अन-नूर · 18/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
وَيُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآيَاتِ ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ ۝١٨
Wa yubaiyinul laahu lakumul Aayaat; wallaahu `Aleemun Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा तुम से (अपने) एहकाम साफ साफ बयान करता है और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हकीम है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُبَيِّنُ: स्पष्ट करता है, खोलकर बताता है।
  • الْآيَاتِ: निशानियाँ, आदेश, निषेध और शिक्षापूर्ण बातें।
  • عَلِيمٌ: सब कुछ जानने वाला, हर बात से अवगत।
  • حَكِيمٌ: पूर्ण ज्ञान और तत्वदर्शिता के साथ हर काम करने वाला, अपनी व्यवस्था और आदेशों में परिपूर्ण।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने बंदों पर असीम कृपा करता है और अपनी आयतों (निशानियों) को स्पष्ट रूप से बयान करता है, जिनमें शरीयत के आदेश और निषेध, हलाल-हराम के नियम, और जीवन के हर पहलू के लिए मार्गदर्शन शामिल है। ये आयतें केवल कानून ही नहीं, बल्कि नसीहत और रहमत भी हैं, ताकि इंसान अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की मर्ज़ी के अनुसार ढाल सके और भटकाव से बच सके।

अल्लाह عَلِيمٌ है—वह हर इंसान के अंदर की बात, उसके इरादों और उसके कर्मों से पूरी तरह वाकिफ है। कोई भी बात उससे छिपी नहीं है, चाहे वह दिल में हो या ज़ुबान पर, चाहे वह अकेले में हो या भीड़ में। वह حَكِيمٌ है—उसका हर फैसला, हर आदेश और हर व्यवस्था पूर्ण ज्ञान और तत्वदर्शिता पर आधारित है। वह जो कुछ भी करता है, उसमें गहरी समझदारी और बेहतरीन मसलहत (भलाई) होती है।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने बंदों को यह भरोसा दिलाता है कि वह उनके साथ अत्यंत दयालु और मेहरबान है। वह अपने आदेशों को स्पष्ट करता है ताकि लोगों को कोई संदेह न रहे और वे सीधे रास्ते पर चल सकें। साथ ही, यह भी संकेत है कि अल्लाह हर मामले में न्याय करेगा—चाहे वह किसी की इज़्ज़त से जुड़ा हो या उसके कर्मों से। जैसे इस आयत के पहले के संदर्भ में अल्लाह ने सच्चे और निर्दोष लोगों की पाकी (पवित्रता) का फैसला सुनाया, वैसे ही वह हर सच्चे बंदे की इज़्ज़त की रक्षा करता है और झूठे आरोप लगाने वालों को सज़ा देता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अल्लाह के आदेशों को समझने और उन पर अमल करने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि वही हमारा सबसे बड़ा मार्गदर्शक है। अल्लाह की आयतें हमारे लिए रोशनी हैं, जो अंधेरों से निकालकर सच्चाई की ओर ले जाती हैं। जो इन आयतों को अपनाता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होता है। अल्लाह हमें अपनी आयतों को समझने और उन पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 16-20 — अन-नूर

16وَلَوْلَا إِذْ سَمِعْتُمُوهُ قُلْتُم مَّا يَكُونُ لَنَا أَن نَّتَكَلَّمَ بِهَٰذَا سُبْحَانَكَ هَٰذَا بُهْتَانٌ عَظِيمٌ
और जब तुमने ऐसी बात सुनी थी तो तुमने लोगों से क्यों न कह दिया कि हमको ऐसी बात मुँह से निकालनी मुनासिब नहीं सुबहान अल्लाह ये बड़ा भारी बोहतान है
17يَعِظُكُمُ اللَّهُ أَن تَعُودُوا لِمِثْلِهِ أَبَدًا إِن كُنتُم مُّؤْمِنِينَ
ख़ुदा तुम्हारी नसीहत करता है कि अगर तुम सच्चे ईमानदार हो तो ख़बरदार फिर कभी ऐसा न करना
18وَيُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآيَاتِ ۚ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और ख़ुदा तुम से (अपने) एहकाम साफ साफ बयान करता है और ख़ुदा तो बड़ा वाक़िफकार हकीम है
19إِنَّ الَّذِينَ يُحِبُّونَ أَن تَشِيعَ الْفَاحِشَةُ فِي الَّذِينَ آمَنُوا لَهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ وَأَنتُمْ لَا تَعْلَمُونَ
जो लोग ये चाहते हैं कि ईमानदारों में बदकारी का चर्चा फैल जाए बेशक उनके लिए दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब है और ख़ुदा (असल हाल को) ख़ूब जानता है और तुम लोग नहीं जानते हो
20وَلَوْلَا فَضْلُ اللَّهِ عَلَيْكُمْ وَرَحْمَتُهُ وَأَنَّ اللَّهَ رَءُوفٌ رَّحِيمٌ
और अगर ये बात न होती कि तुम पर ख़ुदा का फ़ज़ल (व करम) और उसकी रहमत से और ये कि ख़ुदा (अपने बन्दों पर) बड़ा शफीक़ मेहरबान है
अन-नूरकुरान सूची
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अनुवाद — अन-नूर 18

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Tuesday, August 18, 2026

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