अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- मुहलिक – विनाश करने वाला
- उम्मिहा – उस (बस्ती) की जड़ या सबसे बड़ा केंद्र (यहाँ मक्का)
- यत्लू – पढ़कर सुनाना
- ज़ालिमून – अत्याचारी (अपने ऊपर कु़फ़्र और गुनाहों के कारण ज़ुल्म करने वाले)
तफ़सीर:
ऐ नबी! आपका रब किसी बस्ती को उस समय तक विनाश के अधीन नहीं करता, जब तक कि वह उस बस्ती के केंद्र (उम्मुल-क़ुरा) में एक रसूल न भेज दे, जो उन्हें अल्लाह की आयतें पढ़कर सुनाए। यह अल्लाह की रहमत और अदल का तक़ाज़ा है कि वह किसी क़ौम को सज़ा देने से पहले उनके पास अपना पैग़ाम पहुँचा दे, ताकि कोई बहाना बाक़ी न रहे।
चुनाँचे अल्लाह ने मक्का — जो उस ज़माने में अरब का सबसे बड़ा केंद्र और क़ुरैश का मरकज़ था — में आपको रसूल बनाकर भेजा, ताकि आप उन्हें क़ुरआन की आयतें सुनाएँ और उन्हें अज़ाब से डराएँ। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) रही है कि वह जब किसी बस्ती को हलाक करता है, तो उसके लोग पहले से ज़ालिम होते हैं — यानी उन्होंने कु़फ़्र और नाफ़रमानी करके अपने ऊपर ज़ुल्म किया होता है। अल्लाह कभी किसी बस्ती को उस हालत में तबाह नहीं करता जब उसके लोग सीधे रास्ते पर हों या उनके पास हुज्जत (स्पष्ट प्रमाण) न पहुँची हो।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत बेहद वसीअ है — वह बंदों पर उस वक़्त तक अज़ाब नाज़िल नहीं करता जब तक वह उन्हें माफ़ी का मौक़ा न दे दे। रसूलों का भेजना अल्लाह की तरफ़ से सबसे बड़ी नेमत है, क्योंकि इससे लोगों को हिदायत पाने का रास्ता मिलता है।
आज भी हमारे पास क़ुरआन और सुन्नत मौजूद है — यही हमारे लिए रहमत और हिदायत का ज़रिया है। हमें चाहिए कि इस नेमत की क़द्र करें, उस पर अमल करें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक ढालें, ताकि हम उन बस्तियों के हाल से सबक़ लें जो अपने ज़ुल्म की वजह से तबाह कर दी गईं। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 57-61 — अल-क़सस
अनुवाद — अल-क़सस 59
सूरा अल-क़सस आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और तुम्हारा परवरदिगार जब तक उन गाँव के सदर मक़ाम…सूरा आयत 59/88 — अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़सस सुनें, अल-क़सस अनुवाद, अल-क़सस mp3, अल-क़सस pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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