अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَيَّمَا الْأَجَلَيْنِ: दोनों अवधियों में से कोई भी (आठ साल या दस साल)।
- قَضَيْتُ: मैं पूरा कर लूँ।
- فَلَا عُدْوَانَ عَلَيَّ: मुझ पर कोई अत्याचार नहीं होगा, अर्थात मुझसे अधिक की माँग नहीं की जाएगी।
- وَكِيلٌ: देखभाल करने वाला, संरक्षक, गवाह।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) और उस नेक बुज़ुर्ग (शुएब अलैहिस्सलाम) के बीच यह समझौता हुआ कि मूसा आठ साल या दस साल उनकी सेवा करेंगे और बदले में वे अपनी बेटी से उनका निकाह कर देंगे, तो मूसा (अलैहिस्सलाम) ने इस समझौते को पक्का करते हुए कहा: "यह बात मेरे और आपके बीच तय हो गई है। मैं इन दोनों अवधियों में से जो भी पूरी कर दूँ — चाहे आठ साल हों या दस साल — तो मैंने अपना वादा पूरा कर दिया, और मुझ पर कोई ज़्यादती या अत्याचार नहीं होगा, यानी मुझसे इससे अधिक काम नहीं माँगा जाएगा। और अल्लाह हमारी इस बात पर गवाह और देखभाल करने वाला है।"
यह एक बहुत ही पवित्र और बरकत वाला समझौता था, जो अल्लाह के एक नेक नबी और एक परहेज़गार बुज़ुर्ग के बीच हुआ। इस समझौते में न तो कोई धोखा था, न कोई चालाकी, बल्कि पूरी स्पष्टता और ईमानदारी थी। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी बात को अल्लाह को गवाह बनाकर कहा, जो दर्शाता है कि एक मुसलमान को चाहिए कि वह हर मामले में अल्लाह को सामने रखे और अपने वादों को पूरा करे।
इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि:
- वादा पूरा करना — एक सच्चे इंसान की पहचान है। मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपने वादे को पूरी मज़बूती से निभाया।
- स्पष्टता — किसी भी काम या समझौते में स्पष्टता होनी चाहिए ताकि बाद में कोई विवाद न हो।
- अल्लाह पर भरोसा — हर मामले में अल्लाह को गवाह बनाना चाहिए, क्योंकि वही सब कुछ देखता और जानता है।
- आसानी और नर्मी — मूसा (अलैहिस्सलाम) ने जो शर्त मानी, वह बहुत आसान थी — आठ साल या दस साल। उन्होंने कोई कठिनाई या ज़िद नहीं की, बल्कि जो भी अवधि पूरी करनी पड़े, उसे खुशी से स्वीकार किया।
यह घटना हमें सिखाती है कि जीवन में जब भी हम कोई समझौता करें, तो उसे अल्लाह की निगरानी में करें, साफ़ दिल से करें, और फिर उसे पूरा करने की पूरी कोशिश करें। अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो अपने वादों को पूरा करते हैं और अपने कामों में ईमानदार होते हैं। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देता है।
📜 आयत 26-30 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 28
सूरा अल-क़सस आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मूसा ने कहा ये मेरे और आप के दरमियान (मुहाएदा)…सूरा आयत 28/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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