अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- قَبَضْنَاهُ (हमने उसे समेट लिया): यानी छाया को हटा दिया या उसे समाप्त कर दिया।
- قَبْضًا يَسِيرًا (हल्के/आसान तरीके से समेटना): यानी धीरे-धीरे, थोड़ा-थोड़ा करके, बिना किसी झटके के।
तफसीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपनी कुदरत की एक अज़ीम निशानी बयान कर रहा है। जिस तरह उसने छाया को फैलाया और सूरज को उसकी दलील बनाया, उसी तरह वह छाया को धीरे-धीरे समेटता भी है। जब सूरज निकलता है तो छाया अचानक गायब नहीं हो जाती, बल्कि अल्लाह उसे आहिस्ता-आहिस्ता, थोड़ा-थोड़ा करके कम करता जाता है। जैसे-जैसे सूरज ऊपर चढ़ता है, छाया छोटी होती जाती है, यहाँ तक कि दोपहर में वह लगभग खत्म हो जाती है। यह क्रमिक प्रक्रिया अल्लाह की रहमत और हिकमत का नमूना है, क्योंकि अगर छाया एकदम से हट जाए तो इंसानों और जानवरों के लिए बड़ी मुश्किल पैदा हो जाए।
यह भी एक बड़ी निशानी है कि अल्लाह ने छाया को इस तरह बनाया कि वह पूरी दुनिया में फैली हुई है, और जब सूरज निकलता है तो अल्लाह उसे हल्के-हल्के समेटता है। यह सब कुछ अल्लाह की कुदरत से होता है, और इसमें उसकी वहदानियत (एकता) और क़ुदरत की सबसे बड़ी गवाही है।
दावत और नसीहत:
इस आयत पर गौर करने वाले इंसान के दिल में अल्लाह की अज़मत और उसकी क़ुदरत का एहसास पैदा होता है। जो ख़ुदा इस तरह छाया और सूरज को इंतज़ाम देता है, वही ख़ुदा हमारी ज़िंदगी के हर मामले का इंतज़ाम करने वाला है। जब हम सुबह उठते हैं और देखते हैं कि छाया धीरे-धीरे सिमट रही है, तो हमें याद रखना चाहिए कि हमारा रब कितना महान और मेहरबान है। वह हर चीज़ को हिकमत के साथ करता है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपनी ज़िंदगी के हर मामले में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वही सब कुछ करने पर क़ादिर है। और यही अल्लाह की निशानियाँ हैं जो हमें उसकी इबादत की तरफ बुलाती हैं। तो आओ, हम इन निशानियों पर गौर करें और अपने रब के शुक्रगुज़ार बनें, क्योंकि वही सबसे बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है।
📜 आयत 44-48 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 46
सूरा अल-फुरकान आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर हमने उसको थोड़ा थोड़ा करके अपनी तरफ खीच लियासूरा आयत 46/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 44–48. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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