क़ुरआन की तालीमात पर अमल करें और अल्लाह के दीन को अपनाएँ, तो हम भी उसी हिफ़ाज़त और रहमत के हक़दार बन सकते हैं, जो नूह (अलैहिस्सलाम) और उनके साथियों को मिली थी। ये आयत हमें ये भी सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी मदद के आसरा रहें, क्योंकि वही सबसे बड़ा मददगार और रक्षक है।



📜 आयत 75-79 — अल-अंबिया

75وَأَدْخَلْنَاهُ فِي رَحْمَتِنَا ۖ إِنَّهُ مِنَ الصَّالِحِينَ
और हमने लूत को अपनी रहमत में दाख़िल कर लिया इसमें शक नहीं कि वह नेकोंकार बन्दों में से थे
76وَنُوحًا إِذْ نَادَىٰ مِن قَبْلُ فَاسْتَجَبْنَا لَهُ فَنَجَّيْنَاهُ وَأَهْلَهُ مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और (ऐ रसूल लूत से भी) पहले (हमने) नूह को नबूवत पर फ़ायज़ किया जब उन्होंने (हमको) आवाज़ दी तो हमने उनकी (दुआ) सुन ली फिर उनको और उनके साथियों को (तूफ़ान की) बड़ी सख्त मुसीबत से नजात दी
77وَنَصَرْنَاهُ مِنَ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمَ سَوْءٍ فَأَغْرَقْنَاهُمْ أَجْمَعِينَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था उनके मुक़ाबले में उनकी मदद की बेशक ये लोग (भी) बहुत बुरे लोग थे तो हमने उन सबको डुबो मारा
78وَدَاوُودَ وَسُلَيْمَانَ إِذْ يَحْكُمَانِ فِي الْحَرْثِ إِذْ نَفَشَتْ فِيهِ غَنَمُ الْقَوْمِ وَكُنَّا لِحُكْمِهِمْ شَاهِدِينَ
और (ऐ रसूल इनको) दाऊद और सुलेमान का (वाक्या याद दिलाओ) जब ये दोनों एक खेती के बारे में जिसमें रात के वक्त क़ुछ लोगों की बकरियाँ (घुसकर) चर गई थी फैसला करने बैठे और हम उन लोगों के क़िस्से को देख रहे थे (कि बाहम इख़तेलाफ़ हुआ)
79فَفَهَّمْنَاهَا سُلَيْمَانَ ۚ وَكُلًّا آتَيْنَا حُكْمًا وَعِلْمًا ۚ وَسَخَّرْنَا مَعَ دَاوُودَ الْجِبَالَ يُسَبِّحْنَ وَالطَّيْرَ ۚ وَكُنَّا فَاعِلِينَ
तो हमने सुलेमान को (इसका सही फ़ैसला समझा दिया) और (यूँ तो) सबको हम ही ने फहमे सलीम और इल्म अता किया और हम ही ने पहाड़ों को दाऊद का ताबेए बना दिया था कि उनके साथ (खुदा की) तस्बीह किया करते थे और परिन्दों को (भी ताबेए कर दिया था) और हम ही (ये अज़ाब) किया करते थे
अल-अंबियाकुरान सूची
112आयत
मक्कीRevelation
77आयत

अनुवाद — अल-अंबिया 77

सूरा अल-अंबिया आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था उनके…

सूरा आयत 77/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए