अन-नमल · 64/93
अनुवाद उच्चारण — अन-नमल
أَمَّن يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ وَمَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ قُلْ هَاتُوا بُرْهَانَكُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ ۝٦٤
Ammmany-yabda`ul khalqa summa yu`eeduhoo wa many-yarzuqukum minas sammaaa`i wal ard; `a-ilaahum ma`allah; qul haatoo burhaanakum in kuntum saadiqeen
📖 हिंदी अर्थ
भला वह कौन हैं जो ख़िलकत को नए सिरे से पैदा करता है फिर उसे दोबारा (मरने के बाद) पैदा करेगा और कौन है जो तुम लोगों को आसमान व ज़मीन से रिज़क़ देता है- तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरग़िज़ नहीं) (ऐ रसूल) तुम (इन मुशरेकीन से) कहा दो कि अगर तुम सच्चे हो तो अपनी दलील पेश करो
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَبْدَأُ الْخَلْقَ: सृष्टि की शुरुआत करता है, पैदा करता है।
  • يُعِيدُهُ: उसे दोबारा जीवित करता है (मृत्यु के बाद)।
  • يَرْزُقُكُم: तुम्हें रोज़ी (आजीविका) देता है।
  • مِنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ: आसमान से (बारिश के रूप में) और ज़मीन से (पौधों, फलों के रूप में)।
  • بُرْهَانَكُمْ: अपनी दलील और सबूत।
  • صَادِقِينَ: सच्चे (अपने दावे में)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन (बहुदेववादियों) से सवाल करता है और उन्हें उनकी ग़लतफ़हमी का एहसास दिलाता है। वह कहता है: कौन है जो सृष्टि की शुरुआत करता है? कौन है जो माँ के पेट में इंसान को पहले एक बूँद से बनाता है, फिर खून के थक्के से, फिर मांस के टुकड़े से, और फिर उसे सही अंगों वाला इंसान बनाता है? और फिर जब वह मर जाता है, तो कौन है जो उसे दोबारा ज़िंदा करेगा? यही अल्लाह है, जो पहली बार पैदा करता है और वही दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है।

फिर अल्लाह अपनी एक और बड़ी नेमत याद दिलाता है: वह तुम्हें आसमान से बारिश भेजता है, जिससे ज़मीन सींची जाती है, और ज़मीन से तरह-तरह के अनाज, फल, सब्ज़ियाँ और पेड़ उगाता है। यह सब उसी का दिया हुआ रिज़्क़ है। अब सवाल यह है: क्या इन सब कामों में अल्लाह के साथ कोई और भी शरीक (साझीदार) है? क्या कोई और माबूद (पूज्य) है जो यह सब करता हो? बिल्कुल नहीं! यह सब अकेले अल्लाह ही का काम है।

इसके बाद अल्लाह अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि इन मुशरिकीन से कहो: "अगर तुम सच्चे हो कि अल्लाह के साथ कोई और भी पूज्य है, तो अपनी दलील और सबूत पेश करो।" लेकिन वे कभी कोई ठोस सबूत नहीं दे सकते, क्योंकि सच्चाई यही है कि सृष्टि का मालिक, रिज़्क़ देने वाला, जीवन और मृत्यु का स्वामी केवल और केवल अल्लाह ही है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें गहराई से सोचने की दावत देती है। जब हम अपने चारों ओर देखते हैं — आसमान से गिरती बारिश, ज़मीन से उगते हरे-भरे खेत, फलों से लदे पेड़, और हमारे अपने शरीर का अद्भुत सिस्टम — तो क्या हमें यह नहीं दिखता कि इन सबके पीछे एक महान शक्ति है? यह सब बिना किसी सहारे के नहीं हो रहा। यही अल्लाह है, जो हर पल हमारा ख्याल रखता है, हमें खिलाता-पिलाता है, और हमारी हर ज़रूरत पूरी करता है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हम अपनी ज़िंदगी में किसी को भी अल्लाह का शरीक न बनाएँ। न हम किसी और से मदद माँगें जो अल्लाह के बिना कुछ नहीं कर सकता। अल्लाह ही हमारा रब है, हमारा मालिक है, और उसी की इबादत हमें करनी चाहिए। जब हम यह समझ लेंगे कि सब कुछ अल्लाह ही के हाथ में है, तो हमारा दिल उसी की तरफ़ मुड़ जाएगा, और हमें सच्ची शांति मिलेगी। यही तोहीद (एकेश्वरवाद) हमारी नजात (मुक्ति) की कुंजी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 62-66 — अन-नमल

