अल-क़सस · 29/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
۞ فَلَمَّا قَضَىٰ مُوسَى الْأَجَلَ وَسَارَ بِأَهْلِهِ آنَسَ مِن جَانِبِ الطُّورِ نَارًا قَالَ لِأَهْلِهِ امْكُثُوا إِنِّي آنَسْتُ نَارًا لَّعَلِّي آتِيكُم مِّنْهَا بِخَبَرٍ أَوْ جَذْوَةٍ مِّنَ النَّارِ لَعَلَّكُمْ تَصْطَلُونَ ۝٢٩
Falammmaa qadaa Moosal ajala wa saara bi ahliheee aanasa min jaanibit Toori naaran qaala li ahlihim kusooo inneee aanastu naaral la `alleee aateekum minhaa bikhabarin aw jazwatim minan naari la `allakum tastaloon
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ मूसा का छोटी लड़की से निकाह हो गया और रहने लगे फिर जब मूसा ने अपनी (दस बरस की) मुद्दत पूरी की और बीवी को लेकर चले तो अंधेरीरात जाड़ों के दिन राह भूल गए और बीबी सफ़ूरा को दर्द ज़ेह शुरु हुआ (इतने में) कोहेतूर की तरफ आग दिखायी दी तो अपने लड़के बालों से कहा तुम लोग ठहरो मैने यक़ीनन आग देखी है (मै वहाँ जाता हूँ) क्या अजब है वहाँ से (रास्ते की) कुछ ख़बर लाऊँ या आग की कोई चिंगारी (लेता आऊँ) ताकि तुम लोग तापो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • قَضَى الْأَجَلَ: अपनी निर्धारित अवधि पूरी की।
  • آنَسَ: देखा, महसूस किया।
  • الطُّورِ: वह पहाड़ जिस पर अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) से कलाम किया था।
  • جَذْوَةٍ: लकड़ी का वह टुकड़ा जिसमें आग लगी हो, बिना लपट के।
  • تَصْطَلُونَ: आग से ठंडक दूर करना, यानी सेकना या गर्मी पाना।

तफसीर (व्याख्या):

जब नबी मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने ससुर के यहाँ दस साल की निर्धारित अवधि पूरी कर ली — जो कि दो अवधियों में से बेहतर और पूरी थी — तो वे अपनी पत्नी और परिवार के साथ मद्यन से मिस्र की ओर रवाना हुए। रास्ते में, रात के अंधेरे में, उन्होंने तूर पहाड़ की तरफ से एक आग देखी। यह कोई साधारण आग नहीं थी, बल्कि अल्लाह की तरफ से एक इशारा था जो मूसा (अलैहिस्सलाम) की ज़िंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।

मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने परिवार से कहा: "तुम यहीं ठहरो, मुझे आग दिखाई दी है। मैं वहाँ जाता हूँ, शायद मैं तुम्हारे लिए रास्ते की कोई खबर लाऊँ या आग का कोई जलता हुआ टुकड़ा ले आऊँ ताकि तुम इस ठंड में सेक सको।" यह एक प्यारे और ज़िम्मेदार इंसान का अंदाज़ था — वे अपने परिवार की परवाह करते थे और उनकी ज़रूरतों का ख्याल रखते थे।

लेकिन अल्लाह की योजना कुछ और ही थी। यह आग सिर्फ़ सेकने के लिए नहीं थी, बल्कि यह नबुव्वत (पैग़म्बरी) की रोशनी थी जो मूसा (अलैहिस्सलाम) को अल्लाह के पास बुला रही थी। जब वे उस आग के पास पहुँचे, तो अल्लाह ने उन्हें पैग़म्बर बनाकर फ़िरऔन के पास भेजने का हुक्म दिया। यह वही मुक़ाम था जहाँ अल्लाह ने उनसे सीधे कलाम किया और उन्हें अपनी बड़ी निशानियाँ दिखाईं।

इस आयत से हमें कई सबक मिलते हैं:

  1. अल्लाह की तदबीर (योजना): इंसान सोचता है कि वह आग से सेकने जा रहा है, लेकिन अल्लाह उसे अपनी रिसालत (पैग़म्बरी) की बुलंदी तक पहुँचा देता है। हमारी छोटी सोच के पीछे अल्लाह की बड़ी मर्ज़ी होती है।
  2. परिवार की ज़िम्मेदारी: मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने परिवार को अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि उन्हें सुरक्षित जगह ठहराकर गए। यह हमारे लिए सबक है कि हम अपने परिवार की देखभाल और हिफ़ाज़त का ख्याल रखें।
  3. मुसीबत में उम्मीद: जब हालात मुश्किल हों, तो अल्लाह पर भरोसा रखें। मूसा (अलैहिस्सलाम) रात के अंधेरे में ठंड और रास्ते की परेशानी में थे, लेकिन अल्लाह ने उनके लिए रोशनी और हिदायत का बंदोबस्त किया।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह अपने नेक बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। जब वे उसकी राह में कदम बढ़ाते हैं, तो अल्लाह उन्हें ऐसे रास्ते दिखाता है जिनका उन्हें अंदाज़ा भी नहीं होता। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी के हर मोड़ पर अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रहमत से उम्मीद न खोएँ।



