अल-फुरकान · 58/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
وَتَوَكَّلْ عَلَى الْحَيِّ الَّذِي لَا يَمُوتُ وَسَبِّحْ بِحَمْدِهِ ۚ وَكَفَىٰ بِهِ بِذُنُوبِ عِبَادِهِ خَبِيرًا ۝٥٨
Wa tawakkal `alal Haiyil lazee laa yamootu wa sabbih bihamdih; wa kafaa bihee bizunoobi `ibaadihee khabeeraa
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम उस (ख़ुदा) पर भरोसा रखो जो ऐसा ज़िन्दा है कि कभी नहीं मरेगा और उसकी हम्द व सना की तस्बीह पढ़ो और वह अपने बन्दों के गुनाहों की वाक़िफ कारी में काफी है (वह ख़ुद समझ लेगा)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَوَكَّلْ: भरोसा करो, अपने सारे मामले उसे सौंप दो।
  • الْحَيِّ: वह ज़िंदा जिसमें पूर्ण जीवन हो, जो कभी न मरे।
  • سَبِّحْ بِحَمْدِهِ: उसकी प्रशंसा के साथ उसे हर कमी और दोष से पाक (पवित्र) घोषित करो।
  • خَبِيرًا: पूर्ण जानकार, जिससे कोई चीज़ छिपी न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! तुम अपने सारे मामलों में केवल उस अल्लाह पर भरोसा रखो जो सदैव ज़िंदा है, जिसे कभी मृत्यु नहीं आएगी। वही सच्चा भरोसा करने योग्य है, क्योंकि वह हमेशा बाक़ी रहने वाला है, उसकी ज़ात में जीवन की सारी कमालियाँ मौजूद हैं। उसके सिवा हर चीज़ फ़ना होने वाली है, इसलिए उसी पर तवक्कुल करना चाहिए।

साथ ही, उसकी प्रशंसा के साथ उसकी तस्बीह करो — यानी उसे हर उस चीज़ से पाक और मुबर्रा (पवित्र) जानो जो उसके शान के ख़िलाफ़ हो, और उसकी नेमतों पर शुक्र अदा करते हुए उसकी इबादत करो। यह तस्बीह उसकी बड़ाई और पाकी का इज़हार है, और नमाज़ भी इसी में शामिल है।

और यह जान लो कि अल्लाह अपने बंदों के गुनाहों से पूरी तरह ख़बर रखने वाला है। उससे उनके ज़ाहिरी और बातिनी (छिपे हुए) सारे काम छिपे नहीं हैं। वह हर छोटे-बड़े गुनाह से वाक़िफ़ है, और क़यामत के दिन वह हर बंदे को उसके किए हुए आमाल का पूरा-पूरा हिसाब देगा और उसके मुताबिक़ बदला या सज़ा देगा। यह एक सख़्त तनबीह (चेतावनी) है कि गुनाहों से बचो, क्योंकि सब कुछ उसकी नज़र में है।

यह आयत हमें सिखाती है कि जीवन की हर मुश्किल में अल्लाह ही पर भरोसा रखना चाहिए, क्योंकि वही अमर है और उसकी मदद कभी ख़त्म नहीं होती। साथ ही, हमें अपनी ज़िंदगी को उसकी इबादत और तस्बीह में गुज़ारना चाहिए, और यह यक़ीन रखना चाहिए कि हमारे हर अमल से वह बाख़बर है — यही ईमान की निशानी है। जो शख्स इस हक़ीक़त को समझ ले, वह कभी गुनाह की तरफ नहीं बढ़ेगा और हमेशा अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ जीने की कोशिश करेगा।



📜 आयत 56-60 — सूरा अल-फुरकान

56وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا مُبَشِّرًا وَنَذِيرًا
और (ऐ रसूल) हमने तो तुमको बस (नेकी को जन्नत की) खुशख़बरी देने वाला और (बुरों को अज़ाब से) डराने वाला बनाकर भेजा है
57قُلْ مَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ إِلَّا مَن شَاءَ أَن يَتَّخِذَ إِلَىٰ رَبِّهِ سَبِيلًا
और उन लोगों से तुम कह दो कि मै इस (तबलीगे रिसालत) पर तुमसे कुछ मज़दूरी तो माँगता नहीं हूँ मगर तमन्ना ये है कि जो चाहे अपने परवरदिगार तक पहुँचने की राह पकडे
58وَتَوَكَّلْ عَلَى الْحَيِّ الَّذِي لَا يَمُوتُ وَسَبِّحْ بِحَمْدِهِ ۚ وَكَفَىٰ بِهِ بِذُنُوبِ عِبَادِهِ خَبِيرًا
और (ऐ रसूल) तुम उस (ख़ुदा) पर भरोसा रखो जो ऐसा ज़िन्दा है कि कभी नहीं मरेगा और उसकी हम्द व सना की तस्बीह पढ़ो और वह अपने बन्दों के गुनाहों की वाक़िफ कारी में काफी है (वह ख़ुद समझ लेगा)
59الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۚ الرَّحْمَٰنُ فَاسْأَلْ بِهِ خَبِيرًا
जिसने सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ उन दोनों में है छह: दिन में पैदा किया फिर अर्श (के बनाने) पर आमादा हुआ और वह बड़ा मेहरबान है तो तुम उसका हाल किसी बाख़बर ही से पूछना
60وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اسْجُدُوا لِلرَّحْمَٰنِ قَالُوا وَمَا الرَّحْمَٰنُ أَنَسْجُدُ لِمَا تَأْمُرُنَا وَزَادَهُمْ نُفُورًا ۩
और जब उन कुफ्फारों से कहा जाता है कि रहमान (ख़ुदा) को सजदा करो तो कहते हैं कि रहमान क्या चीज़ है तुम जिसके लिए कहते हो हम उस का सजदा करने लगें और (इससे) उनकी नफरत और बढ़ जाती है (60) सजदा
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीअवतरण स्थान
58आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 58

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Friday, October 2, 2026

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