अल-क़सस · 58/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़सस
وَكَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ بَطِرَتْ مَعِيشَتَهَا ۖ فَتِلْكَ مَسَاكِنُهُمْ لَمْ تُسْكَن مِّن بَعْدِهِمْ إِلَّا قَلِيلًا ۖ وَكُنَّا نَحْنُ الْوَارِثِينَ ۝٥٨
Wa kam ahlaknaa min qaryatim batirat ma`eeshatahaa fatilka masaainuhum lam tuskam mim ba`dihim illaa qaleelaa; wa kunnaa Nahnul waariseen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने तो बहुतेरी बस्तियाँ बरबाद कर दी जो अपनी मइशत (रोजी) में बहुत इतराहट से (ज़िन्दगी) बसर किया करती थीं-(तो देखो) ये उन ही के (उजड़े हुए) घर हैं जो उनके बाद फिर आबाद नहीं हुए मगर बहुत कम और (आख़िर) हम ही उनके (माल व असबाब के) वारिस हुए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَطِرَتْ مَعِيشَتَهَا: अपनी समृद्धि और सुख-सुविधाओं पर इतरा गई, नेमतों का घमंड करने लगी और उनका दुरुपयोग किया।
  • لَمْ تُسْكَن مِّن بَعْدِهِمْ إِلَّا قَلِيلًا: उनके बाद उनके घरों में बहुत कम लोग आए, केवल राहगीर या मुसाफिर कुछ देर के लिए ठहरे।
  • الْوَارِثِينَ: सब कुछ अपनी ओर ले लेने वाले, यानी अल्लाह ही अंततः सब कुछ का मालिक है।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में हमें इतिहास का एक सबक सिखा रहे हैं। कितनी ही बस्तियाँ और सभ्यताएँ थीं जो अपनी खुशहाली, धन-दौलत और आराम-आराम की ज़िंदगी पर इतरा गईं। उन्होंने अल्लाह की नेमतों को भुला दिया, अपने पैग़म्बरों की बात न मानी, और अपनी शरारत व नाफ़रमानी में मग्न रहीं। जब उनका घमंड और ज़ुल्म हद से बढ़ गया, तो अल्लाह ने उन पर अपना अज़ाब भेजा और उन्हें तबाह कर दिया।

आज उनकी बस्तियाँ वीरान पड़ी हैं। उनके महल और घर खंडहर बन चुके हैं। उनके बाद कोई उनमें नहीं रहता, सिवाय कुछ राहगीरों के जो कुछ पल के लिए वहाँ ठहर जाते हैं। यही हाल उन लोगों का है जो अल्लाह की नेमतों का शुक्र नहीं करते और अपनी ताकत व दौलत पर घमंड करते हैं।

अल्लाह फ़रमाता है: "हम ही अंततः सब कुछ के वारिस हैं।" यानी जब सब लोग मर जाएँगे, सारी दौलत, सारी ज़मीन, सब कुछ अल्लाह ही के पास रहेगा। वही सब कुछ का मालिक है, और उसी की तरफ सबको लौटना है। यह आयत हमें बताती है कि दुनिया की ज़िंदगी फ़ानी है, यहाँ की नेमतें और सुख-सुविधाएँ किसी के काम नहीं आएँगी जब अल्लाह का फ़ैसला आ जाएगा।


दावती पहलू (नसीहत):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। हमें चाहिए कि अल्लाह की दी हुई नेमतों पर घमंड न करें, बल्कि उनका शुक्र अदा करें और उन्हें अल्लाह की राह में इस्तेमाल करें। हमारी दौलत, हमारी ज़िंदगी, हमारी ताकत — सब कुछ अल्लाह की देन है। जब वह चाहेगा, सब कुछ छीन लेगा। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत में गुज़ारना चाहिए, ताकि आख़िरत में हमें कामयाबी मिले। याद रखिए, यह दुनिया किसी के लिए भी हमेशा नहीं रही, और न ही रहेगी। अच्छे कर्म ही वह चीज़ हैं जो हमारे साथ आगे जाएँगे।



