Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ضُرِبَ مَثَلٌ: एक उदाहरण प्रस्तुत किया गया।
- فَاسْتَمِعُوا لَهُ: उसे ध्यान से सुनो।
- يَسْلُبْهُمُ: उनसे छीन ले।
- يَسْتَنْقِذُوهُ: उसे बचा लें।
- الطَّالِبُ: माँगने वाला / चाहने वाला।
- الْمَطْلُوبُ: जिससे माँगा जाए।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ लोगों! अल्लाह तआला ने तुम्हारे सामने एक बहुत ही स्पष्ट और रोशन उदाहरण पेश किया है, इसे ध्यान से सुनो और इस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करो। यह उदाहरण उन माबूदों (पूज्यों) के बारे में है जिन्हें तुम अल्लाह को छोड़कर पुकारते हो और उनकी इबादत करते हो। चाहे वे मूर्तियाँ हों, पत्थर हों, या कोई और चीज़ें — वे सब मिलकर भी एक छोटी सी मक्खी पैदा नहीं कर सकते, भले ही वे सब इकट्ठे हो जाएँ और एक-दूसरे की मदद करें। जब वे एक मक्खी भी नहीं बना सकते, तो फिर वे आकाश और धरती जैसी महान चीज़ें कैसे बना सकते हैं?
और यही नहीं, अगर एक मक्खी उन चीज़ों में से कुछ भी छीन ले — जैसे उन पर लगा हुआ इत्र या खाने का कोई टुकड़ा — तो वे उस मक्खी से उसे वापस नहीं छुड़ा सकते। यानी वे इतने कमज़ोर हैं कि एक मक्खी के सामने भी बेबस हैं। अब सोचो, जो चीज़ एक मक्खी से भी कमज़ोर हो, वह तुम्हारी इबादत की हक़दार कैसे हो सकती है?
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि "कमज़ोर है माँगने वाला और कमज़ोर है वह जिससे माँगा जाए" — यानी जो इंसान इन माबूदों से मदद माँगता है, वह भी कमज़ोर है, और जिससे माँगा जाता है (वह मूर्ति या माबूद) वह भी कमज़ोर है। दोनों ही असमर्थ हैं। तो फिर ऐसे कमज़ोर और बेबस चीज़ों को अल्लाह का साझी कैसे बनाया जाए?
यह उदाहरण हमें सिखाता है कि सिर्फ़ अल्लाह ही सच्चा माबूद है, जो हर चीज़ का ख़ालिक़ (रचने वाला) है, हर चीज़ पर क़ादिर (सामर्थ्यवान) है। उसके सिवा जो भी है, वह कमज़ोर और असमर्थ है। इसलिए अपनी ज़िंदगी को सिर्फ़ अल्लाह की इबादत के लिए समर्पित करो, और उसी से मदद माँगो। यही तुम्हारी कामयाबी और नजात (मुक्ति) का रास्ता है। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है, वह अपने बंदों को सीधा रास्ता दिखाना चाहता है, ताकि वे दुनिया और आख़िरत में सफल हों।
📜 आयत 71-75 — सूरा अल-हज
अनुवाद — अल-हज 73
सूरा अल-हज आयत 73 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह क्या बुरा ठिकाना है लोगों एक मसल बयान…सूरा आयत 73/78 — सूरा अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हज सुनें, सूरा अल-हज अनुवाद, सूरा अल-हज mp3, सूरा अल-हज pdf. आयत 71–75. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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