अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- जन्नात (जन्नतें) — ऐसे बाग़ जिनमें हर प्रकार की खुशहाली और सुख-सुविधाएँ हों।
- तज्री मिन तह्तिहल अन्हार — उन बाग़ों के नीचे नहरें बहती होंगी, यानी पानी की धाराएँ पेड़ों की जड़ों तक पहुँचती होंगी।
- यफ'अलु मा युरीद — अल्लाह जो चाहता है वही करता है, उसके आगे कोई रोकने वाला नहीं।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला अपने रहमत भरे बंदों को खुशखबरी सुना रहा है कि जिन लोगों ने अल्लाह पर ईमान लाया — यानी उसकी वहदानियत (एकता) को दिल से माना, उसके रसूल (ﷺ) की रिसालत को सच्चा जाना, और इस ईमान को सिर्फ ज़ुबान तक सीमित नहीं रखा बल्कि अपने अमल से साबित किया — उन्होंने नेक काम किए, अच्छे आचरण अपनाए, अल्लाह के हुक्मों की पालना की और उसकी मना की हुई चीज़ों से बचे। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने जन्नत के ऐसे बाग़ तैयार किए हैं जिनके नीचे नहरें बहती हैं। ये नहरें सिर्फ पानी की नहीं होंगी, बल्कि दूध, शहद और शराब-ए-तहूर (पवित्र पेय) की नदियाँ भी होंगी, जैसा कि कुरआन की दूसरी आयतों में बयान हुआ है। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह अपने वादे को पूरा करके ही रहता है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "अल्लाह जो चाहता है वही करता है।" यानी अल्लाह की मशीयत (इच्छा) के आगे किसी की चल नहीं सकती। वह जिस पर रहम करना चाहे, उसे अपनी जन्नत में दाखिल करता है — यह उसका फज़ल (कृपा) है; और जिसे सज़ा देना चाहे, उसे अपने अज़ाब में डालता है — यह उसका अदल (न्याय) है। कोई उसके फैसले को टालने वाला नहीं, कोई उसके हुक्म को रोकने वाला नहीं। यह बात मोमिन के दिल को सुकून देती है कि उसका रब हर चीज़ पर क़ादिर है, और उसकी रहमत उसके ग़ज़ब से बढ़कर है।
दावती पहलू:
यह आयत हर उस इंसान के लिए उम्मीद की किरण है जो अपनी गलतियों पर पछताता है और सुधार का इरादा रखता है। अल्लाह ने जन्नत का दरवाज़ा सिर्फ किसी ख़ास गिरोह के लिए नहीं खोला, बल्कि हर उस बंदे के लिए खोला है जो ईमान लाए और नेक अमल करे। चाहे वह ग़रीब हो या अमीर, काले हों या गोरे, अरब हों या अजमी — सबके लिए यह दरवाज़ा खुला है। अल्लाह की रहमत इतनी वसीअ है कि वह अपने बंदों को मामूली नेकी पर भी बड़ा अज्र देता है। तो आओ, हम अपने ईमान को मज़बूत करें और अपने अमल को सुधारें, ताकि हम भी उन खुशनसीब लोगों में शामिल हो सकें जिनके लिए यह अनमोल इनाम तैयार किया गया है। याद रखें, अल्लाह का वादा सच्चा है, और उसकी तरफ से मिलने वाला इनाम कभी ख़त्म नहीं होता।
📜 आयत 12-16 — अल-हज
अनुवाद — अल-हज 14
सूरा अल-हज आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे…सूरा आयत 14/78 — अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हज सुनें, अल-हज अनुवाद, अल-हज mp3, अल-हज pdf. आयत 12–16. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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