📜 आयत 56-60 — सूरा अल-क़सस

56إِنَّكَ لَا تَهْدِي مَنْ أَحْبَبْتَ وَلَٰكِنَّ اللَّهَ يَهْدِي مَن يَشَاءُ ۚ وَهُوَ أَعْلَمُ بِالْمُهْتَدِينَ
(ऐ रसूल) बेशक तुम जिसे चाहो मंज़िले मक़सूद तक नहीं पहुँचा सकते मगर हाँ जिसे खुदा चाहे मंज़िल मक़सूद तक पहुचाए और वही हिदायत याफ़ता लोगों से ख़ूब वाक़िफ़ है
57وَقَالُوا إِن نَّتَّبِعِ الْهُدَىٰ مَعَكَ نُتَخَطَّفْ مِنْ أَرْضِنَا ۚ أَوَلَمْ نُمَكِّن لَّهُمْ حَرَمًا آمِنًا يُجْبَىٰ إِلَيْهِ ثَمَرَاتُ كُلِّ شَيْءٍ رِّزْقًا مِّن لَّدُنَّا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
(ऐ रसूल) कुफ्फ़ार (मक्का) तुमसे कहते हैं कि अगर हम तुम्हारे साथ दीन हक़ की पैरवी करें तो हम अपने मुल्क़ से उचक लिए जाएँ (ये क्या बकते है) क्या हमने उन्हें हरम (मक्का) में जहाँ हर तरह का अमन है जगह नहीं दी वहाँ हर किस्म के फल रोज़ी के वास्ते हमारी बारगाह से खिंचे चले जाते हैं मगर बहुतेरे लोग नहीं जाते
58وَكَمْ أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ بَطِرَتْ مَعِيشَتَهَا ۖ فَتِلْكَ مَسَاكِنُهُمْ لَمْ تُسْكَن مِّن بَعْدِهِمْ إِلَّا قَلِيلًا ۖ وَكُنَّا نَحْنُ الْوَارِثِينَ
और हमने तो बहुतेरी बस्तियाँ बरबाद कर दी जो अपनी मइशत (रोजी) में बहुत इतराहट से (ज़िन्दगी) बसर किया करती थीं-(तो देखो) ये उन ही के (उजड़े हुए) घर हैं जो उनके बाद फिर आबाद नहीं हुए मगर बहुत कम और (आख़िर) हम ही उनके (माल व असबाब के) वारिस हुए
59وَمَا كَانَ رَبُّكَ مُهْلِكَ الْقُرَىٰ حَتَّىٰ يَبْعَثَ فِي أُمِّهَا رَسُولًا يَتْلُو عَلَيْهِمْ آيَاتِنَا ۚ وَمَا كُنَّا مُهْلِكِي الْقُرَىٰ إِلَّا وَأَهْلُهَا ظَالِمُونَ
और तुम्हारा परवरदिगार जब तक उन गाँव के सदर मक़ाम पर अपना पैग़म्बर न भेज ले और वह उनके सामने हमारी आयतें न पढ़ दे (उस वक्त तक) बस्तियों को बरबाद नहीं कर दिया करता-और हम तो बस्तियों को बरबाद करते ही नहीं जब तक वहाँ के लोग ज़ालिम न हों
60وَمَا أُوتِيتُم مِّن شَيْءٍ فَمَتَاعُ الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَزِينَتُهَا ۚ وَمَا عِندَ اللَّهِ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰ ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
और तुम लोगों को जो कुछ अता हुआ है तो दुनिया की (ज़रा सी) ज़िन्दगी का फ़ायदा और उसकी आराइश है और जो कुछ ख़ुदा के पास है वह उससे कही बेहतर और पाएदार है तो क्या तुम इतना भी नहीं समझते
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अनुवाद — अल-क़सस 58

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Friday, October 2, 2026

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