अल-हज · 14/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
إِنَّ اللَّهَ يُدْخِلُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَفْعَلُ مَا يُرِيدُ ۝١٤
Innal laaha yudkhilul laeena aamanoo wa `amilus saalihaati jannaatin tajree min tahtihal anhaar; innal laaha yaf`alu maa yureed
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको (खुदा बेहश्त के) उन (हरे-भरे) बाग़ात में ले जाकर दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी होगीं बेशक खुदा जो चाहता है करता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • जन्नात (जन्नतें) — ऐसे बाग़ जिनमें हर प्रकार की खुशहाली और सुख-सुविधाएँ हों।
  • तज्री मिन तह्तिहल अन्हार — उन बाग़ों के नीचे नहरें बहती होंगी, यानी पानी की धाराएँ पेड़ों की जड़ों तक पहुँचती होंगी।
  • यफ'अलु मा युरीद — अल्लाह जो चाहता है वही करता है, उसके आगे कोई रोकने वाला नहीं।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपने रहमत भरे बंदों को खुशखबरी सुना रहा है कि जिन लोगों ने अल्लाह पर ईमान लाया — यानी उसकी वहदानियत (एकता) को दिल से माना, उसके रसूल (ﷺ) की रिसालत को सच्चा जाना, और इस ईमान को सिर्फ ज़ुबान तक सीमित नहीं रखा बल्कि अपने अमल से साबित किया — उन्होंने नेक काम किए, अच्छे आचरण अपनाए, अल्लाह के हुक्मों की पालना की और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचे। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने जन्नत के ऐसे बाग़ तैयार किए हैं जिनके नीचे नहरें बहती हैं। ये नहरें सिर्फ पानी की नहीं होंगी, बल्कि दूध, शहद और शराब-ए-तहूर (पवित्र पेय) की नदियाँ भी होंगी, जैसा कि कुरआन की दूसरी आयतों में बयान हुआ है। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह अपने वादे को पूरा करके ही रहता है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "अल्लाह जो चाहता है वही करता है।" यानी अल्लाह की मशीयत (इच्छा) के आगे किसी की चल नहीं सकती। वह जिस पर रहम करना चाहे, उसे अपनी जन्नत में दाखिल करता है — यह उसका फज़ल (कृपा) है; और जिसे सज़ा देना चाहे, उसे अपने अज़ाब में डालता है — यह उसका अदल (न्याय) है। कोई उसके फैसले को टालने वाला नहीं, कोई उसके हुक्म को रोकने वाला नहीं। यह बात मोमिन के दिल को सुकून देती है कि उसका रब हर चीज़ पर क़ादिर है, और उसकी रहमत उसके ग़ज़ब से बढ़कर है।

दावती पहलू:

यह आयत हर उस इंसान के लिए उम्मीद की किरण है जो अपनी गलतियों पर पछताता है और सुधार का इरादा रखता है। अल्लाह ने जन्नत का दरवाज़ा सिर्फ किसी ख़ास गिरोह के लिए नहीं खोला, बल्कि हर उस बंदे के लिए खोला है जो ईमान लाए और नेक अमल करे। चाहे वह ग़रीब हो या अमीर, काले हों या गोरे, अरब हों या अजमी — सबके लिए यह दरवाज़ा खुला है। अल्लाह की रहमत इतनी वसीअ है कि वह अपने बंदों को मामूली नेकी पर भी बड़ा अज्र देता है। तो आओ, हम अपने ईमान को मज़बूत करें और अपने अमल को सुधारें, ताकि हम भी उन खुशनसीब लोगों में शामिल हो सकें जिनके लिए यह अनमोल इनाम तैयार किया गया है। याद रखें, अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसकी तरफ से मिलने वाला इनाम कभी ख़त्म नहीं होता।



📜 आयत 12-16 — अल-हज

12يَدْعُو مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَضُرُّهُ وَمَا لَا يَنفَعُهُ ۚ ذَٰلِكَ هُوَ الضَّلَالُ الْبَعِيدُ
खुदा को छोड़कर उन चीज़ों को (हाजत के वक्त) बुलाता है जो न उसको नुक़सान ही पहुँचा सकते हैं और न कुछ नफा ही पहुँचा सकते हैं
13يَدْعُو لَمَن ضَرُّهُ أَقْرَبُ مِن نَّفْعِهِ ۚ لَبِئْسَ الْمَوْلَىٰ وَلَبِئْسَ الْعَشِيرُ
यही तो पल्ले दरने की गुमराही है और उसको अपनी हाजत रवाई के लिए पुकारता है जिस का नुक़सान उसके नफे से ज्यादा क़रीब है बेशक ऐसा मालिक भी बुरा और ऐसा रफीक़ भी बुरा
14إِنَّ اللَّهَ يُدْخِلُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَفْعَلُ مَا يُرِيدُ
बेशक जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको (खुदा बेहश्त के) उन (हरे-भरे) बाग़ात में ले जाकर दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी होगीं बेशक खुदा जो चाहता है करता है
15مَن كَانَ يَظُنُّ أَن لَّن يَنصُرَهُ اللَّهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ فَلْيَمْدُدْ بِسَبَبٍ إِلَى السَّمَاءِ ثُمَّ لْيَقْطَعْ فَلْيَنظُرْ هَلْ يُذْهِبَنَّ كَيْدُهُ مَا يَغِيظُ
जो शख्स (गुस्से में) ये बदगुमानी करता है कि दुनिया और आख़ेरत में खुदा उसकी हरग़िज मदद न करेगा तो उसे चाहिए कि आसमान तक रस्सी ताने (और अपने गले में फाँसी डाल दे) फिर उसे काट दे (ताकि घुट कर मर जाए) फिर देखिए कि जो चीज़ उसे गुस्से में ला रही थी उसे उसकी तद्बीर दूर दफ़ा कर देती है
16وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَاهُ آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ وَأَنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَن يُرِيدُ
(या नहीं) और हमने इस कुरान को यूँ ही वाजेए व रौशन निशानियाँ (बनाकर) नाज़िल किया और बेशक खुदा जिसकी चाहता है हिदायत करता है
अल-हजकुरान सूची
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अनुवाद — अल-हज 14

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Tuesday, August 18, 2026

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