अल-फुरकान · 27/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
وَيَوْمَ يَعَضُّ الظَّالِمُ عَلَىٰ يَدَيْهِ يَقُولُ يَا لَيْتَنِي اتَّخَذْتُ مَعَ الرَّسُولِ سَبِيلًا ۝٢٧
Wa Yawma ya`adduz zaalimu `alaa yadaihi yaqoolu yaa laitanit takhaztu ma`ar Rasooli sabeelaa
📖 हिंदी अर्थ
और जिस दिन जुल्म करने वाला अपने हाथ (मारे अफ़सोस के) काटने लगेगा और कहेगा काश रसूल के साथ मैं भी (दीन का सीधा) रास्ता पकड़ता

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَعَضُّ الظَّالِمُ عَلَىٰ يَدَيْهِ: ज़ालिम (अत्याचारी) अपने हाथों को काटेगा, जो अत्यधिक पछतावे और दुःख का प्रतीक है।
  • سَبِيلًا: रास्ता, मार्ग — यहाँ इसका अर्थ है ईमान और नेकी का रास्ता जो जन्नत तक पहुँचाता है।

विस्तृत तफ़सीर:

ऐ नबी! उस दिन को याद करो जब ज़ालिम (जिसने अपने ऊपर अत्याचार किया, यानी कुफ़्र और गुनाहों का रास्ता चुना) पछतावे और नदामत के मारे अपने दोनों हाथों को काटेगा और कहेगा: "काश! मैंने रसूल (मुहम्मद ﷺ) के साथ मिलकर ईमान और नेकी का रास्ता अपनाया होता!" यह वह दिन होगा जब पछताने का कोई फ़ायदा नहीं होगा, और आँसू भी किसी काम नहीं आएँगे।

यह आयत उस व्यक्ति के बारे में है जिसने सत्य को समझने के बावजूद, एक बुरे दोस्त के बहकावे में आकर ईमान छोड़ दिया। वह दुनिया में रसूल ﷺ की पैरवी कर सकता था, लेकिन उसने दुनिया के झूठे वादों और बुरी संगत को अपना लिया। अब क़ियामत के दिन वह हाथ काटेगा और कहेगा: "काश! मैंने रसूल का साथ दिया होता, काश! मैंने उनके दिखाए रास्ते पर चला होता।"

यहाँ से हमें एक बहुत बड़ा सबक मिलता है: बुरी संगत और बुरे दोस्तों से बचना। एक बुरा दोस्त इंसान को जन्नत के रास्ते से भटकाकर जहन्नम की तरफ ले जा सकता है। इसीलिए इस्लाम में अच्छे दोस्तों को चुनने की ताकीद की गई है। जो दोस्त आपको अल्लाह की याद दिलाए, नेकी पर उभारे, और गुनाह से रोके — वही सच्चा दोस्त है।

ऐ अल्लाह के बंदो! आज ही अपनी ज़िंदगी को देखो। क्या तुम रसूल ﷺ के बताए रास्ते पर चल रहे हो? क्या तुम्हारे दोस्त तुम्हें जन्नत की तरफ बुला रहे हैं या दुनिया की चमक-दमक में उलझाकर आख़िरत को भुला रहे हैं? उस दिन का पछतावा मत चाहो जब पछताना बेकार होगा। आज ही रसूल ﷺ की सुन्नत को अपनाओ, क़ुरआन को अपना रहनुमा बनाओ, और अल्लाह से माफ़ी माँगो। अल्लाह बहुत मेहरबान है, वह तौबा करने वालों को प्यार करता है। जो आज अपने गुनाहों से तौबा कर ले, उसके लिए जन्नत के दरवाज़े खुले हैं। काश! हम में से हर कोई उस दिन के पछतावे से पहले ही सीधे रास्ते पर आ जाए!



📜 आयत 25-29 — सूरा अल-फुरकान

25وَيَوْمَ تَشَقَّقُ السَّمَاءُ بِالْغَمَامِ وَنُزِّلَ الْمَلَائِكَةُ تَنزِيلًا
और जिस दिन आसमान बदली के सबब से फट जाएगा और फरिश्ते कसरत से (जूक दर ज़ूक) नाज़िल किए जाएँगे
26الْمُلْكُ يَوْمَئِذٍ الْحَقُّ لِلرَّحْمَٰنِ ۚ وَكَانَ يَوْمًا عَلَى الْكَافِرِينَ عَسِيرًا
उसे दिन की सल्तनल ख़ास ख़ुदा ही के लिए होगी और वह दिन काफिरों पर बड़ा सख्त होगा
27وَيَوْمَ يَعَضُّ الظَّالِمُ عَلَىٰ يَدَيْهِ يَقُولُ يَا لَيْتَنِي اتَّخَذْتُ مَعَ الرَّسُولِ سَبِيلًا
और जिस दिन जुल्म करने वाला अपने हाथ (मारे अफ़सोस के) काटने लगेगा और कहेगा काश रसूल के साथ मैं भी (दीन का सीधा) रास्ता पकड़ता
28يَا وَيْلَتَىٰ لَيْتَنِي لَمْ أَتَّخِذْ فُلَانًا خَلِيلًا
हाए अफसोस काश मै फला शख्स को अपना दोस्त न बनाता
29لَّقَدْ أَضَلَّنِي عَنِ الذِّكْرِ بَعْدَ إِذْ جَاءَنِي ۗ وَكَانَ الشَّيْطَانُ لِلْإِنسَانِ خَذُولًا
बेशक यक़ीनन उसने हमारे पास नसीहत आने के बाद मुझे बहकाया और शैतान तो आदमी को रुसवा करने वाला ही है
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 27

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Friday, October 2, 2026

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