Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَتَنَّا: हमने परीक्षण किया, आज़माया।
- صَدَقُوا: सच्चाई पर स्थिर रहे, अपने ईमान में सच्चे रहे।
- الْكَاذِبِينَ: झूठे, जो ईमान के दावे में झूठे हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने नबी ﷺ और उनके साथियों को तसल्ली देते हुए फ़रमाते हैं कि हमने उन लोगों को भी परीक्षण में डाला था जो तुमसे पहले गुज़रे हैं। हर ज़माने में अल्लाह ने अपने नबियों और उनकी उम्मतों को मुश्किलों, तकलीफ़ों और सख्त इम्तिहानों से गुज़ारा है। यह कोई नई बात नहीं कि ईमान लाने वालों को परेशानियों का सामना करना पड़े। हज़रत याहया (अलैहिस्सलाम) को आरी से चीरा गया, हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के साथियों को सख्त अज़ाब दिए गए, और हर नबी की उम्मत को उसके दुश्मनों की तरफ से तकलीफ़ें पहुँचाई गईं। मगर जो लोग सच्चे दिल से ईमान लाए थे, उन्होंने हर मुश्किल को सहन किया और अपने दीन पर क़ायम रहे।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह परीक्षण इसलिए है ताकि अल्लाह के इल्म के मुताबिक़ सामने आ जाए कि कौन अपने ईमान के दावे में सच्चा है और कौन झूठा। अल्लाह को तो सब कुछ पहले से मालूम है, लेकिन यह इम्तिहान इसलिए है ताकि लोगों के सामने सच्चे और झूठे का फ़र्क़ साफ़ हो जाए, और हर इंसान अपने अमल से यह साबित करे कि उसका ईमान कितना सच्चा है। जो लोग सिर्फ़ ज़ुबान से ईमान का दावा करते हैं, वे जब मुश्किलें आती हैं तो पलट जाते हैं, जबकि सच्चे मोमिन हर हालत में अल्लाह पर भरोसा रखते हैं और साबित क़दम रहते हैं।
यह आयत हमें सिखाती है कि मुसीबतें और आज़माइशें अल्लाह की राह में आने वाले हर इंसान के लिए एक सुन्नत (क़ानून) हैं। यह कोई अजीब बात नहीं कि एक मुसलमान को अपने ईमान की वजह से तकलीफ़ उठानी पड़े। बल्कि यही तो सच्चे ईमान की पहचान है। जब हम मुश्किलों में सब्र करते हैं और अल्लाह पर भरोसा रखते हैं, तो हम साबित करते हैं कि हमारा ईमान सिर्फ़ ज़ुबानी नहीं, बल्कि दिली है। अल्लाह अपने सच्चे बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता, और जो लोग उसकी राह में सब्र करते हैं, उनके लिए अल्लाह के पास बड़ा अज्र और इनाम है। यह इम्तिहान हमारे लिए रहमत है, क्योंकि इसी के ज़रिए हमारा दर्जा बुलंद होता है और हमारा ईमान मज़बूत होता है।
📜 आयत 1-5 — सूरा अल-अंकबूत
अनुवाद — अल-अंकबूत 3
सूरा अल-अंकबूत आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने तो उन लोगों का भी इम्तिहान लिया जो…सूरा आयत 3/69 — सूरा अल-अंकबूत العنكبوت (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अंकबूत सुनें, सूरा अल-अंकबूत अनुवाद, सूरा अल-अंकबूत mp3, सूरा अल-अंकबूत pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अंकबूत
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


