अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- اسْتَوَيْتَ – तुम सवार होकर अच्छी तरह बैठ जाओ, स्थिर हो जाओ।
- الْفُلْك – नाव या जहाज़।
- نَجَّانَا – हमें बचा लिया, मुक्ति दिला दी।
- الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ – अत्याचारी लोग, यहाँ अर्थ है काफ़िरों से, जिन्होंने अल्लाह पर ईमान नहीं लाया और अपने नबी को झुठलाया।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह तआला ने हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) को हुक्म दिया कि वे अपने साथ ईमान लाने वालों को लेकर नाव में सवार हो जाएँ, और तूफ़ान आ गया, पानी हर तरफ़ फैल गया, तो अल्लाह ने उन्हें हिदायत दी कि जब तुम और तुम्हारे साथी नाव पर अच्छी तरह सवार हो जाओ और वह पानी पर चलने लगे, तो उस वक़्त अल्लाह का शुक्र अदा करो और यह दुआ पढ़ो: "सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है जिसने हमें ज़ालिम क़ौम से नजात दी।"
यह सिखाया गया कि मुसीबत से निकलने और अल्लाह की रहमत से बच निकलने पर सबसे पहले अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए। यह सिर्फ़ नूह (अलैहिस्सलाम) के लिए नहीं था, बल्कि हर मोमिन के लिए यही तरीक़ा है — जब अल्लाह किसी मुसीबत, बीमारी, ख़तरे या दुश्मन के ज़ुल्म से बचा लेता है, तो उसका शुक्रिया अदा करना चाहिए और उसकी तारीफ़ करनी चाहिए।
इस आयत में एक बड़ी नसीहत है कि अल्लाह के नबी भी जब ख़तरे से बचे, तो उन्होंने अल्लाह की तारीफ़ की — हमें भी चाहिए कि हर नेमत और हर बचाव पर अल्लाह का शुक्र अदा करें। यह शुक्र सिर्फ़ ज़बान से नहीं, बल्कि दिल से और अपने अमल से भी करें — यानी अल्लाह की इबादत करें, उसके हुक्म मानें और उसकी नाफ़रमानी से बचें।
यह आयत हमें सिखाती है कि जब भी कोई मुश्किल आए, तो अल्लाह पर भरोसा रखें, और जब वह मुश्किल दूर हो जाए, तो उसका शुक्र अदा करें। यही मोमिन की पहचान है — वह हर हाल में अल्लाह को याद रखता है, तकलीफ़ में सब्र करता है और राहत में शुक्र करता है। अल्लाह तआला हम सबको यह तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 26-30 — अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 28
सूरा अल-मोमिनुन आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ जब तुम अपने हमराहियों के साथ कश्ती पर दुरुस्त…सूरा आयत 28/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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