अल-हज · 72/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ تَعْرِفُ فِي وُجُوهِ الَّذِينَ كَفَرُوا الْمُنكَرَ ۖ يَكَادُونَ يَسْطُونَ بِالَّذِينَ يَتْلُونَ عَلَيْهِمْ آيَاتِنَا ۗ قُلْ أَفَأُنَبِّئُكُم بِشَرٍّ مِّن ذَٰلِكُمُ ۗ النَّارُ وَعَدَهَا اللَّهُ الَّذِينَ كَفَرُوا ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ ۝٧٢
Wa izaa tutlaa `laihim Aayaatunaa baiyinaatin ta`rifu fee wujoohil lazeena kafarul munkara yakaadoona yastoona bil lazeena yatloona `alaihim Aayaatinaa; qul afa unab bi`ukum bisharrim min zaalikum; an Naaru wa `adahal laahul lazeena kafaroo wa bi`sal maseer
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) जब हमारी वाज़ेए व रौशन आयतें उनके सामने पढ़ कर सुनाई जाती हैं तो तुम (उन) काफिरों के चेहरों पर नाखुशी के (आसार) देखते हो (यहाँ तक कि) क़रीब होता है कि जो लोग उनको हमारी आयातें पढ़कर सुनाते हैं उन पर ये लोग हमला कर बैठे (ऐ रसूल) तुम कह दो (कि) तो क्या मैं तुम्हें इससे भी कहीं बदतर चीज़ बता दूँ (अच्छा) तो सुन लो वह जहन्नुम है जिसमें झोंकने का वायदा खुदा ने काफ़िरों से किया है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَعْرِفُ فِي وُجُوهِهِمُ الْمُنكَرَ: तुम उनके चेहरों पर इनकार और नाराज़गी के निशान साफ़ देखते हो।
  • يَسْطُونَ: वे हमला करने और प्रहार करने पर उतारू हो जाते हैं।
  • أَفَأُنَبِّئُكُم: क्या मैं तुम्हें बताऊँ?
  • بِشَرٍّ مِّن ذَٰلِكُمُ: उस चीज़ से भी बदतर जो तुम्हें अभी नागवार गुज़री है।
  • الْمَصِيرُ: अंतिम ठिकाना और लौटने की जगह।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब इन काफ़िरों के सामने हमारी स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, तो तुम उनके चेहरों पर साफ़ देख सकते हो कि वे कितनी नफ़रत और इनकार की भावना से भरे हुए हैं। उनके चेहरे बिगड़ जाते हैं, त्योरी चढ़ जाती है और वे ऐसे लगते हैं जैसे किसी भी वक़्त उन मोमिनों पर टूट पड़ेंगे जो उन्हें अल्लाह की आयतें सुना रहे हैं। उनका ग़ुस्सा इतना सख़्त होता है कि वे मुश्किल से ख़ुद को रोक पाते हैं।

अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि इन काफ़िरों से कहो: "क्या मैं तुम्हें उस चीज़ की ख़बर दूँ जो इससे भी बदतर है जो तुम्हें आज नागवार गुज़री? वह है आग — यानी जहन्नुम की आग — जिसका अल्लाह ने काफ़िरों से वादा किया है। और वह कितना बुरा ठिकाना है!"

यानी जो नाराज़गी और ग़ुस्सा तुम आज क़ुरआन सुनकर महसूस कर रहे हो, वह तो बस एक पल की बात है, लेकिन जो अज़ाब तुम्हारे लिए तैयार किया गया है, वह हमेशा का है। यह दुनिया की तकलीफ़ उस आख़िरत की तकलीफ़ के सामने कुछ भी नहीं।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को सुनना और उस पर अमल करना कितनी बड़ी नेमत है। जो लोग सच्चाई से मुँह मोड़ते हैं और उसके दावत देने वालों से नफ़रत करते हैं, वह नफ़रत दरअसल उनके अपने नुक़सान का सबब बनती है। अल्लाह तआला ने हम पर बड़ा एहसान किया है कि हमें क़ुरआन जैसी हिदायत की किताब दी, जो हमें अंधेरों से निकालकर रोशनी की तरफ़ लाती है।

