Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अज़ल्लनी: मुझे भटका दिया
- अज़-ज़िक्र: क़ुरआन (और ईमान)
- ख़ज़ूलन: बहुत निराश करने वाला, साथ छोड़ देने वाला, मदद न करने वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस भयानक दिन का वर्णन करती है जब ज़ालिम (अपने ऊपर अत्याचार करने वाला) इंसान पछतावे से अपने हाथ काटेगा और कहेगा: "काश! मैंने रसूलुल्लाह ﷺ का साथ दिया होता और उनके लाए हुए इस्लाम को अपना रास्ता बनाया होता।" वह अफ़सोस करेगा कि उसने एक बुरे दोस्त को अपना साथी बनाया, जिसने उसे सच्चाई से दूर किया।
यह आयत उस व्यक्ति की ज़बानी है जो क़यामत के दिन अपने बुरे साथी को देखकर कहेगा: "इसने मुझे उस ज़िक्र (क़ुरआन और ईमान) से भटका दिया, जो मेरे पास आ चुका था।" यानी सच्चाई उसके पास आई थी, लेकिन इस बुरे दोस्त ने उसे उस रास्ते से हटा दिया। और शैतान (चाहे वह इंसानी शैतान हो या जिन्नी) हमेशा इंसान के लिए ऐसा ही होता है—जब इंसान को उसकी ज़रूरत होती है, तो वह उसे अकेला छोड़ देता है और मुसीबत के समय उससे किनारा कर लेता है।
यह आयत हर उस इंसान के लिए एक बड़ी नसीहत है जो बुरे दोस्तों की संगत में पड़कर अपने दीन से दूर हो जाता है। एक बुरा दोस्त इंसान को जहन्नम तक ले जा सकता है, जबकि एक नेक दोस्त उसे जन्नत की राह दिखा सकता है। इसलिए हमें अपने दोस्तों के चुनाव में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे दोस्तों से दूर रहें जो हमें नमाज़ से, क़ुरआन से, और अल्लाह की याद से दूर करते हैं। और ऐसे दोस्तों को अपनाएं जो हमें अच्छाई की तरफ बुलाते हैं, क्योंकि क़यामत के दिन हर इंसान अपने दोस्तों के साथ होगा।
याद रखिए! शैतान का वादा हमेशा झूठा होता है। वह इंसान को गुनाह की राह दिखाता है, लेकिन जब इंसान मुसीबत में फंसता है, तो वह उसे अकेला छोड़ देता है। अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें नेक दोस्तों की संगत प्रदान करे और हमें शैतान के वशीकरण से बचाए। यही कामयाबी की राह है—क़ुरआन को थामे रहें, रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें, और बुरी संगत से बचें।
📜 आयत 27-31 — सूरा अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 29
सूरा अल-फुरकान आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक यक़ीनन उसने हमारे पास नसीहत आने के बाद मुझे…सूरा आयत 29/77 — सूरा अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फुरकान सुनें, सूरा अल-फुरकान अनुवाद, सूरा अल-फुरकान mp3, सूरा अल-फुरकान pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-फुरकान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


