Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَعَضُّ الظَّالِمُ عَلَىٰ يَدَيْهِ: ज़ालिम (अत्याचारी) अपने हाथों को काटेगा, जो अत्यधिक पछतावे और दुःख का प्रतीक है।
- سَبِيلًا: रास्ता, मार्ग — यहाँ इसका अर्थ है ईमान और नेकी का रास्ता जो जन्नत तक पहुँचाता है।
विस्तृत तफ़सीर:
ऐ नबी! उस दिन को याद करो जब ज़ालिम (जिसने अपने ऊपर अत्याचार किया, यानी कुफ़्र और गुनाहों का रास्ता चुना) पछतावे और नदामत के मारे अपने दोनों हाथों को काटेगा और कहेगा: "काश! मैंने रसूल (मुहम्मद ﷺ) के साथ मिलकर ईमान और नेकी का रास्ता अपनाया होता!" यह वह दिन होगा जब पछताने का कोई फ़ायदा नहीं होगा, और आँसू भी किसी काम नहीं आएँगे।
यह आयत उस व्यक्ति के बारे में है जिसने सत्य को समझने के बावजूद, एक बुरे दोस्त के बहकावे में आकर ईमान छोड़ दिया। वह दुनिया में रसूल ﷺ की पैरवी कर सकता था, लेकिन उसने दुनिया के झूठे वादों और बुरी संगत को अपना लिया। अब क़ियामत के दिन वह हाथ काटेगा और कहेगा: "काश! मैंने रसूल का साथ दिया होता, काश! मैंने उनके दिखाए रास्ते पर चला होता।"
यहाँ से हमें एक बहुत बड़ा सबक मिलता है: बुरी संगत और बुरे दोस्तों से बचना। एक बुरा दोस्त इंसान को जन्नत के रास्ते से भटकाकर जहन्नम की तरफ ले जा सकता है। इसीलिए इस्लाम में अच्छे दोस्तों को चुनने की ताकीद की गई है। जो दोस्त आपको अल्लाह की याद दिलाए, नेकी पर उभारे, और गुनाह से रोके — वही सच्चा दोस्त है।
ऐ अल्लाह के बंदो! आज ही अपनी ज़िंदगी को देखो। क्या तुम रसूल ﷺ के बताए रास्ते पर चल रहे हो? क्या तुम्हारे दोस्त तुम्हें जन्नत की तरफ बुला रहे हैं या दुनिया की चमक-दमक में उलझाकर आख़िरत को भुला रहे हैं? उस दिन का पछतावा मत चाहो जब पछताना बेकार होगा। आज ही रसूल ﷺ की सुन्नत को अपनाओ, क़ुरआन को अपना रहनुमा बनाओ, और अल्लाह से माफ़ी माँगो। अल्लाह बहुत मेहरबान है, वह तौबा करने वालों को प्यार करता है। जो आज अपने गुनाहों से तौबा कर ले, उसके लिए जन्नत के दरवाज़े खुले हैं। काश! हम में से हर कोई उस दिन के पछतावे से पहले ही सीधे रास्ते पर आ जाए!
📜 आयत 25-29 — सूरा अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 27
सूरा अल-फुरकान आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस दिन जुल्म करने वाला अपने हाथ (मारे अफ़सोस…सूरा आयत 27/77 — सूरा अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फुरकान सुनें, सूरा अल-फुरकान अनुवाद, सूरा अल-फुरकान mp3, सूरा अल-फुरकान pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-फुरकान
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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