इस आयत से हमें यह भी सबक़ मिलता है कि हम कभी सच्चाई के दुश्मन न बनें, बल्कि हमेशा दिल खोलकर हक़ को क़बूल करें। और अगर कोई हमें अल्लाह की याद दिलाए, तो हमें नाराज़ नहीं होना चाहिए, बल्कि शुक्रगुज़ार होना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें जहन्नुम की आग से बचाकर जन्नत की तरफ़ ले जाता है। अल्लाह हम सबको सच्चाई को क़बूल करने और उस पर साबित क़दम रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 70-74 — अल-हज

70أَلَمْ تَعْلَمْ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۗ إِنَّ ذَٰلِكَ فِي كِتَابٍ ۚ إِنَّ ذَٰلِكَ عَلَى اللَّهِ يَسِيرٌ
(ऐ रसूल) क्या तुम नहीं जानते कि जो कुछ आसमान और ज़मीन में है खुदा यक़ीनन जानता है उसमें तो शक नहीं कि ये सब (बातें) किताब (लौहे महफूज़) में (लिखी हुईमौजूद) हैं
71وَيَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَمْ يُنَزِّلْ بِهِ سُلْطَانًا وَمَا لَيْسَ لَهُم بِهِ عِلْمٌ ۗ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِن نَّصِيرٍ
बेशक ये (सब कुछ) खुदा पर आसान है और ये लोग खुदा को छोड़कर उन लोगों की इबादत करते हैं जिनके लिए न तो ख़ुदा ही ने कोई सनद नाज़िल की है और न उस (के हक़ होने) का खुद उन्हें इल्म है और क़यामत में तो ज़ालिमों का कोई मददगार भी नहीं होगा
72وَإِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِمْ آيَاتُنَا بَيِّنَاتٍ تَعْرِفُ فِي وُجُوهِ الَّذِينَ كَفَرُوا الْمُنكَرَ ۖ يَكَادُونَ يَسْطُونَ بِالَّذِينَ يَتْلُونَ عَلَيْهِمْ آيَاتِنَا ۗ قُلْ أَفَأُنَبِّئُكُم بِشَرٍّ مِّن ذَٰلِكُمُ ۗ النَّارُ وَعَدَهَا اللَّهُ الَّذِينَ كَفَرُوا ۖ وَبِئْسَ الْمَصِيرُ
और (ऐ रसूल) जब हमारी वाज़ेए व रौशन आयतें उनके सामने पढ़ कर सुनाई जाती हैं तो तुम (उन) काफिरों के चेहरों पर नाखुशी के (आसार) देखते हो (यहाँ तक कि) क़रीब होता है कि जो लोग उनको हमारी आयातें पढ़कर सुनाते हैं उन पर ये लोग हमला कर बैठे (ऐ रसूल) तुम कह दो (कि) तो क्या मैं तुम्हें इससे भी कहीं बदतर चीज़ बता दूँ (अच्छा) तो सुन लो वह जहन्नुम है जिसमें झोंकने का वायदा खुदा ने काफ़िरों से किया है
73يَا أَيُّهَا النَّاسُ ضُرِبَ مَثَلٌ فَاسْتَمِعُوا لَهُ ۚ إِنَّ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ لَن يَخْلُقُوا ذُبَابًا وَلَوِ اجْتَمَعُوا لَهُ ۖ وَإِن يَسْلُبْهُمُ الذُّبَابُ شَيْئًا لَّا يَسْتَنقِذُوهُ مِنْهُ ۚ ضَعُفَ الطَّالِبُ وَالْمَطْلُوبُ
और वह क्या बुरा ठिकाना है लोगों एक मसल बयान की जाती है तो उसे कान लगा के सुनो कि खुदा को छोड़कर जिन लोगों को तुम पुकारते हो वह लोग अगरचे सब के सब इस काम के लिए इकट्ठे भी हो जाएँ तो भी एक मक्खी तक पैदा नहीं कर सकते और कहीं मक्खी कुछ उनसे छीन ले जाए तो उससे उसको छुड़ा नहीं सकते (अजब लुत्फ है) कि माँगने वाला (आबिद) और जिससे माँग लिया (माबूद) दोनों कमज़ोर हैं
74مَا قَدَرُوا اللَّهَ حَقَّ قَدْرِهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَقَوِيٌّ عَزِيزٌ
खुदा की जैसे क़द्र करनी चाहिए उन लोगों ने न की इसमें शक नहीं कि खुदा तो बड़ा ज़बरदस्त ग़ालिब है
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अनुवाद — अल-हज 72

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Tuesday, August 18, 2026

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