Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ (معاني الكلمات):
- सुल्तान: प्रमाण, तर्क, या कोई ऐसा आधार जो किसी चीज़ की वैधता साबित करे।
- ज़ालिमीन: अत्याचारी, यहाँ अर्थ है मुशरिक (बहुदेववादी) जो अल्लाह पर झूठ बोलते हैं और उसकी इबादत में दूसरों को शामिल करते हैं।
- नसीर: मददगार, सहायक, या बचाने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों की हालत बयान करती है जो अल्लाह को छोड़कर दूसरी चीज़ों की पूजा करते हैं। ये लोग ऐसी चीज़ों को पूजते हैं जिनके लिए न तो अल्लाह ने कोई सनद या प्रमाण उतारा है और न ही उनके पास कोई ज्ञान या तर्क है जो उनकी इस पूजा को सही साबित कर सके। उनका यह काम पूरी तरह अज्ञानता और अंधानुकरण पर आधारित है—वे बस अपने बुज़ुर्गों की परंपरा पर चल रहे हैं, बिना यह जाने कि यह सही है या गलत।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि इन लोगों ने जो रास्ता अपनाया है, उसके पक्ष में न तो कोई वह़ी (ईश्वरीय आदेश) है और न ही कोई तर्कसंगत ज्ञान। वे सिर्फ़ अपनी मनमर्ज़ी और पूर्वजों की नक़ल पर चल रहे हैं। यह उनका ज़ुल्म (अत्याचार) है कि वे अल्लाह की इबादत के बजाय उसके सिवा दूसरों को पूजते हैं, और इस ज़ुल्म की सज़ा उन्हें ज़रूर मिलेगी।
आयत के अंत में अल्लाह फ़रमाता है कि ऐसे ज़ालिमों (अत्याचारियों) का कोई मददगार नहीं होगा। क़ियामत के दिन जब वे अल्लाह के सामने खड़े होंगे और उन पर अज़ाब (दंड) नाज़िल होगा, तो कोई उन्हें बचाने वाला नहीं होगा। न उनके देवता काम आएँगे, न उनके पूर्वज, न उनकी संपत्ति या संतान। वे बिल्कुल अकेले और असहाय होंगे।
दावती पहलू (शिक्षाप्रद संदेश):
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सच्चाई की याद दिलाती है—कि इबादत (पूजा) केवल अल्लाह की हक़ है, और उसके सिवा किसी और को पूजना न केवल बुद्धिमत्ता के ख़िलाफ़ है, बल्कि यह एक ऐसा ज़ुल्म है जिसकी सज़ा बहुत भयानक है। इस्लाम हमें सिखाता है कि हम अपने जीवन में हर काम तर्क, ज्ञान और प्रमाण के आधार पर करें, ख़ासकर इबादत जैसे पवित्र मामले में। अल्लाह ने हमें अक़्ल (बुद्धि) दी है ताकि हम सच्चाई को समझें और अंधानुकरण से बचें।
जो लोग सच्चाई की तलाश करते हैं, अल्लाह उन्हें सही रास्ता दिखाता है। क़ुरआन और सुन्नत में हर उस चीज़ का प्रमाण मौजूद है जो हमें सही रास्ते पर चलाती है। यदि हम अपनी अक़्ल का इस्तेमाल करें और अल्लाह की नाज़िल की हुई हिदायत को अपनाएँ, तो हम उन लोगों में से नहीं होंगे जिनका कोई मददगार नहीं होगा। बल्कि हम उन लोगों में से होंगे जिन्हें अल्लाह की रहमत और मदद हासिल होगी। यही सबसे बड़ी सफलता है—अल्लाह की इबादत करना और उसके दिखाए रास्ते पर चलना, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है।
📜 आयत 69-73 — सूरा अल-हज
अनुवाद — अल-हज 71
सूरा अल-हज आयत 71 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक ये (सब कुछ) खुदा पर आसान है और ये…सूरा आयत 71/78 — सूरा अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हज सुनें, सूरा अल-हज अनुवाद, सूरा अल-हज mp3, सूरा अल-हज pdf. आयत 69–73. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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