अल-फुरकान · 59/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۚ الرَّحْمَٰنُ فَاسْأَلْ بِهِ خَبِيرًا ۝٥٩
Allazee khalaqas samaawaati wal arda wa maa bainahumaa fee sittati aiyaamin summmmastawaa `alal `Arsh; ar Rahmaanu fas`al bihee khabeeraa
📖 हिंदी अर्थ
जिसने सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ उन दोनों में है छह: दिन में पैदा किया फिर अर्श (के बनाने) पर आमादा हुआ और वह बड़ा मेहरबान है तो तुम उसका हाल किसी बाख़बर ही से पूछना

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • استوى: ऊपर उठना, सिंहासन पर विराजमान होना — यह अल्लाह की शान के अनुकूल है, जैसा कि सलफ़ (धर्मपूर्वजों) का मत है।
  • العرش: अल्लाह का महान सिंहासन, जो सारी मख़लूक़ात से ऊपर है।
  • خبيرًا: पूर्ण ज्ञान रखने वाला, जो हर चीज़ की हक़ीक़त से वाक़िफ़ हो।

तफ़सीर:

यह आयत अल्लाह तआला की महान क़ुदरत और उसके रहमान होने का ज़िक्र करती है। अल्लाह वही है जिसने आसमानों, ज़मीन और उनके बीच की हर चीज़ को छह दिनों में पैदा किया। यहाँ "छह दिन" का मतलब उसकी अपनी मुद्दतें हैं, क्योंकि उस वक़्त न सूरज था न चाँद, जिनसे दिन और रात का तअय्युन होता। यह अल्लाह की क़ुदरत की अज़ीम शान है कि उसने इतनी बड़ी कायनात को सिर्फ़ अपने इरादे से पैदा कर दिया।

फिर अल्लाह ने फ़रमाया: "ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ" यानी वह अपने सिंहासन पर विराजमान हुआ, जो उसकी शान के लायक़ है — न हम उसकी कैफ़ियत जानते हैं और न उसकी तशबीह (समानता) किसी मख़लूक़ से कर सकते हैं। यह अल्लाह की सिफ़ात में से एक सिफ़त है, जिस पर हम ईमान रखते हैं, बग़ैर तशबीह और बग़ैर तातील के।

फिर अल्लाह ने अपनी ज़ात को "الرَّحْمَٰنُ" (बेहद रहम करने वाला) कहा — यह उसकी रहमत की वुसअत (विस्तार) को बयान करता है। अल्लाह की रहमत हर चीज़ को घेरे हुए है, और उसकी रहमत ही उसकी ख़िलक़त का मक़सद है।

आख़िर में अल्लाह फ़रमाता है: "فَاسْأَلْ بِهِ خَبِيرًا" — ऐ नबी! तुम अल्लाह के बारे में किसी ख़बर रखने वाले से पूछो। यहाँ मुराद ख़ुद अल्लाह की ज़ात है, क्योंकि वही अपनी सिफ़ात और अपनी अज़मत का पूरा इल्म रखता है। कोई इंसान अल्लाह के बारे में उतना नहीं जानता जितना उसका नबी मुहम्मद ﷺ जानते हैं — वही सबसे बड़े ख़बीर (जानकार) हैं। साथ ही, इससे जिब्रील अमीन और अहले इल्म (विद्वानों) की तरफ़ भी इशारा है, जो अल्लाह की रहमत और उसकी सिफ़ात का इल्म रखते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत और उसकी रहमत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जब हम इस कायनात को देखते हैं — आसमान, ज़मीन, पहाड़, समुंदर, सितारे — तो हमारा ईमान मज़बूत होता है कि इन सबका ख़ालिक़ एक ही है, और वही रहमान है। यह हमें सिखाता है कि हम अपने रब की रहमत से कभी मायूस न हों, और उसकी क़ुदरत के सामने अपने आपको झुका दें। अल्लाह के बारे में सही इल्म हासिल करने का ज़रिया उसके नबी ﷺ और उनकी सुन्नत है — जो कोई अल्लाह और उसकी रहमत के बारे में जानना चाहे, वह क़ुरआन और सुन्नत की तरफ़ रुजू करे, क्योंकि यही सबसे सच्चा और मुकम्मल इल्म है।



📜 आयत 57-61 — अल-फुरकान

57قُلْ مَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ إِلَّا مَن شَاءَ أَن يَتَّخِذَ إِلَىٰ رَبِّهِ سَبِيلًا
और उन लोगों से तुम कह दो कि मै इस (तबलीगे रिसालत) पर तुमसे कुछ मज़दूरी तो माँगता नहीं हूँ मगर तमन्ना ये है कि जो चाहे अपने परवरदिगार तक पहुँचने की राह पकडे
58وَتَوَكَّلْ عَلَى الْحَيِّ الَّذِي لَا يَمُوتُ وَسَبِّحْ بِحَمْدِهِ ۚ وَكَفَىٰ بِهِ بِذُنُوبِ عِبَادِهِ خَبِيرًا
और (ऐ रसूल) तुम उस (ख़ुदा) पर भरोसा रखो जो ऐसा ज़िन्दा है कि कभी नहीं मरेगा और उसकी हम्द व सना की तस्बीह पढ़ो और वह अपने बन्दों के गुनाहों की वाक़िफ कारी में काफी है (वह ख़ुद समझ लेगा)
59الَّذِي خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ وَمَا بَيْنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامٍ ثُمَّ اسْتَوَىٰ عَلَى الْعَرْشِ ۚ الرَّحْمَٰنُ فَاسْأَلْ بِهِ خَبِيرًا
जिसने सारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ उन दोनों में है छह: दिन में पैदा किया फिर अर्श (के बनाने) पर आमादा हुआ और वह बड़ा मेहरबान है तो तुम उसका हाल किसी बाख़बर ही से पूछना
60وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اسْجُدُوا لِلرَّحْمَٰنِ قَالُوا وَمَا الرَّحْمَٰنُ أَنَسْجُدُ لِمَا تَأْمُرُنَا وَزَادَهُمْ نُفُورًا ۩
और जब उन कुफ्फारों से कहा जाता है कि रहमान (ख़ुदा) को सजदा करो तो कहते हैं कि रहमान क्या चीज़ है तुम जिसके लिए कहते हो हम उस का सजदा करने लगें और (इससे) उनकी नफरत और बढ़ जाती है (60) सजदा
61تَبَارَكَ الَّذِي جَعَلَ فِي السَّمَاءِ بُرُوجًا وَجَعَلَ فِيهَا سِرَاجًا وَقَمَرًا مُّنِيرًا
बहुत बाबरकत है वह ख़ुदा जिसने आसमान में बुर्ज बनाए और उन बुर्जों में (आफ़ताब का) चिराग़ और जगमगाता चाँद बनाया
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अनुवाद — अल-फुरकान 59

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Tuesday, August 18, 2026

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