अल-हज · 45/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
فَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا وَهِيَ ظَالِمَةٌ فَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَبِئْرٍ مُّعَطَّلَةٍ وَقَصْرٍ مَّشِيدٍ ۝٤٥
Faka ayyim min qaryatin ahlaknaahaa wa hiya zaalimatun fahiya khaawiyatun `alaa `urooshihaa wa bi`rim mu`at talatinw wa qasrim masheed
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ कितनी बस्तियाँ हैं कि हम ने उन्हें बरबाद कर दिया और वह सरकश थीं पस वह अपनी छतों पर ढही पड़ी हैं और कितने बेकार (उजडे क़ुएँ और कितने) मज़बूत बड़े-बड़े ऊँचे महल (वीरान हो गए)

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अनुवाद — Tafsir

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है:

"फ़क़सीरुन मिन क़र्यतिन अहलकनाहा..."

यानी कितनी ही बस्तियाँ थीं जिन्हें हमने उनके कुफ्र और ज़ुल्म की वजह से हलाक कर दिया। वे बस्तियाँ अपने कुफ्र और सरकशी में डूबी हुई थीं, और अल्लाह का अज़ाब उन पर आ पड़ा। उनके घर आज इस हालत में हैं कि उनकी छतें गिर पड़ी हैं, दीवारें ढह गई हैं, और वे सब कुछ वीरान और सुनसान पड़े हैं। उनमें कोई बाशिंदा नहीं, कोई आवाज़ नहीं, सिर्फ़ खामोशी और तबाही का मंज़र है।

और कितने ही कुएँ हैं जो आज बेकार पड़े हैं। जिनमें पानी मौजूद है, मगर उन्हें खोदने वाले और इस्तेमाल करने वाले लोग नहीं हैं। वे लोग जो कभी उन कुओं से पानी निकालते थे, आज वे खुद मिट्टी में दफ़न हैं। और कितने ही ऊँचे और मज़बूत महल हैं जो चूने और पक्की ईंटों से बनाए गए थे, लेकिन उनकी शानो-शौकत और मज़बूती उनके मालिकों को अल्लाह के अज़ाब से न बचा सकी। वे महल आज खाली पड़े हैं, उनके रहने वाले कब्रों में उतर चुके हैं।

ये सब कुछ इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने अल्लाह के हुक्म को झुटलाया, उसके रसूलों को नकारा और ज़ुल्म और फ़साद पर अड़े रहे। अल्लाह ने जब चाहा उन्हें पकड़ लिया, और कोई उन्हें बचाने वाला नहीं था।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें सबक़ सिखा रहा है कि दुनिया की ये चीज़ें — घर, कुएँ, महल — कोई क़ीमत नहीं रखतीं अगर इंसान का अल्लाह से ताल्लुक़ न हो। जो लोग अल्लाह की इबादत से मुँह मोड़ लेते हैं, उनकी तमाम दौलत और तामीरात उनके काम नहीं आतीं।

और ये भी याद रखने की बात है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। वह जब किसी ज़ालिम क़ौम को पकड़ता है, तो उसे ऐसा पकड़ता है कि कोई बचाव नहीं होता। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के हुक्मों पर चलें, उसकी नाफ़रमानी से बचें, और उस रास्ते पर चलें जो उसके प्यारे नबी ﷺ ने हमें दिखाया है। दुनिया की ये चीज़ें फ़ानी हैं, लेकिन अल्लाह की रज़ा और उसकी जन्नत हमेशा रहने वाली है। जो लोग अल्लाह की राह में नेकी करते हैं, उनके लिए ऐसा अंजाम है जो कभी ख़त्म नहीं होगा।



📜 आयत 43-47 — अल-हज

43وَقَوْمُ إِبْرَاهِيمَ وَقَوْمُ لُوطٍ
और इबराहीम की क़ौम और लूत की क़ौम
44وَأَصْحَابُ مَدْيَنَ ۖ وَكُذِّبَ مُوسَىٰ فَأَمْلَيْتُ لِلْكَافِرِينَ ثُمَّ أَخَذْتُهُمْ ۖ فَكَيْفَ كَانَ نَكِيرِ
और मदियन के रहने वाले (अपने-अपने पैग़म्बरों को) झुठला चुके हैं और मूसा (भी) झुठलाए जा चुके हैं तो मैंने काफिरों को चन्द ढील दे दी फिर (आख़िर) उन्हें ले डाला तो तुमने देखा मेरा अज़ाब कैसा था
45فَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا وَهِيَ ظَالِمَةٌ فَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَبِئْرٍ مُّعَطَّلَةٍ وَقَصْرٍ مَّشِيدٍ
ग़रज़ कितनी बस्तियाँ हैं कि हम ने उन्हें बरबाद कर दिया और वह सरकश थीं पस वह अपनी छतों पर ढही पड़ी हैं और कितने बेकार (उजडे क़ुएँ और कितने) मज़बूत बड़े-बड़े ऊँचे महल (वीरान हो गए)
46أَفَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَتَكُونَ لَهُمْ قُلُوبٌ يَعْقِلُونَ بِهَا أَوْ آذَانٌ يَسْمَعُونَ بِهَا ۖ فَإِنَّهَا لَا تَعْمَى الْأَبْصَارُ وَلَٰكِن تَعْمَى الْقُلُوبُ الَّتِي فِي الصُّدُورِ
क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं ताकि उनके लिए ऐसे दिल होते हैं जैसे हक़ बातों को समझते या उनके ऐसे कान होते जिनके ज़रिए से (सच्ची बातों को) सुनते क्योंकि ऑंखें अंधी नहीं हुआ करती बल्कि दिल जो सीने में है वही अन्धे हो जाया करते हैं
47وَيَسْتَعْجِلُونَكَ بِالْعَذَابِ وَلَن يُخْلِفَ اللَّهُ وَعْدَهُ ۚ وَإِنَّ يَوْمًا عِندَ رَبِّكَ كَأَلْفِ سَنَةٍ مِّمَّا تَعُدُّونَ
और (ऐ रसूल) तुम से ये लोग अज़ाब के जल्द आने की तमन्ना रखते हैं और खुदा तो हरगिज़ अपने वायदे के ख़िलाफ नहीं करेगा और बेशक (क़यामत का) एक दिन तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक तुम्हारी गिनती के हिसाब से एक हज़ार बरस के बराबर है
अल-हजकुरान सूची
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मदनीRevelation
45आयत

अनुवाद — अल-हज 45

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Tuesday, August 18, 2026

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