अल-हज · 44/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हज
وَأَصْحَابُ مَدْيَنَ ۖ وَكُذِّبَ مُوسَىٰ فَأَمْلَيْتُ لِلْكَافِرِينَ ثُمَّ أَخَذْتُهُمْ ۖ فَكَيْفَ كَانَ نَكِيرِ ۝٤٤
Wa as haabu Madyana wa kuzziba Moosaa fa amlaitu lilkaafireena summa akhaztuhum fakaifa kaana nakeer
📖 हिंदी अर्थ
और मदियन के रहने वाले (अपने-अपने पैग़म्बरों को) झुठला चुके हैं और मूसा (भी) झुठलाए जा चुके हैं तो मैंने काफिरों को चन्द ढील दे दी फिर (आख़िर) उन्हें ले डाला तो तुमने देखा मेरा अज़ाब कैसा था

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَصْحَابُ مَدْيَنَ: मदयन (मदियन) के निवासी, जिन्होंने पैगंबर शुएब (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया।
  • فَأَمْلَيْتُ: मैंने उन्हें मोहलत दी, यानी उन्हें सज़ा देने में देर की।
  • نَكِيرِ: मेरा इनकार (अस्वीकृति) और मेरी सज़ा, जो उनके कुफ्र और झुठलाने के कारण आई।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को तसल्ली देते हुए फ़रमाते हैं कि ऐ रसूल! अगर आपकी क़ौम आपको झुठला रही है, तो यह कोई नई बात नहीं। इससे पहले भी कई क़ौमें अपने पैगंबरों को झुठला चुकी हैं। हज़रत नूह की क़ौम, आद, समूद, हज़रत इब्राहीम की क़ौम, हज़रत लूत की क़ौम, और मदयन के लोग जिन्होंने हज़रत शुएब (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया—ये सब अपने-अपने नबियों के मुक़ाबले में खड़े हुए। इसी तरह फ़िरऔन और उसकी क़ौम ने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को झुठलाया।

लेकिन अल्लाह तआला ने इन सबको फ़ौरन सज़ा नहीं दी, बल्कि उन्हें मोहलत दी। वह उन्हें मौका देता रहा, ताकि वे तौबा कर लें और अपनी ग़लती से बाज़ आएँ। मगर जब उन्होंने अपनी सरकशी और कुफ्र पर अड़े रहे, तो अल्लाह ने उन्हें अपनी पकड़ में ले लिया। अल्लाह का अज़ाब उन पर ऐसे आया कि उनकी ताक़त, उनकी सल्तनत, उनकी बड़ाई—सब कुछ मिट्टी में मिल गया।

अल्लाह फ़रमाता है: "फिर देखो, मेरा इनकार कैसा था!" यानी जब मैंने उनकी नेअमतों को उनसे छीन लिया और उन्हें हलाक कर दिया, तो यह मेरी ओर से उनके कुफ्र का इनकार था। यह एक बड़ी इबरत और नसीहत है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। वह जब चाहता है, किसी को पकड़ लेता है, और उसकी पकड़ से कोई बच नहीं सकता।

यह आयत उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो आज भी अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को झुठलाते हैं या उनके पैग़ाम को नकारते हैं। अल्लाह की मोहलत का मतलब यह नहीं कि वह भूल गया है, बल्कि वह देख रहा है और हर किसी को उसका हक़ देकर रहेगा। मोमिन के लिए इस आयत में सबसे बड़ी नसीहत यह है कि वह अल्लाह के अज़ाब से डरे, अपने आपको उसकी नाफ़रमानी से बचाए, और अपने नबी की सुन्नत पर साबित-क़दम रहे। अल्लाह तआला अपने नेक बंदों के साथ है, और वह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता।



📜 आयत 42-46 — सूरा अल-हज

42وَإِن يُكَذِّبُوكَ فَقَدْ كَذَّبَتْ قَبْلَهُمْ قَوْمُ نُوحٍ وَعَادٌ وَثَمُودُ
और (ऐ रसूल) अगर ये (कुफ्फ़ार) तुमको झुठलाते हैं तो कोइ ताज्जुब की बात नहीं उनसे पहले नूह की क़ौम और (क़ौमे आद और समूद)
43وَقَوْمُ إِبْرَاهِيمَ وَقَوْمُ لُوطٍ
और इबराहीम की क़ौम और लूत की क़ौम
44وَأَصْحَابُ مَدْيَنَ ۖ وَكُذِّبَ مُوسَىٰ فَأَمْلَيْتُ لِلْكَافِرِينَ ثُمَّ أَخَذْتُهُمْ ۖ فَكَيْفَ كَانَ نَكِيرِ
और मदियन के रहने वाले (अपने-अपने पैग़म्बरों को) झुठला चुके हैं और मूसा (भी) झुठलाए जा चुके हैं तो मैंने काफिरों को चन्द ढील दे दी फिर (आख़िर) उन्हें ले डाला तो तुमने देखा मेरा अज़ाब कैसा था
45فَكَأَيِّن مِّن قَرْيَةٍ أَهْلَكْنَاهَا وَهِيَ ظَالِمَةٌ فَهِيَ خَاوِيَةٌ عَلَىٰ عُرُوشِهَا وَبِئْرٍ مُّعَطَّلَةٍ وَقَصْرٍ مَّشِيدٍ
ग़रज़ कितनी बस्तियाँ हैं कि हम ने उन्हें बरबाद कर दिया और वह सरकश थीं पस वह अपनी छतों पर ढही पड़ी हैं और कितने बेकार (उजडे क़ुएँ और कितने) मज़बूत बड़े-बड़े ऊँचे महल (वीरान हो गए)
46أَفَلَمْ يَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَتَكُونَ لَهُمْ قُلُوبٌ يَعْقِلُونَ بِهَا أَوْ آذَانٌ يَسْمَعُونَ بِهَا ۖ فَإِنَّهَا لَا تَعْمَى الْأَبْصَارُ وَلَٰكِن تَعْمَى الْقُلُوبُ الَّتِي فِي الصُّدُورِ
क्या ये लोग रूए ज़मीन पर चले फिरे नहीं ताकि उनके लिए ऐसे दिल होते हैं जैसे हक़ बातों को समझते या उनके ऐसे कान होते जिनके ज़रिए से (सच्ची बातों को) सुनते क्योंकि ऑंखें अंधी नहीं हुआ करती बल्कि दिल जो सीने में है वही अन्धे हो जाया करते हैं
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
44आयत

अनुवाद — अल-हज 44

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Thursday, October 1, 2026

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