अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَبْدَأُ الْخَلْقَ: सृष्टि की शुरुआत करता है, पैदा करता है।
- يُعِيدُهُ: उसे दोबारा जीवित करता है (मृत्यु के बाद)।
- يَرْزُقُكُم: तुम्हें रोज़ी (आजीविका) देता है।
- مِنَ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ: आसमान से (बारिश के रूप में) और ज़मीन से (पौधों, फलों के रूप में)।
- بُرْهَانَكُمْ: अपनी दलील और सबूत।
- صَادِقِينَ: सच्चे (अपने दावे में)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन (बहुदेववादियों) से सवाल करता है और उन्हें उनकी ग़लतफ़हमी का एहसास दिलाता है। वह कहता है: कौन है जो सृष्टि की शुरुआत करता है? कौन है जो माँ के पेट में इंसान को पहले एक बूँद से बनाता है, फिर खून के थक्के से, फिर मांस के टुकड़े से, और फिर उसे सही अंगों वाला इंसान बनाता है? और फिर जब वह मर जाता है, तो कौन है जो उसे दोबारा ज़िंदा करेगा? यही अल्लाह है, जो पहली बार पैदा करता है और वही दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है।
फिर अल्लाह अपनी एक और बड़ी नेमत याद दिलाता है: वह तुम्हें आसमान से बारिश भेजता है, जिससे ज़मीन सींची जाती है, और ज़मीन से तरह-तरह के अनाज, फल, सब्ज़ियाँ और पेड़ उगाता है। यह सब उसी का दिया हुआ रिज़्क़ है। अब सवाल यह है: क्या इन सब कामों में अल्लाह के साथ कोई और भी शरीक (साझीदार) है? क्या कोई और माबूद (पूज्य) है जो यह सब करता हो? बिल्कुल नहीं! यह सब अकेले अल्लाह ही का काम है।
इसके बाद अल्लाह अपने नबी ﷺ को हुक्म देता है कि इन मुशरिकीन से कहो: "अगर तुम सच्चे हो कि अल्लाह के साथ कोई और भी पूज्य है, तो अपनी दलील और सबूत पेश करो।" लेकिन वे कभी कोई ठोस सबूत नहीं दे सकते, क्योंकि सच्चाई यही है कि सृष्टि का मालिक, रिज़्क़ देने वाला, जीवन और मृत्यु का स्वामी केवल और केवल अल्लाह ही है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें गहराई से सोचने की दावत देती है। जब हम अपने चारों ओर देखते हैं — आसमान से गिरती बारिश, ज़मीन से उगते हरे-भरे खेत, फलों से लदे पेड़, और हमारे अपने शरीर का अद्भुत सिस्टम — तो क्या हमें यह नहीं दिखता कि इन सबके पीछे एक महान शक्ति है? यह सब बिना किसी सहारे के नहीं हो रहा। यही अल्लाह है, जो हर पल हमारा ख्याल रखता है, हमें खिलाता-पिलाता है, और हमारी हर ज़रूरत पूरी करता है।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हम अपनी ज़िंदगी में किसी को भी अल्लाह का शरीक न बनाएँ। न हम किसी और से मदद माँगें जो अल्लाह के बिना कुछ नहीं कर सकता। अल्लाह ही हमारा रब है, हमारा मालिक है, और उसी की इबादत हमें करनी चाहिए। जब हम यह समझ लेंगे कि सब कुछ अल्लाह ही के हाथ में है, तो हमारा दिल उसी की तरफ़ मुड़ जाएगा, और हमें सच्ची शांति मिलेगी। यही तोहीद (एकेश्वरवाद) हमारी नजात (मुक्ति) की कुंजी है।
📜 आयत 62-66 — अन-नमल
अनुवाद — अन-नमल 64
सूरा अन-नमल आयत 64 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : भला वह कौन हैं जो ख़िलकत को नए सिरे से…सूरा आयत 64/93 — अन-नमल النمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नमल सुनें, अन-नमल अनुवाद, अन-नमल mp3, अन-नमल pdf. आयत 62–66. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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