Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَفَثَهُمْ (तफ़सहुम): इहराम की हालत में शरीर पर जमा हुआ मैल-कुचैल, बाल, नाखून आदि।
- نُذُورَهُمْ (नुज़ूरहुम): वे नज़रें और मन्नतें जो हाजी ने अपने ऊपर लाज़िम की हों, जैसे हज, उमरा, क़ुर्बानी या कोई और नेकी।
- الْبَيْتِ الْعَتِيقِ (अल-बैतिल अतीक): काबा, जिसे अल्लाह ने ज़ालिमों के क़ब्ज़े से आज़ाद किया और जो इबादत के लिए सबसे पुराना घर है।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला हाजियों को हज के आख़िरी मराहिल की हिदायत दे रहा है। हज के मुख्य अरकान अदा करने के बाद अब वह समय आ गया है जब हाजी को अपनी इहराम की हालत से निकलना है। अल्लाह फ़रमाता है: "फिर वे अपना मैल-कुचैल दूर करें" — यानी अपने बाल मुँडवाएँ या कटवाएँ, नाखून काटें, शरीर की गंदगी साफ़ करें और सामान्य कपड़े पहनें। यह इहराम से हलाल होने की निशानी है, जो हज की पूर्णता का हिस्सा है।
इसके बाद अल्लाह फ़रमाता है: "और वे अपनी नज़रें पूरी करें" — यानी जो नज़र या मन्नत हाजी ने अपने ऊपर लाज़िम की हो, जैसे क़ुर्बानी का जानवर या कोई और नेकी, उसे वह पूरा करे। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह से किए गए वादे को पूरा करना बहुत बड़ी नेकी है, और अल्लाह वफ़ादारों से मुहब्बत करता है।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: "और वे क़दीम (पुराने) घर का तवाफ़ करें" — यानी काबा का तवाफ़-ए-इफ़ाज़ा करें, जो हज का रुक्न है। इस घर को "अतीक" (आज़ाद) कहा गया है क्योंकि अल्लाह ने इसे ज़ालिमों के क़ब्ज़े और तबाही से हमेशा महफ़ूज़ रखा है। यह वही घर है जो इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के हुक्म से बनाया था, और यह पूरी दुनिया के लिए बरकत और हिदायत का केंद्र है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि हज सिर्फ़ रस्म नहीं, बल्कि तज़्किया-ए-नफ़्स (आत्मा की पवित्रता) का ज़रिया है। जिस तरह हाजी अपने शरीर का मैल साफ़ करता है, उसी तरह उसे अपने दिल को गुनाहों से पाक करना चाहिए। हज के बाद इंसान की ज़िंदगी में एक नई सुबह आती है — वह गुनाहों से तौबा करता है, अल्लाह से वादा करता है कि वह अब नेक ज़िंदगी गुज़ारेगा। यही असली कामयाबी है। अल्लाह ने काबा को आज़ाद किया ताकि हर मुसलमान उसकी तरफ रुख करे और अपने रब की इबादत में मशगूल रहे। हमें चाहिए कि हम इस घर की तरह अपने दिलों को भी हर बुराई से आज़ाद रखें, ताकि अल्लाह की रहमत हम पर नाज़िल हो। याद रखें, हज का असली फल वही है जो हाजी को पाक और नेक बना दे, और उसकी ज़िंदगी को रोशनी से भर दे।
📜 आयत 27-31 — सूरा अल-हज
अनुवाद — अल-हज 29
सूरा अल-हज आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर लोगों को चाहिए कि अपनी-अपनी (बदन की) कसाफ़त दूर…सूरा आयत 29/78 — सूरा अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हज सुनें, सूरा अल-हज अनुवाद, सूरा अल-हज mp3, सूरा अल-हज pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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