अल-अंबिया · 79/112
अनुवाद उच्चारण — अल-अंबिया
فَفَهَّمْنَاهَا سُلَيْمَانَ ۚ وَكُلًّا آتَيْنَا حُكْمًا وَعِلْمًا ۚ وَسَخَّرْنَا مَعَ دَاوُودَ الْجِبَالَ يُسَبِّحْنَ وَالطَّيْرَ ۚ وَكُنَّا فَاعِلِينَ ۝٧٩
Fafahhamnaahaa sulaimaan; wa kullan aatainaa hukmanw wa`ilmanw wa sakh kharnaa ma`a Daawoodal jibaala yusabbihna wattayr; wa kunnaa faa`ileen
📖 हिंदी अर्थ
तो हमने सुलेमान को (इसका सही फ़ैसला समझा दिया) और (यूँ तो) सबको हम ही ने फहमे सलीम और इल्म अता किया और हम ही ने पहाड़ों को दाऊद का ताबेए बना दिया था कि उनके साथ (खुदा की) तस्बीह किया करते थे और परिन्दों को (भी ताबेए कर दिया था) और हम ही (ये अज़ाब) किया करते थे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَفَهَّمْنَاهَا: हमने उसे समझा दिया (अर्थात् उस न्यायिक मामले का सही निर्णय सुलैमान को समझा दिया)।
  • حُكْمًا: नबुव्वत, न्याय-निर्णय की शक्ति और समझ।
  • عِلْمًا: धार्मिक ज्ञान और मामलों की गहरी समझ।
  • سَخَّرْنَا: हमने वश में कर दिया, अधीन कर दिया।
  • يُسَبِّحْنَ: (पहाड़) तस्बीह पढ़ते थे, अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करते थे।

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत हमें नबी दाऊद (अलैहिस्सलाम) और उनके बेटे नबी सुलैमान (अलैहिस्सलाम) के एक अद्भुत न्यायिक प्रसंग से अवगत कराती है। एक बार कुछ लोगों की भेड़ों ने रात में किसी की खेती को चर डाला और उसे बर्बाद कर दिया। यह मामला नबी दाऊद के पास फैसले के लिए लाया गया। नबी दाऊद ने फैसला सुनाया कि खेती का मालिक भेड़ों को ले ले, क्योंकि खेती की क्षति भेड़ों के मूल्य के बराबर थी। लेकिन अल्लाह ने अपने विशेष ज्ञान और समझ से यह मामला नबी सुलैमान को समझाया, और उन्होंने एक अधिक न्यायपूर्ण और कल्याणकारी फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि खेती का मालिक भेड़ों को ले ले और उनके दूध, ऊन और बच्चों से लाभ उठाए, और भेड़ों के मालिक को खेती की ज़मीन दे दी जाए ताकि वह उसे दोबारा आबाद करे। जब खेती पहले जैसी हो जाए, तो दोनों अपनी-अपनी चीज़ें वापस ले लें। यह फैसला दोनों पक्षों के लिए न्याय और भलाई पर आधारित था। अल्लाह ने दाऊद और सुलैमान दोनों को नबुव्वत, न्याय-निर्णय की शक्ति और गहरा ज्ञान प्रदान किया था, और उन्हें विशेष सम्मान दिया था।

इसके अलावा, अल्लाह ने नबी दाऊद को एक और महान नेमत दी—पहाड़ों और पक्षियों को उनके अधीन कर दिया। ये सब उनके साथ मिलकर अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करते थे। यह एक चमत्कार था जो अल्लाह की कुदरत और दाऊद की उच्च स्थिति को दर्शाता है। अल्लाह ने यह सब अपनी इच्छा और शक्ति से किया, और वह हर उस काम को करने पर पूर्ण सामर्थ्य रखता है जो वह चाहता है।


