अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَنَصَرْنَاهُ: हमने उनकी सहायता की और उन्हें बचाया।
- مِنَ الْقَوْمِ: उन लोगों (के अत्याचार) से।
- كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا: जिन्होंने हमारी निशानियों (आयतों) को झुठलाया।
- قَوْمَ سَوْءٍ: बुरे लोग, भ्रष्ट और दुष्ट कौम।
- فَأَغْرَقْنَاهُمْ أَجْمَعِينَ: तो हमने उन सबको (पानी में) डुबोकर हलाक कर दिया।
तफसीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करते हुए बताते हैं कि हमने उन्हें उन लोगों के अत्याचार और नुक़्सान से बचाया और उनकी मदद की, जो हमारी आयतों और निशानियों को झुठला रहे थे। ये वो लोग थे जिन्होंने नूह (अलैहिस्सलाम) की दावत को नकारा, उनके साथ मज़ाक़ किया और उन्हें नुक़्सान पहुँचाने की कोशिशें कीं। अल्लाह ने उन्हें बताया कि ये लोग बुराई और फ़साद में डूबे हुए थे, उनके दिल सख़्त थे और वे हक़ (सत्य) को क़बूल करने के लिए तैयार नहीं थे। इसलिए अल्लाह ने उन्हें तूफ़ान (सैलाब) में डुबोकर सबको हलाक कर दिया — कोई भी उनमें से बच नहीं पाया।
इस आयत में दो बातें बहुत अहम हैं: पहली ये कि अल्लाह अपने नेक बंदों की हिफ़ाज़त करता है और उन्हें ज़ालिमों के नुक़्सान से बचाता है। दूसरी ये कि जब कोई कौम हक़ को झुठलाने और बुराई में डूबने पर अड़ जाती है, तो अल्लाह की पकड़ बहुत सख़्त होती है और वो उन्हें हलाक कर देता है।
ये क़िस्सा हमारे लिए सबक़ है कि हमें हक़ को क़बूल करने में देर नहीं करनी चाहिए, और अल्लाह के नबियों और उनके पैग़ाम को नकारने से बचना चाहिए। अल्लाह की रहमत उन पर होती है जो उसकी तरफ़ रुजू करते हैं, और उसका अज़ाब उन पर होता है जो हक़ से मुँह मोड़ते हैं। आज भी अगर हम क़ुरआन की तालीमात पर अमल करें और अल्लाह के दीन को अपनाएँ, तो हम भी उसी हिफ़ाज़त और रहमत के हक़दार बन सकते हैं, जो नूह (अलैहिस्सलाम) और उनके साथियों को मिली थी। ये आयत हमें ये भी सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी मदद के आसरा रहें, क्योंकि वही सबसे बड़ा मददगार और रक्षक है।
📜 आयत 75-79 — अल-अंबिया
अनुवाद — अल-अंबिया 77
सूरा अल-अंबिया आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था उनके…सूरा आयत 77/112 — अल-अंबिया الأنبياء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अंबिया सुनें, अल-अंबिया अनुवाद, अल-अंबिया mp3, अल-अंबिया pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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