अल-फुरकान · 29/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
لَّقَدْ أَضَلَّنِي عَنِ الذِّكْرِ بَعْدَ إِذْ جَاءَنِي ۗ وَكَانَ الشَّيْطَانُ لِلْإِنسَانِ خَذُولًا ۝٢٩
Laqad adallanee `aniz zikri ba`da iz jaaa`anee; wa kaanash Shaitaanu lil insaani khazoolaa
📖 हिंदी अर्थ
बेशक यक़ीनन उसने हमारे पास नसीहत आने के बाद मुझे बहकाया और शैतान तो आदमी को रुसवा करने वाला ही है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अज़ल्लनी: मुझे भटका दिया
  • अज़-ज़िक्र: क़ुरआन (और ईमान)
  • ख़ज़ूलन: बहुत निराश करने वाला, साथ छोड़ देने वाला, मदद न करने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दिन का वर्णन करती है जब ज़ालिम (अपने ऊपर अत्याचार करने वाला) इंसान पछतावे से अपने हाथ काटेगा और कहेगा: "काश! मैंने रसूलुल्लाह ﷺ का साथ दिया होता और उनके लाए हुए इस्लाम को अपना रास्ता बनाया होता।" वह अफ़सोस करेगा कि उसने एक बुरे दोस्त को अपना साथी बनाया, जिसने उसे सच्चाई से दूर किया।

यह आयत उस व्यक्ति की ज़बानी है जो क़यामत के दिन अपने बुरे साथी को देखकर कहेगा: "इसने मुझे उस ज़िक्र (क़ुरआन और ईमान) से भटका दिया, जो मेरे पास आ चुका था।" यानी सच्चाई उसके पास आई थी, लेकिन इस बुरे दोस्त ने उसे उस रास्ते से हटा दिया। और शैतान (चाहे वह इंसानी शैतान हो या जिन्नी) हमेशा इंसान के लिए ऐसा ही होता है—जब इंसान को उसकी ज़रूरत होती है, तो वह उसे अकेला छोड़ देता है और मुसीबत के समय उससे किनारा कर लेता है।

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक बड़ी नसीहत है जो बुरे दोस्तों की संगत में पड़कर अपने दीन से दूर हो जाता है। एक बुरा दोस्त इंसान को जहन्नम तक ले जा सकता है, जबकि एक नेक दोस्त उसे जन्नत की राह दिखा सकता है। इसलिए हमें अपने दोस्तों के चुनाव में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे दोस्तों से दूर रहें जो हमें नमाज़ से, क़ुरआन से, और अल्लाह की याद से दूर करते हैं। और ऐसे दोस्तों को अपनाएं जो हमें अच्छाई की तरफ बुलाते हैं, क्योंकि क़यामत के दिन हर इंसान अपने दोस्तों के साथ होगा।

याद रखिए! शैतान का वादा हमेशा झूठा होता है। वह इंसान को गुनाह की राह दिखाता है, लेकिन जब इंसान मुसीबत में फंसता है, तो वह उसे अकेला छोड़ देता है। अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें नेक दोस्तों की संगत प्रदान करे और हमें शैतान के वशीकरण से बचाए। यही कामयाबी की राह है—क़ुरआन को थामे रहें, रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें, और बुरी संगत से बचें।

🎧 सुनें

📜 आयत 27-31 — अल-फुरकान

27وَيَوْمَ يَعَضُّ الظَّالِمُ عَلَىٰ يَدَيْهِ يَقُولُ يَا لَيْتَنِي اتَّخَذْتُ مَعَ الرَّسُولِ سَبِيلًا
और जिस दिन जुल्म करने वाला अपने हाथ (मारे अफ़सोस के) काटने लगेगा और कहेगा काश रसूल के साथ मैं भी (दीन का सीधा) रास्ता पकड़ता
28يَا وَيْلَتَىٰ لَيْتَنِي لَمْ أَتَّخِذْ فُلَانًا خَلِيلًا
हाए अफसोस काश मै फला शख्स को अपना दोस्त न बनाता
29لَّقَدْ أَضَلَّنِي عَنِ الذِّكْرِ بَعْدَ إِذْ جَاءَنِي ۗ وَكَانَ الشَّيْطَانُ لِلْإِنسَانِ خَذُولًا
बेशक यक़ीनन उसने हमारे पास नसीहत आने के बाद मुझे बहकाया और शैतान तो आदमी को रुसवा करने वाला ही है
30وَقَالَ الرَّسُولُ يَا رَبِّ إِنَّ قَوْمِي اتَّخَذُوا هَٰذَا الْقُرْآنَ مَهْجُورًا
और (उस वक्त) रसूल (बारगाहे ख़ुदा वन्दी में) अर्ज़ करेगें कि ऐ मेरे परवरदिगार मेरी क़ौम ने तो इस क़ुरान को बेकार बना दिया
31وَكَذَٰلِكَ جَعَلْنَا لِكُلِّ نَبِيٍّ عَدُوًّا مِّنَ الْمُجْرِمِينَ ۗ وَكَفَىٰ بِرَبِّكَ هَادِيًا وَنَصِيرًا
और हमने (गोया ख़ुद) गुनाहगारों में से हर नबी के दुश्मन बना दिए हैं और तुम्हारा परवरदिगार हिदायत और मददगारी के लिए काफी है
अल-फुरकानकुरान सूची
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अनुवाद — अल-फुरकान 29

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Tuesday, August 18, 2026

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