Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَعْرِفُ فِي وُجُوهِهِمُ الْمُنكَرَ: तुम उनके चेहरों पर इनकार और नाराज़गी के निशान साफ़ देखते हो।
- يَسْطُونَ: वे हमला करने और प्रहार करने पर उतारू हो जाते हैं।
- أَفَأُنَبِّئُكُم: क्या मैं तुम्हें बताऊँ?
- بِشَرٍّ مِّن ذَٰلِكُمُ: उस चीज़ से भी बदतर जो तुम्हें अभी नागवार गुज़री है।
- الْمَصِيرُ: अंतिम ठिकाना और लौटने की जगह।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब इन काफ़िरों के सामने हमारी स्पष्ट आयतें पढ़ी जाती हैं, तो तुम उनके चेहरों पर साफ़ देख सकते हो कि वे कितनी नफ़रत और इनकार की भावना से भरे हुए हैं। उनके चेहरे बिगड़ जाते हैं, त्योरी चढ़ जाती है और वे ऐसे लगते हैं जैसे किसी भी वक़्त उन मोमिनों पर टूट पड़ेंगे जो उन्हें अल्लाह की आयतें सुना रहे हैं। उनका ग़ुस्सा इतना सख़्त होता है कि वे मुश्किल से ख़ुद को रोक पाते हैं।
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि इन काफ़िरों से कहो: "क्या मैं तुम्हें उस चीज़ की ख़बर दूँ जो इससे भी बदतर है जो तुम्हें आज नागवार गुज़री? वह है आग — यानी जहन्नुम की आग — जिसका अल्लाह ने काफ़िरों से वादा किया है। और वह कितना बुरा ठिकाना है!"
यानी जो नाराज़गी और ग़ुस्सा तुम आज क़ुरआन सुनकर महसूस कर रहे हो, वह तो बस एक पल की बात है, लेकिन जो अज़ाब तुम्हारे लिए तैयार किया गया है, वह हमेशा का है। यह दुनिया की तकलीफ़ उस आख़िरत की तकलीफ़ के सामने कुछ भी नहीं।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को सुनना और उस पर अमल करना कितनी बड़ी नेमत है। जो लोग सच्चाई से मुँह मोड़ते हैं और उसके दावत देने वालों से नफ़रत करते हैं, वह नफ़रत दरअसल उनके अपने नुक़सान का सबब बनती है। अल्लाह तआला ने हम पर बड़ा एहसान किया है कि हमें क़ुरआन जैसी हिदायत की किताब दी, जो हमें अंधेरों से निकालकर रोशनी की तरफ़ लाती है।
इस आयत से हमें यह भी सबक़ मिलता है कि हम कभी सच्चाई के दुश्मन न बनें, बल्कि हमेशा दिल खोलकर हक़ को क़बूल करें। और अगर कोई हमें अल्लाह की याद दिलाए, तो हमें नाराज़ नहीं होना चाहिए, बल्कि शुक्रगुज़ार होना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें जहन्नुम की आग से बचाकर जन्नत की तरफ़ ले जाता है। अल्लाह हम सबको सच्चाई को क़बूल करने और उस पर साबित क़दम रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 70-74 — सूरा अल-हज
अनुवाद — अल-हज 72
सूरा अल-हज आयत 72 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) जब हमारी वाज़ेए व रौशन आयतें उनके…सूरा आयत 72/78 — सूरा अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हज सुनें, सूरा अल-हज अनुवाद, सूरा अल-हज mp3, सूरा अल-हज pdf. आयत 70–74. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


