अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- قَضَى الْأَجَلَ: अपनी निर्धारित अवधि पूरी की।
- آنَسَ: देखा, महसूस किया।
- الطُّورِ: वह पहाड़ जिस पर अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) से कलाम किया था।
- جَذْوَةٍ: लकड़ी का वह टुकड़ा जिसमें आग लगी हो, बिना लपट के।
- تَصْطَلُونَ: आग से ठंडक दूर करना, यानी सेकना या गर्मी पाना।
तफसीर (व्याख्या):
जब नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने ससुर के यहाँ दस साल की निर्धारित अवधि पूरी कर ली — जो कि दो अवधियों में से बेहतर और पूरी थी — तो वे अपनी पत्नी और परिवार के साथ मद्यन से मिस्र की ओर रवाना हुए। रास्ते में, रात के अंधेरे में, उन्होंने तूर पहाड़ की तरफ से एक आग देखी। यह कोई साधारण आग नहीं थी, बल्कि अल्लाह की तरफ से एक इशारा था जो मूसा (अलैहिस्सलाम) की ज़िंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने परिवार से कहा: "तुम यहीं ठहरो, मुझे आग दिखाई दी है। मैं वहाँ जाता हूँ, शायद मैं तुम्हारे लिए रास्ते की कोई खबर लाऊँ या आग का कोई जलता हुआ टुकड़ा ले आऊँ ताकि तुम इस ठंड में सेक सको।" यह एक प्यारे और ज़िम्मेदार इंसान का अंदाज़ था — वे अपने परिवार की परवाह करते थे और उनकी ज़रूरतों का ख्याल रखते थे।
लेकिन अल्लाह की योजना कुछ और ही थी। यह आग सिर्फ़ सेकने के लिए नहीं थी, बल्कि यह नबुव्वत (पैग़म्बरी) की रोशनी थी जो मूसा (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह के पास बुला रही थी। जब वे उस आग के पास पहुँचे, तो अल्लाह ने उन्हें पैग़म्बर बनाकर फ़िरऔन के पास भेजने का हुक्म दिया। यह वही मुक़ाम था जहाँ अल्लाह ने उनसे सीधे कलाम किया और उन्हें अपनी बड़ी निशानियाँ दिखाईं।
इस आयत से हमें कई सबक मिलते हैं:
- अल्लाह की तदबीर (योजना): इंसान सोचता है कि वह आग से सेकने जा रहा है, लेकिन अल्लाह उसे अपनी रिसालत (पैग़म्बरी) की बुलंदी तक पहुँचा देता है। हमारी छोटी सोच के पीछे अल्लाह की बड़ी मर्ज़ी होती है।
- परिवार की ज़िम्मेदारी: मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने परिवार को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हें सुरक्षित जगह ठहराकर गए। यह हमारे लिए सबक है कि हम अपने परिवार की देखभाल और हिफ़ाज़त का ख्याल रखें।
- मुसीबत में उम्मीद: जब हालात मुश्किल हों, तो अल्लाह पर भरोसा रखें। मूसा (अलैहिस्सलाम) रात के अंधेरे में ठंड और रास्ते की परेशानी में थे, लेकिन अल्लाह ने उनके लिए रोशनी और हिदायत का बंदोबस्त किया।
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। जब वे उसकी राह में कदम बढ़ाते हैं, तो अल्लाह उन्हें ऐसे रास्ते दिखाता है जिनका उन्हें अंदाज़ा भी नहीं होता। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर मोड़ पर अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रहमत से उम्मीद न खोएँ।
📜 आयत 27-31 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 29
सूरा अल-क़सस आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ग़रज़ मूसा का छोटी लड़की से निकाह हो गया और…सूरा आयत 29/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