62أَمَّن يُجِيبُ الْمُضْطَرَّ إِذَا دَعَاهُ وَيَكْشِفُ السُّوءَ وَيَجْعَلُكُمْ خُلَفَاءَ الْأَرْضِ ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ قَلِيلًا مَّا تَذَكَّرُونَ
भला वह कौन है कि जब मुज़तर उसे पुकारे तो दुआ क़ुबूल करता है और मुसीबत को दूर करता है और तुम लोगों को ज़मीन में (अपना) नायब बनाता है तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद है (हरगिज़ नहीं) उस पर भी तुम लोग बहुत कम नसीहत व इबरत हासिल करते हो
63أَمَّن يَهْدِيكُمْ فِي ظُلُمَاتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ وَمَن يُرْسِلُ الرِّيَاحَ بُشْرًا بَيْنَ يَدَيْ رَحْمَتِهِ ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ تَعَالَى اللَّهُ عَمَّا يُشْرِكُونَ
भला वह कौन है जो तुम लोगों की ख़़ुश्की और तरी की तारिक़ियों में राह दिखाता है और कौन उसकी बाराने रहमत के आगे आगे (बारिश की) ख़ुशखबरी लेकर हवाओं को भेजता है-क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरगिज़ नहीं) ये लोग जिन चीज़ों को ख़ुदा का शरीक ठहराते हैं ख़ुदा उससे बालातर है
64أَمَّن يَبْدَأُ الْخَلْقَ ثُمَّ يُعِيدُهُ وَمَن يَرْزُقُكُم مِّنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ ۗ أَإِلَٰهٌ مَّعَ اللَّهِ ۚ قُلْ هَاتُوا بُرْهَانَكُمْ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
भला वह कौन हैं जो ख़िलकत को नए सिरे से पैदा करता है फिर उसे दोबारा (मरने के बाद) पैदा करेगा और कौन है जो तुम लोगों को आसमान व ज़मीन से रिज़क़ देता है- तो क्या ख़ुदा के साथ कोई और माबूद भी है (हरग़िज़ नहीं) (ऐ रसूल) तुम (इन मुशरेकीन से) कहा दो कि अगर तुम सच्चे हो तो अपनी दलील पेश करो
65قُل لَّا يَعْلَمُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ الْغَيْبَ إِلَّا اللَّهُ ۚ وَمَا يَشْعُرُونَ أَيَّانَ يُبْعَثُونَ
(ऐ रसूल इन से) कह दो कि जितने लोग आसमान व ज़मीन में हैं उनमे से कोई भी गैब की बात के सिवा नहीं जानता और वह भी तो नहीं समझते कि क़ब्र से दोबारा कब ज़िन्दा उठ खडे क़िए जाएँगें
66بَلِ ادَّارَكَ عِلْمُهُمْ فِي الْآخِرَةِ ۚ بَلْ هُمْ فِي شَكٍّ مِّنْهَا ۖ بَلْ هُم مِّنْهَا عَمُونَ
बल्कि (असल ये है कि) आख़िरत के बारे में उनके इल्म का ख़ात्मा हो गया है बल्कि उसकी तरफ से शक में पड़ें हैं बल्कि (सच ये है कि) इससे ये लोग अंधे बने हुए हैं
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Tuesday, August 18, 2026

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