अल-हज · 15/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हज
مَن كَانَ يَظُنُّ أَن لَّن يَنصُرَهُ اللَّهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ فَلْيَمْدُدْ بِسَبَبٍ إِلَى السَّمَاءِ ثُمَّ لْيَقْطَعْ فَلْيَنظُرْ هَلْ يُذْهِبَنَّ كَيْدُهُ مَا يَغِيظُ ۝١٥
Man kaana yazunnu allai yansurahul laahu fid dunyaa wal aakhirati fal yamdud bisababin ilas samaaa`i summal yaqta` falyanzur hal yuzhibanna kaiduhoo maa yagheez
📖 हिंदी अर्थ
जो शख्स (गुस्से में) ये बदगुमानी करता है कि दुनिया और आख़ेरत में खुदा उसकी हरग़िज मदद न करेगा तो उसे चाहिए कि आसमान तक रस्सी ताने (और अपने गले में फाँसी डाल दे) फिर उसे काट दे (ताकि घुट कर मर जाए) फिर देखिए कि जो चीज़ उसे गुस्से में ला रही थी उसे उसकी तद्बीर दूर दफ़ा कर देती है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَظُنُّ: यानी यह विश्वास रखना या समझना।
  • سَبَبٍ: यहाँ इसका अर्थ है रस्सी या कोई ऐसी चीज़ जिससे लटका जा सके।
  • السَّمَاء: यहाँ इसका अर्थ है घर की छत या ऊपरी हिस्सा।
  • لْيَقْطَعْ: यानी उसे काट डाले (अर्थात अपनी जान ले ले)।
  • كَيْدُهُ: उसकी चाल या कार्रवाई।
  • مَا يَغِيظُ: वह चीज़ जो उसे गुस्सा दिलाती है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों को चुनौती देती है जो यह सोचते हैं कि अल्लाह अपने नबी ﷺ की मदद नहीं करेगा। अल्लाह तआला फ़रमाता है: जो कोई यह समझता है कि अल्लाह अपने रसूल को दुनिया में (दीन को ग़ालिब बनाकर) और आख़िरत में (ऊँचा दर्जा देकर और झुठलाने वालों को सज़ा देकर) मदद नहीं करेगा, तो उसे चाहिए कि वह अपने घर की छत से एक रस्सी बाँधे, फिर उससे अपना गला घोंटकर अपनी जान ले ले। फिर वह देखे कि क्या उसका यह ग़ुस्सा और यह कार्रवाई उसके दिल की जलन को दूर कर सकती है?

यह एक बहुत ही सशक्त और स्पष्ट चुनौती है। अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं कि अगर तुम्हें यक़ीन है कि अल्लाह अपने नबी की मदद नहीं करेगा, तो तुम अपनी जान ले लो और देखो कि क्या इससे तुम्हारा ग़ुस्सा शांत होता है? लेकिन हक़ीक़त यह है कि अल्लाह अपने नबी ﷺ की मदद ज़रूर करेगा, चाहे दुश्मन चाहे या न चाहे। यह आयत उन काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो नबी ﷺ की मदद के वादे पर शक करते थे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि अल्लाह का वादा सच्चा है। अल्लाह अपने नबी और अपने दीन की मदद ज़रूर करता है। इतिहास गवाह है कि जब-जब मुसलमानों पर मुश्किलें आईं, अल्लाह ने अपनी मदद भेजी। यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह पर पूरा भरोसा रखना चाहिए और कभी निराश नहीं होना चाहिए। अल्लाह की मदद उसके वादे के साथ जुड़ी हुई है, और वह अपने वादे को पूरा करके रहता है। इसलिए हमें अपने दिलों से ग़ुस्से और जलन को निकालकर अल्लाह की रहमत और उसकी मदद पर भरोसा रखना चाहिए। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।



📜 आयत 13-17 — सूरा अल-हज

13يَدْعُو لَمَن ضَرُّهُ أَقْرَبُ مِن نَّفْعِهِ ۚ لَبِئْسَ الْمَوْلَىٰ وَلَبِئْسَ الْعَشِيرُ
यही तो पल्ले दरने की गुमराही है और उसको अपनी हाजत रवाई के लिए पुकारता है जिस का नुक़सान उसके नफे से ज्यादा क़रीब है बेशक ऐसा मालिक भी बुरा और ऐसा रफीक़ भी बुरा
14إِنَّ اللَّهَ يُدْخِلُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ ۚ إِنَّ اللَّهَ يَفْعَلُ مَا يُرِيدُ
बेशक जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे अच्छे काम किए उनको (खुदा बेहश्त के) उन (हरे-भरे) बाग़ात में ले जाकर दाख़िल करेगा जिनके नीचे नहरें जारी होगीं बेशक खुदा जो चाहता है करता है
15مَن كَانَ يَظُنُّ أَن لَّن يَنصُرَهُ اللَّهُ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ فَلْيَمْدُدْ بِسَبَبٍ إِلَى السَّمَاءِ ثُمَّ لْيَقْطَعْ فَلْيَنظُرْ هَلْ يُذْهِبَنَّ كَيْدُهُ مَا يَغِيظُ
जो शख्स (गुस्से में) ये बदगुमानी करता है कि दुनिया और आख़ेरत में खुदा उसकी हरग़िज मदद न करेगा तो उसे चाहिए कि आसमान तक रस्सी ताने (और अपने गले में फाँसी डाल दे) फिर उसे काट दे (ताकि घुट कर मर जाए) फिर देखिए कि जो चीज़ उसे गुस्से में ला रही थी उसे उसकी तद्बीर दूर दफ़ा कर देती है
16وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَاهُ آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ وَأَنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَن يُرِيدُ
(या नहीं) और हमने इस कुरान को यूँ ही वाजेए व रौशन निशानियाँ (बनाकर) नाज़िल किया और बेशक खुदा जिसकी चाहता है हिदायत करता है
17إِنَّ الَّذِينَ آمَنُوا وَالَّذِينَ هَادُوا وَالصَّابِئِينَ وَالنَّصَارَىٰ وَالْمَجُوسَ وَالَّذِينَ أَشْرَكُوا إِنَّ اللَّهَ يَفْصِلُ بَيْنَهُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
इसमें शक नहीं कि जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया (मुसलमान) और यहूदी और लामज़हब लोग और ईसाई और मजूसी (आतिशपरस्त) और मुशरेकीन (कुफ्फ़ार) यक़ीनन खुदा उन लोगों के दरमियान क़यामत के दिन (ठीक ठीक) फ़ैसला कर देगा इसमें शक नहीं कि खुदा हर चीज़ को देख रहा है
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
15आयत

अनुवाद — अल-हज 15

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Thursday, October 1, 2026

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