📜 आयत 27-31 — अल-क़सस

27قَالَ إِنِّي أُرِيدُ أَنْ أُنكِحَكَ إِحْدَى ابْنَتَيَّ هَاتَيْنِ عَلَىٰ أَن تَأْجُرَنِي ثَمَانِيَ حِجَجٍ ۖ فَإِنْ أَتْمَمْتَ عَشْرًا فَمِنْ عِندِكَ ۖ وَمَا أُرِيدُ أَنْ أَشُقَّ عَلَيْكَ ۚ سَتَجِدُنِي إِن شَاءَ اللَّهُ مِنَ الصَّالِحِينَ
(और इनमें दोनों बातें पायी जाती हैं तब) शुएब ने कहा मै चाहता हूँ कि अपनी दोनों लड़कियों में से एक के साथ तुम्हारा इस (महर) पर निकाह कर दूँ कि तुम आठ बरस तक मेरी नौकरी करो और अगर तुम दस बरस पूरे कर दो तो तुम्हारा एहसान और मै तुम पर मेहनत मशक्क़त भी डालना नही चाहता और तुम मुझे इन्शा अल्लाह नेको कार आदमी पाओगे
28قَالَ ذَٰلِكَ بَيْنِي وَبَيْنَكَ ۖ أَيَّمَا الْأَجَلَيْنِ قَضَيْتُ فَلَا عُدْوَانَ عَلَيَّ ۖ وَاللَّهُ عَلَىٰ مَا نَقُولُ وَكِيلٌ
मूसा ने कहा ये मेरे और आप के दरमियान (मुहाएदा) है दोनों मुद्दतों मे से मै जो भी पूरी कर दूँ (मुझे एख्तियार है) फिर मुझ पर जब्र और ज्यादती (देने का आपको हक़) नहीं और हम आप जो कुछ कर रहे हैं (उसका) ख़ुदा गवाह है
29۞ فَلَمَّا قَضَىٰ مُوسَى الْأَجَلَ وَسَارَ بِأَهْلِهِ آنَسَ مِن جَانِبِ الطُّورِ نَارًا قَالَ لِأَهْلِهِ امْكُثُوا إِنِّي آنَسْتُ نَارًا لَّعَلِّي آتِيكُم مِّنْهَا بِخَبَرٍ أَوْ جَذْوَةٍ مِّنَ النَّارِ لَعَلَّكُمْ تَصْطَلُونَ
ग़रज़ मूसा का छोटी लड़की से निकाह हो गया और रहने लगे फिर जब मूसा ने अपनी (दस बरस की) मुद्दत पूरी की और बीवी को लेकर चले तो अंधेरीरात जाड़ों के दिन राह भूल गए और बीबी सफ़ूरा को दर्द ज़ेह शुरु हुआ (इतने में) कोहेतूर की तरफ आग दिखायी दी तो अपने लड़के बालों से कहा तुम लोग ठहरो मैने यक़ीनन आग देखी है (मै वहाँ जाता हूँ) क्या अजब है वहाँ से (रास्ते की) कुछ ख़बर लाऊँ या आग की कोई चिंगारी (लेता आऊँ) ताकि तुम लोग तापो
30فَلَمَّا أَتَاهَا نُودِيَ مِن شَاطِئِ الْوَادِ الْأَيْمَنِ فِي الْبُقْعَةِ الْمُبَارَكَةِ مِنَ الشَّجَرَةِ أَن يَا مُوسَىٰ إِنِّي أَنَا اللَّهُ رَبُّ الْعَالَمِينَ
ग़रज़ जब मूसा आग के पास आए तो मैदान के दाहिने किनारे से इस मुबारक जगह में एक दरख्त से उन्हें आवाज़ आयी कि ऐ मूसा इसमें शक नहीं कि मै ही अल्लाह सारे जहाँ का पालने वाला हूँ
31وَأَنْ أَلْقِ عَصَاكَ ۖ فَلَمَّا رَآهَا تَهْتَزُّ كَأَنَّهَا جَانٌّ وَلَّىٰ مُدْبِرًا وَلَمْ يُعَقِّبْ ۚ يَا مُوسَىٰ أَقْبِلْ وَلَا تَخَفْ ۖ إِنَّكَ مِنَ الْآمِنِينَ
और यह (भी आवाज़ आयी) कि तुम आपनी छड़ी (ज़मीन पर) डाल दो फिर जब (डाल दिया तो) देखा कि वह इस तरह बल खा रही है कि गोया वह (ज़िन्दा) अजदहा है तो पीठ फेरके भागे और पीछे मुड़कर भी न देखा (तो हमने फरमाया) ऐ मूसा आगे आओ और डरो नहीं तुम पर हर तरह अमन व अमान में हो
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अनुवाद — अल-क़सस 29

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Tuesday, August 18, 2026

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