अल-मोमिनुन · 29/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
وَقُل رَّبِّ أَنزِلْنِي مُنزَلًا مُّبَارَكًا وَأَنتَ خَيْرُ الْمُنزِلِينَ ۝٢٩
Wa qur Rabbi anzilnee munzalam mubaarakanw wa Anta khairul munzileen
📖 हिंदी अर्थ
और दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले तू मुझको (दरख्त के पानी की) बा बरकत जगह में उतारना और तू तो सब उतारने वालो ंसे बेहतर है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मुन्ज़लन – उतरने की जगह, उतारने का स्थान
  • मुबारक – बरकत वाला, जिसमें भलाई और कल्याण हो
  • ख़ैरुल मुन्ज़िलीन – उतारने वालों में सबसे अच्छा

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने नबी नूह (अलैहिस्सलाम) को सिखाया कि जब वे कश्ती से उतरें तो यह दुआ पढ़ें: "ऐ मेरे रब! मुझे बरकत वाली जगह उतार, और तू ही सबसे अच्छा उतारने वाला है।"

यह दुआ सिर्फ़ नूह (अलैहिस्सलाम) के लिए नहीं थी, बल्कि अल्लाह ने अपने सभी बंदों को यह सिखाया है कि जब भी वे किसी नई जगह पर उतरें, सफ़र से वापस आएँ, या किसी नई मंज़िल पर पहुँचें, तो यह दुआ पढ़ें। इस दुआ में तीन बड़ी बातें हैं:

पहली: अल्लाह से अच्छी जगह और अच्छे हालात की दुआ करना। "मुन्ज़लन मुबारक" यानी ऐसी जगह जहाँ रहने में बरकत हो, आराम हो, सुरक्षा हो, और जो इंसान के लिए फ़ायदेमंद हो।

दूसरी: अल्लाह की तारीफ़ करना कि वह सबसे अच्छा उतारने वाला है। यानी जो अल्लाह जिस जगह उतारता है, वही सबसे अच्छी जगह होती है। इंसान चाहे कितनी भी अच्छी जगह चुने, अल्लाह की चुनी हुई जगह से बेहतर नहीं हो सकती।

तीसरी: यह दुआ इंसान को अल्लाह पर भरोसा करना सिखाती है। जब इंसान यह दुआ पढ़ता है, तो उसे यक़ीन होता है कि अल्लाह उसे हर बुराई से बचाएगा और उसके काम में बरकत देगा।

यह दुआ हमें सिखाती है कि हर काम की शुरुआत अल्लाह के नाम से करें और उससे भलाई की उम्मीद रखें। जो इंसान इस दुआ को पढ़ता है, अल्लाह उसके सफ़र को बरकत वाला बनाता है, उसके घर को सुकून वाला बनाता है, और उसके कामों में भलाई डालता है।

प्यारे भाइयो और बहनों! यह दुआ हमारे लिए बहुत बड़ी नेमत है। आइए, हम इसे अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ। जब भी कहीं जाएँ, नई जगह पर उतरें, या अपने घर में दाख़िल हों, तो यह दुआ पढ़ें। यह दुआ हमारे लिए सुरक्षा, बरकत और अल्लाह की रहमत का ज़रिया बनेगी। अल्लाह हम सबको अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 27-31 — सूरा अल-मोमिनुन

27فَأَوْحَيْنَا إِلَيْهِ أَنِ اصْنَعِ الْفُلْكَ بِأَعْيُنِنَا وَوَحْيِنَا فَإِذَا جَاءَ أَمْرُنَا وَفَارَ التَّنُّورُ ۙ فَاسْلُكْ فِيهَا مِن كُلٍّ زَوْجَيْنِ اثْنَيْنِ وَأَهْلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيْهِ الْقَوْلُ مِنْهُمْ ۖ وَلَا تُخَاطِبْنِي فِي الَّذِينَ ظَلَمُوا ۖ إِنَّهُم مُّغْرَقُونَ
इस वजह से कि उन लोगों ने मुझे झुठला दिया तो हमने नूह के पास 'वही' भेजी कि तुम हमारे सामने हमारे हुक्म के मुताबिक़ कश्ती बनाना शुरु करो फिर जब कल हमारा अज़ाब आ जाए और तन्नूर (से पानी) उबलने लगे तो तुम उसमें हर किस्म (के जानवरों में) से (नर मादा) दो दो का जोड़ा और अपने लड़के बालों को बिठा लो मगर उन में से जिसकी निस्बत (ग़रक़ होने का) पहले से हमारा हुक्म हो चुका है (उन्हें छोड़ दो) और जिन लोगों ने (हमारे हुकम से) सरकशी की है उनके बारे में मुझसे कुछ कहना (सुनना) नहीं क्योंकि ये लोग यकीनन डूबने वाले है
28فَإِذَا اسْتَوَيْتَ أَنتَ وَمَن مَّعَكَ عَلَى الْفُلْكِ فَقُلِ الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي نَجَّانَا مِنَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
ग़रज़ जब तुम अपने हमराहियों के साथ कश्ती पर दुरुस्त बैठो तो कहो तमाम हम्दो सना की सज़ावार खुदा ही है जिसने हमको ज़ालिम लोगों से नजात दी
29وَقُل رَّبِّ أَنزِلْنِي مُنزَلًا مُّبَارَكًا وَأَنتَ خَيْرُ الْمُنزِلِينَ
और दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले तू मुझको (दरख्त के पानी की) बा बरकत जगह में उतारना और तू तो सब उतारने वालो ंसे बेहतर है
30إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ وَإِن كُنَّا لَمُبْتَلِينَ
इसमें शक नहीं कि हसमें (हमारी क़ुदरत की) बहुत सी निशानियाँ हैं और हमको तो बस उनका इम्तिहान लेना मंज़ूर था
31ثُمَّ أَنشَأْنَا مِن بَعْدِهِمْ قَرْنًا آخَرِينَ
फिर हमने उनके बाद एक और क़ौम को (समूद) को पैदा किया
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
29आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 29

सूरा अल-मोमिनुन आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले तू मुझको…

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Thursday, October 1, 2026

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