अल-फुरकान · 46/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
ثُمَّ قَبَضْنَاهُ إِلَيْنَا قَبْضًا يَسِيرًا ۝٤٦
Summa qabadnaahu ilainaa qabdany yaseeraa
📖 हिंदी अर्थ
फिर हमने उसको थोड़ा थोड़ा करके अपनी तरफ खीच लिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • قَبَضْنَاهُ (हमने उसे समेट लिया): यानी छाया को हटा दिया या उसे समाप्त कर दिया।
  • قَبْضًا يَسِيرًا (हल्के/आसान तरीके से समेटना): यानी धीरे-धीरे, थोड़ा-थोड़ा करके, बिना किसी झटके के।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपनी कुदरत की एक अज़ीम निशानी बयान कर रहा है। जिस तरह उसने छाया को फैलाया और सूरज को उसकी दलील बनाया, उसी तरह वह छाया को धीरे-धीरे समेटता भी है। जब सूरज निकलता है तो छाया अचानक गायब नहीं हो जाती, बल्कि अल्लाह उसे आहिस्ता-आहिस्ता, थोड़ा-थोड़ा करके कम करता जाता है। जैसे-जैसे सूरज ऊपर चढ़ता है, छाया छोटी होती जाती है, यहाँ तक कि दोपहर में वह लगभग खत्म हो जाती है। यह क्रमिक प्रक्रिया अल्लाह की रहमत और हिकमत का नमूना है, क्योंकि अगर छाया एकदम से हट जाए तो इंसानों और जानवरों के लिए बड़ी मुश्किल पैदा हो जाए।

यह भी एक बड़ी निशानी है कि अल्लाह ने छाया को इस तरह बनाया कि वह पूरी दुनिया में फैली हुई है, और जब सूरज निकलता है तो अल्लाह उसे हल्के-हल्के समेटता है। यह सब कुछ अल्लाह की कुदरत से होता है, और इसमें उसकी वहदानियत (एकता) और क़ुदरत की सबसे बड़ी गवाही है।

दावत और नसीहत:

इस आयत पर गौर करने वाले इंसान के दिल में अल्लाह की अज़मत और उसकी क़ुदरत का एहसास पैदा होता है। जो ख़ुदा इस तरह छाया और सूरज को इंतज़ाम देता है, वही ख़ुदा हमारी ज़िंदगी के हर मामले का इंतज़ाम करने वाला है। जब हम सुबह उठते हैं और देखते हैं कि छाया धीरे-धीरे सिमट रही है, तो हमें याद रखना चाहिए कि हमारा रब कितना महान और मेहरबान है। वह हर चीज़ को हिकमत के साथ करता है। यह हमें सिखाता है कि हमें अपनी ज़िंदगी के हर मामले में अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वही सब कुछ करने पर क़ादिर है। और यही अल्लाह की निशानियाँ हैं जो हमें उसकी इबादत की तरफ बुलाती हैं। तो आओ, हम इन निशानियों पर गौर करें और अपने रब के शुक्रगुज़ार बनें, क्योंकि वही सबसे बड़ा मेहरबान और रहम करने वाला है।



📜 आयत 44-48 — अल-फुरकान

44أَمْ تَحْسَبُ أَنَّ أَكْثَرَهُمْ يَسْمَعُونَ أَوْ يَعْقِلُونَ ۚ إِنْ هُمْ إِلَّا كَالْأَنْعَامِ ۖ بَلْ هُمْ أَضَلُّ سَبِيلًا
क्या ये तुम्हारा ख्याल है कि इन (कुफ्फ़ारों) में अक्सर (बात) सुनते या समझते है (नहीं) ये तो बस बिल्कुल मिसल जानवरों के हैं बल्कि उन से भी ज्यादा राह (रास्त) से भटके हुए
45أَلَمْ تَرَ إِلَىٰ رَبِّكَ كَيْفَ مَدَّ الظِّلَّ وَلَوْ شَاءَ لَجَعَلَهُ سَاكِنًا ثُمَّ جَعَلْنَا الشَّمْسَ عَلَيْهِ دَلِيلًا
(ऐ रसूल) क्या तुमने अपने परवरदिगार की कुदरत की तरफ नज़र नहीं की कि उसने क्योंकर साये को फैला दिया अगर वह चहता तो उसे (एक ही जगह) ठहरा हुआ कर देता फिर हमने आफताब को (उसकी शिनाख्त के वास्ते) उसका रहनुमा बना दिया
46ثُمَّ قَبَضْنَاهُ إِلَيْنَا قَبْضًا يَسِيرًا
फिर हमने उसको थोड़ा थोड़ा करके अपनी तरफ खीच लिया
47وَهُوَ الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ اللَّيْلَ لِبَاسًا وَالنَّوْمَ سُبَاتًا وَجَعَلَ النَّهَارَ نُشُورًا
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने तुम्हारे वास्ते रात को पर्दा बनाया और नींद को राहत और दिन को (कारोबार के लिए) उठ खड़ा होने का वक्त बनाया
48وَهُوَ الَّذِي أَرْسَلَ الرِّيَاحَ بُشْرًا بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِهِ ۚ وَأَنزَلْنَا مِنَ السَّمَاءِ مَاءً طَهُورًا
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने अपनी रहमत (बारिश) के आगे आगे हवाओं को खुश ख़बरी देने के लिए (पेश ख़ेमा बना के) भेजा और हम ही ने आसमान से बहुत पाक और सुथरा हुआ पानी बरसाया
अल-फुरकानकुरान सूची
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46आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 46

सूरा अल-फुरकान आयत 46 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर हमने उसको थोड़ा थोड़ा करके अपनी तरफ खीच लिया

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Tuesday, August 18, 2026

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