Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَا أَسْأَلُكُمْ – मैं तुमसे नहीं माँगता
- مِنْ أَجْرٍ – कोई बदला या पारिश्रमिक
- إِلَّا مَن شَاءَ – सिवाय उस व्यक्ति के जो चाहे
- يَتَّخِذَ – अपना ले / बना ले
- سَبِيلًا – रास्ता / मार्ग
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप लोगों से साफ़ कह दीजिए कि मैं तुम्हें इस्लाम की ओर बुलाने और क़ुरआन पहुँचाने के बदले में तुमसे कोई मेहनताना या पारिश्रमिक नहीं माँगता। मेरा उद्देश्य तुम्हारे धन को हासिल करना नहीं है, न ही मैं इस दावत से कोई दुनियावी फ़ायदा चाहता हूँ। मेरी मेहनत और मेरा इनाम तो अल्लाह के पास है।
हाँ, अगर कोई व्यक्ति अपनी खुशी और अपनी भलाई के लिए अल्लाह की राह में खर्च करना चाहे, अपने रब की रज़ा और उसकी मर्ज़ी तक पहुँचने का रास्ता अपनाना चाहे, तो यह उसके अपने ही भले के लिए है। मैं उसे इससे नहीं रोकता, बल्कि यह उसके लिए बेहतर है। जो व्यक्ति अल्लाह की राह में अपना माल खर्च करता है, वह दरअसल अपने ही लिए अच्छाई कमाता है, क्योंकि अल्लाह की राह में खर्च किया गया धन कभी बेकार नहीं जाता।
यह आयत हमें सिखाती है कि दीन की दावत और अच्छाई की तरफ़ बुलाना किसी दुनियावी मुआवज़े के लिए नहीं होना चाहिए। एक सच्चा दाई (बुलाने वाला) सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए लोगों को भलाई की ओर बुलाता है। साथ ही, यह भी सिखाती है कि अल्लाह की राह में खर्च करना कोई ज़बरदस्ती नहीं है, बल्कि यह एक स्वैच्छिक कार्य है जो इंसान के अपने ही फ़ायदे के लिए है। जो लोग अल्लाह की राह में खर्च करते हैं, वे दरअसल अपने आख़िरत की ज़िन्दगी को संवारते हैं और अपने रब का क़रीबी बनते हैं। यह एक ऐसा निवेश है जो कभी घाटे में नहीं जाता — आज की छोटी सी कुर्बानी कल की बड़ी कामयाबी का ज़रिया बनती है।
📜 आयत 55-59 — सूरा अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 57
सूरा अल-फुरकान आयत 57 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उन लोगों से तुम कह दो कि मै इस…सूरा आयत 57/77 — सूरा अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फुरकान सुनें, सूरा अल-फुरकान अनुवाद, सूरा अल-फुरकान mp3, सूरा अल-फुरकान pdf. आयत 55–59. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-फुरकान
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


