अल-मोमिनुन · 30/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ وَإِن كُنَّا لَمُبْتَلِينَ ۝٣٠
Inna fee zaalika la Aayaatinw wa in kunnaa lamubtaleen
📖 हिंदी अर्थ
इसमें शक नहीं कि हसमें (हमारी क़ुदरत की) बहुत सी निशानियाँ हैं और हमको तो बस उनका इम्तिहान लेना मंज़ूर था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَآيَاتٍ – निशानियाँ, सबक, सीखने योग्य बातें।
  • لَمُبْتَلِينَ – हम परीक्षा लेने वाले थे, आज़माने वाले थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम के साथ जो कुछ हुआ – उन्हें नजात देना और काफ़िरों को डुबो देना – इसमें लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ और सबक हैं। यह घटना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) असीम है, वह अपने नबियों की मदद करता है और उन्हें झुठलाने वालों को तबाह कर देता है। यह उन लोगों के लिए एक बड़ी सीख है जो अल्लाह के रसूलों पर ईमान नहीं लाते।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम अपने बंदों की परीक्षा लेते हैं – उनके पास रसूल भेजकर, ताकि सामने आ जाए कि कौन सच्चे दिल से ईमान लाता है और कौन नाफ़रमानी करता है। यह परीक्षा अल्लाह की सुन्नत (रीति) है जो हमेशा से चली आ रही है। जो लोग इस परीक्षा में कामयाब होते हैं, उनके लिए जन्नत की खुशखबरी है, और जो नाकाम होते हैं, उनके लिए अज़ाब का डर है।

यह आयत हमें सिखाती है कि इस दुनिया की ज़िंदगी इम्तिहान (परीक्षा) की जगह है। अल्लाह हमें अपने हुक्म मानने और अपने रसूल की पैरवी करने की तौफ़ीक़ दे। हमें नूह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम के हालात से सबक लेना चाहिए कि अल्लाह की नाफ़रमानी का अंजाम बहुत बुरा होता है, और उसकी फ़रमाबरदारी ही कामयाबी की कुंजी है। याद रखिए, अल्लाह हर हाल में हमारे साथ है, बशर्ते हम उसकी राह पर चलें और उसके दीन को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ। यही सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 28-32 — अल-मोमिनुन

28فَإِذَا اسْتَوَيْتَ أَنتَ وَمَن مَّعَكَ عَلَى الْفُلْكِ فَقُلِ الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي نَجَّانَا مِنَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ
ग़रज़ जब तुम अपने हमराहियों के साथ कश्ती पर दुरुस्त बैठो तो कहो तमाम हम्दो सना की सज़ावार खुदा ही है जिसने हमको ज़ालिम लोगों से नजात दी
29وَقُل رَّبِّ أَنزِلْنِي مُنزَلًا مُّبَارَكًا وَأَنتَ خَيْرُ الْمُنزِلِينَ
और दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले तू मुझको (दरख्त के पानी की) बा बरकत जगह में उतारना और तू तो सब उतारने वालो ंसे बेहतर है
30إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ وَإِن كُنَّا لَمُبْتَلِينَ
इसमें शक नहीं कि हसमें (हमारी क़ुदरत की) बहुत सी निशानियाँ हैं और हमको तो बस उनका इम्तिहान लेना मंज़ूर था
31ثُمَّ أَنشَأْنَا مِن بَعْدِهِمْ قَرْنًا آخَرِينَ
फिर हमने उनके बाद एक और क़ौम को (समूद) को पैदा किया
32فَأَرْسَلْنَا فِيهِمْ رَسُولًا مِّنْهُمْ أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ أَفَلَا تَتَّقُونَ
और हमने उनही में से (एक आदमी सालेह को) रसूल बनाकर उन लोगों में भेजा (और उन्होंने अपनी क़ौम से कहा) कि खुदा की इबादत करो उसके सिवा कोई तुम्हारा माबूद नहीं तो क्या तुम (उससे डरते नही हो)
अल-मोमिनुनकुरान सूची
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मक्कीRevelation
30आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 30

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Tuesday, August 18, 2026

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