अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَوْلَا: क्यों नहीं / ऐसा क्यों नहीं हुआ
- أُوتِيَ: दिया गया
- تَظَاهَرَا: एक-दूसरे की मदद की, परस्पर सहयोग किया
- بِكُلٍّ: दोनों में से प्रत्येक से
तफ़सीर (व्याख्या):
जब अल्लाह की ओर से सत्य (क़ुरआन और मुहम्मद ﷺ) क़ुरैश के काफ़िरों के पास आया, तो उन्होंने अहंकार और जिद के साथ कहा: "इस पैग़म्बर को वैसा ही क्यों नहीं दिया गया जैसा मूसा (अलैहिस्सलाम) को दिया गया था?" उनका इशारा उन चमत्कारों की ओर था जो मूसा को दिए गए थे, जैसे लाठी का साँप बनना, हाथ का चमकना, और तौरात जैसी किताब जो एक बार में उतरी। उन्होंने यह बात यहूदियों के कहने पर कही थी, क्योंकि उन्होंने मक्का के काफ़िरों को यह सुझाव दिया था।
अल्लाह ने उनके इस आक्षेप का उत्तर दिया: "क्या वे पहले मूसा को दी गई चीज़ों का इनकार नहीं कर चुके थे?" यानी यहूदी और काफ़िर पहले भी मूसा (अलैहिस्सलाम) की आयतों और चमत्कारों को झुठला चुके थे। उन्होंने कहा था कि तौरात और क़ुरआन दोनों जादू हैं जो एक-दूसरे की मदद करते हैं। कुछ का कहना था कि मूसा और मुहम्मद दोनों जादूगर हैं, और कुछ का कहना था कि मूसा और हारून दोनों जादूगर थे। उन्होंने साफ़ कहा: "हम इन दोनों में से हर एक को नहीं मानते, हम सबका इनकार करते हैं।"
यह उनकी सबसे बड़ी ज़ालिमाना बात थी — पहले उन्होंने मूसा के चमत्कारों को जादू कहकर झुठलाया, फिर जब मुहम्मद ﷺ आए तो उनसे वही चमत्कार माँगने लगे, और जब क़ुरआन जैसा अद्भुत और चिरस्थायी चमत्कार मिला, तो उसे भी जादू कहकर खारिज कर दिया। यह उनकी हठधर्मिता और सत्य से मुँह मोड़ने की साफ़ दलील है।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें सीख मिलती है कि सत्य की पहचान के लिए खुली आँख और साफ़ दिल चाहिए। जो लोग सिर्फ़ बहाने ढूँढते हैं, वे हर युग में सत्य को झुठलाने का रास्ता निकाल लेते हैं। अल्लाह ने हर पैग़म्बर को उसकी क़ौम के हिसाब से चमत्कार दिए — मूसा को जादू के दौर में ऐसे चमत्कार दिए जो जादूगरों को मात दे दें, और मुहम्मद ﷺ को क़ुरआन जैसा शाश्वत चमत्कार दिया जो 1400 साल से चुनौती दे रहा है और आज भी कोई उसके समान नहीं ला सका। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने हमें क़ुरआन जैसी किताब दी जो हर ज़माने के लिए हिदायत है। हमें चाहिए कि हम इसे खुले दिल से पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें — क्योंकि यही वह सत्य है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचा सकता है।
📜 आयत 46-50 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 48
सूरा अल-क़सस आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मगर फिर जब हमारी बारगाह से (दीन) हक़ उनके पास…सूरा आयत 48/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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