अल-क़सस · 47/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
وَلَوْلَا أَن تُصِيبَهُم مُّصِيبَةٌ بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ فَيَقُولُوا رَبَّنَا لَوْلَا أَرْسَلْتَ إِلَيْنَا رَسُولًا فَنَتَّبِعَ آيَاتِكَ وَنَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ ۝٤٧
Wa law laaa an tuseebahum museebatum bimaa qaddamat aideehim fa yaqooloo Rabbanaa law laaa arsalta ilainaa Rasoolan fanattabi`a Aayaatika wa nakoona minal mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
और अगर ये नही होता कि जब उन पर उनकी अगली करतूतों की बदौलत कोई मुसीबत पड़ती तो बेसाख्ता कह बैठते कि परवरदिगार तूने हमारे पास कोई पैग़म्बर क्यों न भेजा कि हम तेरे हुक्मों पर चलते और ईमानदारों में होते (तो हम तुमको न भेजते )

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُصِيبَةٌ (मुसीबत): आपदा, यातना, अज़ाब
  • بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ (बिमा क़द्दमत अय्दीहिम): उनके कर्मों के कारण, जो उन्होंने आगे भेजा (अर्थात उनके कुकर्म और पाप)
  • لَوْلَا (लौला): क्यों नहीं, काश
  • فَنَتَّبِعَ (फ़नत्तबि'): तो हम अनुसरण करते
  • آيَاتِكَ (आयातिक): तेरी आयतें (निशानियाँ और रहस्योद्घाटित शिक्षाएँ)

विस्तृत व्याख्या:

यह आयत अल्लाह तआला की उस महान कृपा और दया को बयान करती है जो उसने अपने बंदों पर की है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि अगर हम इन काफ़िरों को उनके कुकर्मों और अविश्वास के कारण तुरंत पकड़ लेते और उन पर आपदा भेज देते, तो वे क़यामत के दिन या उस समय यह बहाना बना सकते थे कि "ऐ हमारे रब! तूने हमारी ओर कोई रसूल क्यों नहीं भेजा? अगर तू रसूल भेजता तो हम तेरी आयतों का अनुसरण करते और ईमान लाने वालों में से हो जाते।"

इसलिए अल्लाह तआला ने अपनी बेपनाह रहमत से उन पर अज़ाब को टाल दिया और रसूल भेजे, ताकि उनके पास कोई बहाना न बचे और अल्लाह की ओर से हुज्जत (प्रमाण) पूरी हो जाए। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) है कि वह किसी क़ौम पर तब तक अज़ाब नहीं भेजता जब तक उनके पास रसूल न आ जाए और उन्हें सच्चाई स्पष्ट न कर दे।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला कितना दयालु और कृपालु है। वह चाहता तो सबको तुरंत पकड़ लेता, लेकिन उसने लोगों को मौका दिया, रसूल भेजे, किताबें उतारीं, ताकि कोई यह न कह सके कि हमें पता ही नहीं था। यह अल्लाह की ओर से पूरा न्याय और पूरी दया है।

आज भी हमारे पास कुरआन और रसूल ﷺ की शिक्षाएँ मौजूद हैं। हमें चाहिए कि इन आयतों को पढ़ें, समझें और उन पर अमल करें। यही हमारी सफलता का रास्ता है। अल्लाह ने हमें बहाने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी है — हमारे पास रौशनी है, हमें उसे अपनाना है। जो लोग इस रौशनी को अपनाएँगे, वे दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब होंगे, और जो इसे ठुकराएँगे, उनके पास कोई उज़्र (बहाना) नहीं होगा।

याद रखें, अल्लाह ने हर युग में अपने रसूल भेजे और आख़िरी रसूल मुहम्मद ﷺ को पूरी मानवजाति के लिए भेजा। उनका संदेश आज भी हमारे बीच मौजूद है। कितनी बड़ी कृपा है कि हम उस संदेश को पढ़ सकते हैं, समझ सकते हैं और उस पर अमल कर सकते हैं। आओ, हम इस नेमत की क़द्र करें और अपने जीवन को कुरआन और सुन्नत के अनुसार ढालें।



