अन-नूर · 19/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
إِنَّ الَّذِينَ يُحِبُّونَ أَن تَشِيعَ الْفَاحِشَةُ فِي الَّذِينَ آمَنُوا لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ ۝١٩
Innal lazeena yuhibboona an tashee`al faahishatu fil lazeena aamanoo lahum `azaabun aleemun fid dunyaa wal Aakhirah; wallaahu ya`lamu wa antum laa ta`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
जो लोग ये चाहते हैं कि ईमानदारों में बदकारी का चर्चा फैल जाए बेशक उनके लिए दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब है और ख़ुदा (असल हाल को) ख़ूब जानता है और तुम लोग नहीं जानते हो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَشِيعَ – फैलना, प्रचलित होना
  • الْفَاحِشَةُ – अश्लीलता, बुराई, व्यभिचार का आरोप
  • أَلِيمٌ – दर्दनाक, पीड़ादायक

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो चाहते हैं कि ईमानवालों के बीच अश्लीलता और बुराई फैले, विशेषकर पवित्र लोगों पर व्यभिचार जैसे गंभीर आरोप लगाए जाएं। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह ने दोहरी सज़ा का ऐलान किया है — एक इस दुनिया में और दूसरी आख़िरत में। दुनिया में उन्हें कोड़े लगाने की सज़ा दी जाएगी (जैसा कि क़ज़्फ़ यानी झूठे आरोप लगाने की हद है), और आख़िरत में उनके लिए जहन्नुम की आग है, बशर्ते वे तौबा न करें।

यह आयत उस ऐतिहासिक घटना के संदर्भ में उतरी जब मुनाफ़िक़ों ने उम्मुल मोमिनीन हज़रत आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) पर झूठा आरोप लगाया था। अल्लाह ने इस आयत में उन लोगों को सख़्त चेतावनी दी जो ईमानवालों के बारे में बुराई फैलाना पसंद करते हैं।

इस आयत का सबक यह है कि एक मुसलमान को कभी भी किसी के बारे में बुराई फैलाने, झूठे आरोप लगाने या किसी की इज़्ज़त को ठेस पहुंचाने में खुशी नहीं माननी चाहिए। इस्लाम सिखाता है कि किसी की इज़्ज़त अल्लाह के यहाँ बहुत कीमती है, और जो लोग दूसरों की इज़्ज़त से खिलवाड़ करते हैं, वे अल्लाह की नज़र में सख़्त गुनाहगार हैं।

आयत के अंत में अल्लाह फ़रमाता है: "अल्लाह जानता है और तुम नहीं जानते।" यानी अल्लाह को हर चीज़ का पूरा इल्म है — वह जानता है कि कौन सच्चा है और कौन झूठा, कौन पाक है और कौन नापाक। इंसान अक्सर सतही बातों से धोखा खा जाता है, लेकिन अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है। इसलिए हमें जल्दबाज़ी में फैसले नहीं करने चाहिए और न ही दूसरों के बारे में बुरी राय रखनी चाहिए।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपनी ज़ुबान को काबू में रखना चाहिए, क्योंकि ज़ुबान का इस्तेमाल अल्लाह की इबादत और अच्छी बातों के लिए होना चाहिए, न कि दूसरों को बदनाम करने के लिए। जो लोग इस दुनिया में दूसरों की इज़्ज़त तार-तार करते हैं, उन्हें क़यामत के दिन अपनी इस हरकत का बुरा अंजाम भुगतना पड़ेगा।

इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें अपने समाज को पाक और साफ रखने की कोशिश करनी चाहिए, और अगर किसी के बारे में कोई बुरी बात सुनें तो उसे फैलाने के बजाय उसे दबा देना चाहिए। अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो दूसरों की इज़्ज़त की हिफ़ाज़त करते हैं और समाज में अच्छाई फैलाते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 17-21 — अन-नूर

17يَعِظُكُمُ اللَّهُ أَن تَعُودُوا لِمِثْلِهِ أَبَدًا إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
ख़ुदा तुम्हारी नसीहत करता है कि अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो ख़बरदार फिर कभी ऐसा न करना
18وَيُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآيَاتِ ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और ख़ुदा तुम से (अपने) एहकाम साफ साफ बयान करता है और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हकीम है
19إِنَّ الَّذِينَ يُحِبُّونَ أَن تَشِيعَ الْفَاحِشَةُ فِي الَّذِينَ آمَنُوا لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
जो लोग ये चाहते हैं कि ईमानदारों में बदकारी का चर्चा फैल जाए बेशक उनके लिए दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब है और ख़ुदा (असल हाल को) ख़ूब जानता है और तुम लोग नहीं जानते हो
20وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ وَأَنَّ اللَّهَ رَءُوفٌ رَّحِيمٌ
और अगर ये बात न होती कि तुम पर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी रहमत से और ये कि ख़ुदा (अपने बन्दों पर) बड़ा शफीक़ मेहरबान है
21۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَتَّبِعُوا خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ ۚ وَمَن يَتَّبِعْ خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ فَإِنَّهُ يَأْمُرُ بِالْفَحْشَاءِ وَالْمُنكَرِ ۚ وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ مَا زَكَىٰ مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ أَبَدًا وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يُزَكِّي مَن يَشَاءُ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
(तो तुम देखते क्या होता) ऐ ईमानदारों शैतान के क़दम ब क़दम न चलो और जो शख्स शैतान के क़दम ब क़दम चलेगा तो वह यक़ीनन उसे बदकारी और बुरी बात (करने) का हुक्म देगा और अगर तुम पर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी रहमत न होती तो तुममें से कोई भी कभी पाक साफ न होता मगर ख़ुदा तो जिसे चहता है पाक साफ कर देता है और ख़ुदा बड़ा सुनने वाला वाकिफकार है
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अनुवाद — अन-नूर 19

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Tuesday, August 18, 2026

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