अल-हज · 29/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
ثُمَّ لْيَقْضُوا تَفَثَهُمْ وَلْيُوفُوا نُذُورَهُمْ وَلْيَطَّوَّفُوا بِالْبَيْتِ الْعَتِيقِ ۝٢٩
Summal yaqdoo tafasahum wal yoofoo nuzoorahum wal yattawwafoo bil Baitil `Ateeq
📖 हिंदी अर्थ
फिर लोगों को चाहिए कि अपनी-अपनी (बदन की) कसाफ़त दूर करें और अपनी नज़रें पूरी करें और क़दीम (इबादत) ख़ानए काबा का तवाफ करें यही हुक्म है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَفَثَهُمْ (तफ़सहुम): इहराम की हालत में शरीर पर जमा हुआ मैल-कुचैल, बाल, नाखून आदि।
  • نُذُورَهُمْ (नुज़ूरहुम): वे नज़रें और मन्नतें जो हाजी ने अपने ऊपर लाज़िम की हों, जैसे हज, उमरा, क़ुर्बानी या कोई और नेकी।
  • الْبَيْتِ الْعَتِيقِ (अल-बैतिल अतीक): काबा, जिसे अल्लाह ने ज़ालिमों के क़ब्ज़े से आज़ाद किया और जो इबादत के लिए सबसे पुराना घर है।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हाजियों को हज के आख़िरी मराहिल की हिदायत दे रहा है। हज के मुख्य अरकान अदा करने के बाद अब वह समय आ गया है जब हाजी को अपनी इहराम की हालत से निकलना है। अल्लाह फ़रमाता है: "फिर वे अपना मैल-कुचैल दूर करें" — यानी अपने बाल मुँडवाएँ या कटवाएँ, नाखून काटें, शरीर की गंदगी साफ़ करें और सामान्य कपड़े पहनें। यह इहराम से हलाल होने की निशानी है, जो हज की पूर्णता का हिस्सा है।

इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है: "और वे अपनी नज़रें पूरी करें" — यानी जो नज़र या मन्नत हाजी ने अपने ऊपर लाज़िम की हो, जैसे क़ुर्बानी का जानवर या कोई और नेकी, उसे वह पूरा करे। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह से किए गए वादे को पूरा करना बहुत बड़ी नेकी है, और अल्लाह वफ़ादारों से मुहब्बत करता है।

फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और वे क़दीम (पुराने) घर का तवाफ़ करें" — यानी काबा का तवाफ़-ए-इफ़ाज़ा करें, जो हज का रुक्न है। इस घर को "अतीक" (आज़ाद) कहा गया है क्योंकि अल्लाह ने इसे ज़ालिमों के क़ब्ज़े और तबाही से हमेशा महफ़ूज़ रखा है। यह वही घर है जो इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के हुक्म से बनाया था, और यह पूरी दुनिया के लिए बरकत और हिदायत का केंद्र है।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि हज सिर्फ़ रस्म नहीं, बल्कि तज़्किया-ए-नफ़्स (आत्मा की पवित्रता) का ज़रिया है। जिस तरह हाजी अपने शरीर का मैल साफ़ करता है, उसी तरह उसे अपने दिल को गुनाहों से पाक करना चाहिए। हज के बाद इंसान की ज़िंदगी में एक नई सुबह आती है — वह गुनाहों से तौबा करता है, अल्लाह से वादा करता है कि वह अब नेक ज़िंदगी गुज़ारेगा। यही असली कामयाबी है। अल्लाह ने काबा को आज़ाद किया ताकि हर मुसलमान उसकी तरफ रुख करे और अपने रब की इबादत में मशगूल रहे। हमें चाहिए कि हम इस घर की तरह अपने दिलों को भी हर बुराई से आज़ाद रखें, ताकि अल्लाह की रहमत हम पर नाज़िल हो। याद रखें, हज का असली फल वही है जो हाजी को पाक और नेक बना दे, और उसकी ज़िंदगी को रोशनी से भर दे।

🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — अल-हज

27وَأَذِّن فِي النَّاسِ بِالْحَجِّ يَأْتُوكَ رِجَالًا وَعَلَىٰ كُلِّ ضَامِرٍ يَأْتِينَ مِن كُلِّ فَجٍّ عَمِيقٍ
और लोगों को हज की ख़बर कर दो कि लोग तुम्हारे पास (ज़ूक दर ज़ूक) ज्यादा और हर तरह की दुबली (सवारियों पर जो राह दूर दराज़ तय करके आयी होगी चढ़-चढ़ के) आ पहुँचेगें
28لِّيَشْهَدُوا مَنَافِعَ لَهُمْ وَيَذْكُرُوا اسْمَ اللَّهِ فِي أَيَّامٍ مَّعْلُومَاتٍ عَلَىٰ مَا رَزَقَهُم مِّن بَهِيمَةِ الْأَنْعَامِ ۖ فَكُلُوا مِنْهَا وَأَطْعِمُوا الْبَائِسَ الْفَقِيرَ
ताकि अपने (दुनिया व आखेरत के) फायदो पर फायज़ हों और खुदा ने जो जानवर चारपाए उन्हें अता फ़रमाए उनपर (ज़िबाह के वक्त) चन्द मुअय्युन दिनों में खुदा का नाम लें तो तुम लोग कुरबानी के गोश्त खुद भी खाओ और भूखे मोहताज को भी खिलाओ
29ثُمَّ لْيَقْضُوا تَفَثَهُمْ وَلْيُوفُوا نُذُورَهُمْ وَلْيَطَّوَّفُوا بِالْبَيْتِ الْعَتِيقِ
फिर लोगों को चाहिए कि अपनी-अपनी (बदन की) कसाफ़त दूर करें और अपनी नज़रें पूरी करें और क़दीम (इबादत) ख़ानए काबा का तवाफ करें यही हुक्म है
30ذَٰلِكَ وَمَن يُعَظِّمْ حُرُمَاتِ اللَّهِ فَهُوَ خَيْرٌ لَّهُ عِندَ رَبِّهِ ۗ وَأُحِلَّتْ لَكُمُ الْأَنْعَامُ إِلَّا مَا يُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ ۖ فَاجْتَنِبُوا الرِّجْسَ مِنَ الْأَوْثَانِ وَاجْتَنِبُوا قَوْلَ الزُّورِ
और इसके अलावा जो शख्स खुदा की हुरमत वाली चीज़ों की ताज़ीम करेगा तो ये उसके पवरदिगार के यहाँ उसके हक़ में बेहतर है और उन जानवरों के अलावा जो तुमसे बयान किए जाँएगे कुल चारपाए तुम्हारे वास्ते हलाल किए गए तो तुम नापाक बुतों से बचे रहो और लग़ो बातें गाने वग़ैरह से बचे रहो
31حُنَفَاءَ لِلَّهِ غَيْرَ مُشْرِكِينَ بِهِ ۚ وَمَن يُشْرِكْ بِاللَّهِ فَكَأَنَّمَا خَرَّ مِنَ السَّمَاءِ فَتَخْطَفُهُ الطَّيْرُ أَوْ تَهْوِي بِهِ الرِّيحُ فِي مَكَانٍ سَحِيقٍ
निरे खरे अल्लाह के होकर (रहो) उसका किसी को शरीक न बनाओ और जिस शख्स ने (किसी को) खुदा का शरीक बनाया तो गोया कि वह आसमान से गिर पड़ा फिर उसको (या तो दरमियान ही से) कोई (मुरदा ख्ववार) चिड़िया उचक ले गई या उसे हवा के झोंके ने बहुत दूर जा फेंका
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अनुवाद — अल-हज 29

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Tuesday, August 18, 2026

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