दावत और सीख:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को ज्ञान, समझ और न्याय की शक्ति प्रदान करता है। न्याय करते समय हमें गहरी समझ और दूरदर्शिता का परिचय देना चाहिए, ताकि दोनों पक्षों का भला हो सके। अल्लाह ने अपने नबियों को जो विशेष नेमतें दीं, वे हमारे लिए नमूना हैं कि हम भी अल्लाह से ज्ञान और समझ की दुआ करें। साथ ही, पहाड़ों और पक्षियों का तस्बीह करना हमें याद दिलाता है कि पूरी कायनात अल्लाह की तस्बीह करती है, और हमें भी अपने जीवन में अल्लाह की याद और उसकी इबादत को अपना मुख्य कार्य बनाना चाहिए। यह आयत हमें न्याय, ज्ञान और अल्लाह की कुदरत पर गहरा ईमान रखने की प्रेरणा देती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 77-81 — अल-अंबिया

77وَنَصَرْنَاهُ مِنَ الْقَوْمِ الَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمَ سَوْءٍ فَأَغْرَقْنَاهُمْ أَجْمَعِينَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया था उनके मुक़ाबले में उनकी मदद की बेशक ये लोग (भी) बहुत बुरे लोग थे तो हमने उन सबको डुबो मारा
78وَدَاوُودَ وَسُلَيْمَانَ إِذْ يَحْكُمَانِ فِي الْحَرْثِ إِذْ نَفَشَتْ فِيهِ غَنَمُ الْقَوْمِ وَكُنَّا لِحُكْمِهِمْ شَاهِدِينَ
और (ऐ रसूल इनको) दाऊद और सुलेमान का (वाक्या याद दिलाओ) जब ये दोनों एक खेती के बारे में जिसमें रात के वक्त क़ुछ लोगों की बकरियाँ (घुसकर) चर गई थी फैसला करने बैठे और हम उन लोगों के क़िस्से को देख रहे थे (कि बाहम इख़तेलाफ़ हुआ)
79فَفَهَّمْنَاهَا سُلَيْمَانَ ۚ وَكُلًّا آتَيْنَا حُكْمًا وَعِلْمًا ۚ وَسَخَّرْنَا مَعَ دَاوُودَ الْجِبَالَ يُسَبِّحْنَ وَالطَّيْرَ ۚ وَكُنَّا فَاعِلِينَ
तो हमने सुलेमान को (इसका सही फ़ैसला समझा दिया) और (यूँ तो) सबको हम ही ने फहमे सलीम और इल्म अता किया और हम ही ने पहाड़ों को दाऊद का ताबेए बना दिया था कि उनके साथ (खुदा की) तस्बीह किया करते थे और परिन्दों को (भी ताबेए कर दिया था) और हम ही (ये अज़ाब) किया करते थे
80وَعَلَّمْنَاهُ صَنْعَةَ لَبُوسٍ لَّكُمْ لِتُحْصِنَكُم مِّن بَأْسِكُمْ ۖ فَهَلْ أَنتُمْ شَاكِرُونَ
और हम ही ने उनको तुम्हारी जंगी पोशिश (ज़िराह) का बनाना सिखा दिया ताकि तुम्हें (एक दूसरे के) वार से बचाए तो क्या तुम (अब भी) उसके शुक्रगुज़ार बनोगे
81وَلِسُلَيْمَانَ الرِّيحَ عَاصِفَةً تَجْرِي بِأَمْرِهِ إِلَى الْأَرْضِ الَّتِي بَارَكْنَا فِيهَا ۚ وَكُنَّا بِكُلِّ شَيْءٍ عَالِمِينَ
और (हम ही ने) बड़े ज़ोरों की हवा को सुलेमान का (ताबेए कर दिया था) कि वह उनके हुक्म से इस सरज़मीन (बैतुलमुक़द्दस) की तरफ चला करती थी जिसमें हमने तरह-तरह की बरकतें अता की थी और हम तो हर चीज़ से खूब वाक़िफ़ थे (और) है
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अनुवाद — अल-अंबिया 79

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Tuesday, August 18, 2026

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