📜 आयत 45-49 — अल-क़सस

45وَلَٰكِنَّا أَنشَأْنَا قُرُونًا فَتَطَاوَلَ عَلَيْهِمُ الْعُمُرُ ۚ وَمَا كُنتَ ثَاوِيًا فِي أَهْلِ مَدْيَنَ تَتْلُو عَلَيْهِمْ آيَاتِنَا وَلَٰكِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَ
मगर हमने (मूसा के बाद) बहुतेरी उम्मतें पैदा की फिर उन पर एक ज़माना दराज़ गुज़र गया और न तुम मदैन के लोगों में रहे थे कि उनके सामने हमारी आयते पढ़ते (और न तुम को उन के हालात मालूम होते) मगर हम तो (तुमको) पैग़म्बर बनाकर भेजने वाले थे
46وَمَا كُنتَ بِجَانِبِ الطُّورِ إِذْ نَادَيْنَا وَلَٰكِن رَّحْمَةً مِّن رَّبِّكَ لِتُنذِرَ قَوْمًا مَّا أَتَاهُم مِّن نَّذِيرٍ مِّن قَبْلِكَ لَعَلَّهُمْ يَتَذَكَّرُونَ
और न तुम तूर की किसी जानिब उस वक्त मौजूद थे जब हमने (मूसा को) आवाज़ दी थी (ताकि तुम देखते) मगर ये तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी है ताकि तुम उन लोगों को जिनके पास तुमसे पहले कोई डराने वाला आया ही नहीं डराओ ताकि ये लोग नसीहत हासिल करें
47وَلَوْلَا أَن تُصِيبَهُم مُّصِيبَةٌ بِمَا قَدَّمَتْ أَيْدِيهِمْ فَيَقُولُوا رَبَّنَا لَوْلَا أَرْسَلْتَ إِلَيْنَا رَسُولًا فَنَتَّبِعَ آيَاتِكَ وَنَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
और अगर ये नही होता कि जब उन पर उनकी अगली करतूतों की बदौलत कोई मुसीबत पड़ती तो बेसाख्ता कह बैठते कि परवरदिगार तूने हमारे पास कोई पैग़म्बर क्यों न भेजा कि हम तेरे हुक्मों पर चलते और ईमानदारों में होते (तो हम तुमको न भेजते )
48فَلَمَّا جَاءَهُمُ الْحَقُّ مِنْ عِندِنَا قَالُوا لَوْلَا أُوتِيَ مِثْلَ مَا أُوتِيَ مُوسَىٰ ۚ أَوَلَمْ يَكْفُرُوا بِمَا أُوتِيَ مُوسَىٰ مِن قَبْلُ ۖ قَالُوا سِحْرَانِ تَظَاهَرَا وَقَالُوا إِنَّا بِكُلٍّ كَافِرُونَ
मगर फिर जब हमारी बारगाह से (दीन) हक़ उनके पास पहुँचा तो कहने लगे जैसे (मौजिज़े) मूसा को अता हुए थे वैसे ही इस रसूल (मोहम्मद) को क्यों नही दिए गए क्या जो मौजिज़े इससे पहले मूसा को अता हुए थे उनसे इन लोगों ने इन्कार न किया था कुफ्फ़ार तो ये भी कह गुज़रे कि ये दोनों के दोनों (तौरैत व कुरान) जादू हैं कि बाहम एक दूसरे के मददगार हो गए हैं
49قُلْ فَأْتُوا بِكِتَابٍ مِّنْ عِندِ اللَّهِ هُوَ أَهْدَىٰ مِنْهُمَا أَتَّبِعْهُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और ये भी कह चुके कि हम एब के मुन्किर हैं (ऐ रसूल) तुम (इन लोगों से) कह दो कि अगर सच्चे हो तो ख़ुदा की तरफ से एक ऐसी किताब जो इन दोनों से हिदायत में बेहतर हो ले आओ
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अनुवाद — अल-क़सस 47

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Tuesday, August 18, 2026

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