अल-फुरकान · 28/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
يَا وَيْلَتَىٰ لَيْتَنِي لَمْ أَتَّخِذْ فُلَانًا خَلِيلًا ۝٢٨
Yaa wailataa laitanee lam attakhiz fulaanan khaleelaa
📖 हिंदी अर्थ
हाए अफसोस काश मै फला शख्स को अपना दोस्त न बनाता
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَا وَيْلَتَى: "हाय मेरी तबाही!" — यह अरबी में पछतावे और अफसोस का वाक्य है, जब कोई व्यक्ति किसी बड़ी मुसीबत या नुकसान को देखता है।
  • لَيْتَنِي: "काश कि मैं..." — यह अफसोस और इच्छा व्यक्त करने के लिए आता है।
  • فُلَانًا: "फलां व्यक्ति" — यहाँ इसका मतलब एक खास काफिर (अविश्वासी) से है, जो इंसान को गुमराह करता है।
  • خَلِيلًا: "दोस्त" या "घनिष्ठ मित्र" — वह दोस्त जो दिल की गहराई से जुड़ा हो।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत क़यामत के दिन के उस भयानक दृश्य को पेश करती है जब ज़ालिम (अपने ऊपर अत्याचार करने वाला) इंसान पछतावे से अपने हाथ काटेगा और चीख-चीख कर कहेगा: "हाय मेरी तबाही! काश मैंने रसूलुल्लाह ﷺ का साथ दिया होता और उनके लाए हुए इस्लाम को अपनाया होता!" वह उस दोस्त को याद करेगा जिसने उसे सच्चे रास्ते से भटकाया था, और अफसोस से कहेगा: "काश मैंने फलां काफिर को अपना घनिष्ठ मित्र नहीं बनाया होता!"

यह वही दोस्त था जिसने उसे क़ुरआन की रोशनी से दूर किया, जबकि हिदायत उसके पास आ चुकी थी। वह उसे बहकाकर गुमराही के अंधेरों में ले गया। यहाँ अल्लाह तआला हमें साफ़ संदेश देते हैं कि शैतान इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है, और वह हमेशा इंसान को नुकसान पहुँचाने की कोशिश में रहता है — दुनिया में भी और आख़िरत में भी वह इंसान को अकेला छोड़ देता है।

दावती पहलू (शिक्षाप्रद संदेश):

इस आयत में हमारे लिए एक बहुत बड़ी सीख है! हमें अपने दोस्तों को बड़ी सोच-समझकर चुनना चाहिए। एक बुरा दोस्त इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में बर्बाद कर सकता है। अच्छे दोस्त वे हैं जो हमें अल्लाह की याद दिलाएँ, नेकी की तरफ बुलाएँ और गुनाह से रोकें। रसूलुल्लाह ﷺ ने भी फरमाया: "इंसान अपने दोस्त के दीन (तरीके) पर होता है, इसलिए तुममें से हर कोई देखे कि वह किसे अपना दोस्त बनाता है।"

आओ हम अपनी ज़िंदगी में ऐसे लोगों को अपना साथी बनाएँ जो हमें जन्नत की राह दिखाएँ, और उन लोगों से दूर रहें जो हमें अल्लाह से दूर करें। याद रखें, क़यामत के दिन का पछतावा कोई काम नहीं आएगा, लेकिन आज हम अपनी मंज़िल खुद चुन सकते हैं — सीधा रास्ता या गुमराही का रास्ता। अल्लाह हमें सच्चे दोस्तों की संगत नसीब करे और हमें गुमराही से बचाए। आमीन!

🎧 सुनें

📜 आयत 26-30 — अल-फुरकान

26الْمُلْكُ يَوْمَئِذٍ الْحَقُّ لِلرَّحْمَٰنِ ۚ وَكَانَ يَوْمًا عَلَى الْكَافِرِينَ عَسِيرًا
उसे दिन की सल्तनल ख़ास ख़ुदा ही के लिए होगी और वह दिन काफिरों पर बड़ा सख्त होगा
27وَيَوْمَ يَعَضُّ الظَّالِمُ عَلَىٰ يَدَيْهِ يَقُولُ يَا لَيْتَنِي اتَّخَذْتُ مَعَ الرَّسُولِ سَبِيلًا
और जिस दिन जुल्म करने वाला अपने हाथ (मारे अफ़सोस के) काटने लगेगा और कहेगा काश रसूल के साथ मैं भी (दीन का सीधा) रास्ता पकड़ता
28يَا وَيْلَتَىٰ لَيْتَنِي لَمْ أَتَّخِذْ فُلَانًا خَلِيلًا
हाए अफसोस काश मै फला शख्स को अपना दोस्त न बनाता
29لَّقَدْ أَضَلَّنِي عَنِ الذِّكْرِ بَعْدَ إِذْ جَاءَنِي ۗ وَكَانَ الشَّيْطَانُ لِلْإِنسَانِ خَذُولًا
बेशक यक़ीनन उसने हमारे पास नसीहत आने के बाद मुझे बहकाया और शैतान तो आदमी को रुसवा करने वाला ही है
30وَقَالَ الرَّسُولُ يَا رَبِّ إِنَّ قَوْمِي اتَّخَذُوا هَٰذَا الْقُرْآنَ مَهْجُورًا
और (उस वक्त) रसूल (बारगाहे ख़ुदा वन्दी में) अर्ज़ करेगें कि ऐ मेरे परवरदिगार मेरी क़ौम ने तो इस क़ुरान को बेकार बना दिया
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीRevelation
28आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 28

सूरा अल-फुरकान आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हाए अफसोस काश मै फला शख्स को अपना दोस्त न…

सूरा आयत 28/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए